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ग्रान कनारिया में आप्रवासियों और उन्हें बचाने एवं उनका साथ देनेवाले संगठनों से पोप लियो 14वें की मुलाकात ग्रान कनारिया में आप्रवासियों और उन्हें बचाने एवं उनका साथ देनेवाले संगठनों से पोप लियो 14वें की मुलाकात 

ग्रान कनारिया में पोप लियो : मानव प्रतिष्ठा का कोई पासपोर्ट नहीं

ग्रान कैनारी में आप्रवासियों और उन्हें बचाने एवं उनका साथ देनेवाले संगठनों से एक मुलाकात में, पोप लियो ने दुनिया से अपील की कि वे उनके दुःख को नजरअंदाज न करें और वैध एवं सुरक्षित आप्रवासन रास्तों की मांग की, मानव तस्करी तथा शोषण की निंदा की, और जोर दिया कि “मानव प्रतिष्ठा का कोई पासपोर्ट नहीं होता और बॉर्डर पार करते समय इसकी कीमत कम नहीं होती।”

वाटिकन न्यूज

कैनरी आइलैंड, बृहस्पतिवार, 11 जून 26 (रेई) : स्पेन की प्रेरितिक यात्रा के तीसरे पड़ाव पर 11 जून को पोप लियो 14वें ने ग्रान कैनरी के पोर्तो दी अर्गवीनग्वीन में आप्रवासियों के साथ काम करनेवाले संगठनों से मुलाकात की। कुछ लोगों के साक्ष्य सुनने और मती रचित सुसमाचार से पाठ पढ़े जाने के बाद, जिसमें अंतिम महा न्याय के बारे बताया गया है, संत पापा ने अपने सम्बोधन में कहा, “प्यारे भाइयो एवं बहनो, हमने अभी-अभी सुसमाचार पाठ के सबसे कठिन अंशों में से एक को सुना। हम जानते हैं कि इसी अध्याय में एक चेतावनी भी है जिसे कोई भी विश्वासी हल्के में नहीं ले सकता।

"तब वे अपने बायें के लोगों से कहेंगे, ’शापितों! मुझ से दूर हट जाओ। उस अनन्त आग में जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिए तैयार की गई है; क्योंकि मैं भूखा था और तुमने मुझे नहीं खिलाया; मैं प्यासा था और तुमने मुझे नहीं पिलाया...(मती 25:41-45)  

सुसमाचार ठोस हो जाता है

पोप ने कहा, “आज, समुद्र के किनारे, ईश्वर का यह वचन ठोस हो जाता है: यहाँ बहुत सारे घायल जीवन आते हैं, जिनका लगभग सब कुछ छीन लिया जाता है, लेकिन उनकी प्रतिष्ठा कभी नहीं खो सकती। यहाँ सुसमाचार हमें दर्शकों की हमारी आरामदायक स्थिति से बाहर निकालता है और हमारे सामने एक भाई या बहन को रखता है जो आगंतुक हैं। यह (सुसमाचार) हमसे पूछता है कि क्या हमने उन लोगों में मसीह को पहचाना है जो रेगिस्तान, रात और समुद्र का सामना करने के बाद, डर, भूख और हिंसा से घिरे हुए जहाज से उतरते हैं।

कनारिया द्वीप में पोप की मुलाकात आप्रवासियों से
कनारिया द्वीप में पोप की मुलाकात आप्रवासियों से   (ANSA)

पोप ने अपनी जिम्मेदारी के प्रतीक चिन्ह अपनी अंगुठी दिखाते हुए कहा, “आप देख सकते हैं, मैंने मछुआरे की अंगूठी पहनी है।” इसका नाम ही हमें गलीलिया सागर की ओर ले जाता है, जहाँ ख्रीस्त ने पेत्रुस को बुलाया और उससे कहा था: “अब से तुम मनुष्यों को पकड़ोगे” (लूक. 5:10)। कलीसिया ने इस वाक्यांश की व्याख्या अपने मिशन की एक छवि के रूप में की है। लेकिन यहाँ और एल हिएरो जैसी जगहों पर, ख्रीस्त का आदेश खास तौर पर प्रभावशाली और दर्दनाक है। यह द्वीप, जो आकार में छोटा, किन्तु इंसानियत में बड़ा है, हजारों लोगों के आने का गवाह रहा है, जिन्हें उनके घरों से निकाल दिया गया था और एक नाजुक नाव के हवाले किया गया था। यहाँ, लोगों को समुद्र से बचाया जाता है और पानी से बेजान लाशें निकाली जाती हैं। यही कारण है कि संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी इन बंदरगाहों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। कलीसिया ऐसे जगहों को नजरअंदाज नहीं कर सकती जहाँ भूख, प्यास, हिंसा, डर या देश निष्काषण जैसी स्थिति, मानव प्रतिष्ठा को चोट पहुँचाता रहे हैं। येसु के शिष्य रात में पुकारने वालों की चीखों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।

समुद्र और इसके राक्षस

बाइबिल की भाषा में, समुद्र खतरे, अंधेरे और उथल-पुथल की निशानी हो सकता है। समुद्र में हमें लेविथान (बाईबिल में एक समुद्री राक्षस) मिलता है, जो उस ताकत को दिखाता है जो खा जाती है, और राहाब, जो उन शक्तियों के घमंड को दिखाता है जो ईश्वर और जीवन के खिलाफ उठती हैं (भजन 74:13–14; 89:10–11; यशायाह 27:1; 51:9; अय्यूब 26:12)। आज भी, इन समुद्रों में राक्षस छिपे हैं: माफिया के रूप में जो निराशा से फायदा उठाते हैं, तस्कर के रूप में जो औरतों और बच्चों को गुलाम बनाते हैं, और उन लोगों के रूप में जिनकी बेपरवाही से गरीब लोग शोषण या भुला दिये जाने के द्वारा निगल लिये जाते हैं।

लेकिन संत पापा ने याद दिलाया कि समुद्र की ताकत से विश्वास कम नहीं होता। हम एक ऐसे ईश्वर में विश्वास करते हैं जो गड़बड़ी को ठीक करते, बुराई को नियंत्रित करते एवं ऐसे रास्ते को खोल देते हैं जहाँ मौत हावी होने के समान लगती है। इस्राएल के लोगों ने इसका अनुभव तब किया जब वे गुलामी से बचने और आजादी की ओर बढ़ने के लिए लाल सागर पार कर रहे थे (निर्गमन 14:21–31)। हम इसे ख्रीस्त में देखते हैं, जो पानी पर चले और तूफान का सामना करते हुए, एक अहम बात कही: “शांत हो! थम जा!” (मारकुस 4:39; cf. मति. 14:25-27)। उनकी आवाज उन शक्तियों के खिलाफ गूंजती रहती है जो हमारे बहुत सारे भाइयों और बहनों को निगल जाती हैं, गुलाम बना लेती हैं और छोड़ देती हैं। अगर ख्रीस्त समुद्र को शांत रहने का आदेश देते हैं, तो कलीसिया उन लोगों के बारे में चुप नहीं रह सकती जिन्हें उसके जल में छोड़ दिया गया है।

आप्रवासियों से पोप की मुलाकात
आप्रवासियों से पोप की मुलाकात   (ANSA)

चेहरे, आंकड़े नहीं

संत पापा ने टीटो और मरिया के साक्ष्यों के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, आपके शब्द हमें दिखाते हैं कि हमारी नजर का बदलना तब शुरू होता है जब आप्रवासी “सिर्फ एक व्यक्ति”, सिर्फ एक श्रेणी या एक आंकड़ा नहीं रह जाता।

तभी हम समझ सकते हैं कि वह छोटी बच्ची हमारी बेटी हो सकती है, और वे चेहरे हमारे परिवार का हिस्सा हो सकते हैं। तब, हमारे अंतःकरण के पास कोई बहाना नहीं होता। दया छोटे-छोटे कामों से शुरू होती है, जैसे कुछ खाद्य सामग्री और थोड़ा दूध बाँटना, या पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ देना (मती. 14:17-21)। मकसद सब कुछ हल करना नहीं है, बल्कि सब कुछ ईश्वर के हाथों में सौंपना है और वहाँ मौजूद रहना है जहाँ लोग परेशान हैं, जहाँ संसाधन कम हैं, जहाँ कोई आम भाषा नहीं है — लेकिन जहाँ इशारे भी बोल सकते हैं। मैं उन सभी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ जो बचाव कार्य में हिस्सा लेते हैं, दूसरों का स्वागत करते और उनका साथ देते हैं, इस बात के गवाह बनते हैं कि ठोस दया जीवन बचा और बदल सकती है।

मानव तस्करी के शिकार लोगों को एक संदेश

यौन शोषण के लिए तस्करी की शिकार ब्लेसिंग के साक्ष्य को लेते हुए पोप ने कहा, “भले ही आप आज यहाँ नहीं हैं, लेकिन आपकी आवाज यहाँ है। अपनी कहानी हमारे साथ शेयर करने के लिए धन्यवाद। आपके नाम का मतलब है “आशीष,” और यह हमें याद दिलाता है कि हर इंसान का जीवन ईश्वर का आशीर्वाद है। कोई भी इसे खरीद, बेच, इस्तेमाल या त्याग नहीं सकता, क्योंकि सृष्टिकर्ता छवि और स्वरूप हर इंसान में चमकती है (उत्पति 1:27)। आपने हमें बताया कि आपने अपना देश इसलिए नहीं छोड़ा क्योंकि आप छोड़ना चाहती थीं, बल्कि इसलिए छोड़ा क्योंकि कोई और रास्ता नहीं था। आपके शब्दों से, हम उन बहुत से लोगों की कहानी सुनते हैं जिन्हें गरीबी, युद्ध, धमकियों या शोषण की वजह से देश छोड़ना पड़ा, क्योंकि उनके सारे रास्ते बंद हो गए थे।”

मुझे उम्मीद है कि यह संदेश आप तक और उन कई दूसरी महिलाओं तक पहुंचेगा जो तस्करी और शोषण की शिकार हैं। अगर दूसरों ने आपके शरीर की कीमत लगायी है, तो जान लें कि ईश्वर ने आपकी अत्यधिक मूल्य  को पहचानना कभी बंद नहीं किया है। अगर दूसरे आपको एक दर्दनाक अतीत में फंसाना चाहते हैं, तो ईश्वर आपके भविष्य के लिए प्रतिज्ञा करते हैं। अगर दूसरे आपके साथ एक चीज की तरह बर्ताव करते हैं, तो कलीसिया आज आपको बताना चाहती है कि आप एक बेटी और एक बहन हैं; आप एक आशीर्वाद हैं। आपका जीवन उन लोगों की नहीं है जिन्होंने आपको नुकसान पहुंचाया; आपका शरीर उन लोगों का नहीं है जिन्होंने आपका फायदा उठाया; आपके दिन उन लोगों के नहीं हैं जो आपको डर की जंजीरों में बांधना चाहते थे। आपका जीवन ईश्वर का है, जिसने आपको एक ऐसी प्रतिष्ठा दी है जो आपसे छीनी नहीं जा सकती। हम आपके साथ तब तक चलना चाहते हैं जब तक यह सच दर्द से ज्यादा मजबूत न लगे।

आप्रवासियों को सम्बोधित कर पोप ने कहा, “प्यारे आप्रवासियो, आपसे कुछ और कहने से पहले, मैं आपकी इज्जत के आगे सिर झुकाना चाहता हूँ। आप सिर्फ संख्या या दस्तावेज नहीं हैं। आप ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने पीछे परिवार और घर छोड़ा है। आपके सपने हैं जिन्हें नजरअंदाज करने का किसी को हक नहीं। मैं आपको यह भी बताना चाहता हूँ कि आपके जीवन की देखभाल होनी चाहिए। अपना जीवन उन लोगों के हवाले न करें जो सौदा करते हैं। उन लोगों पर यकीन न करें जो आपके शरीर, आपके पैसे, आपकी चुप्पी या आपकी आजादी के बदले सहज दुनिया का वादा करते हैं। वे झूठे वादे “मोहिनी गाने” हैं; वे मौत के उद्योग हैं।



यूरोप औ दुनिया को पोप की अपील

संत पापा ने अपनी अपील दोहराते हुए कहा, “यह दुखद घटना आप्रवासी के मूल देशों की अंतरात्मा से एक अपील होनी चाहिए, कि वे शांति, न्याय और विकास की स्थिति लायें। यह पारगमन देशों की अंतरात्मा से भी एक अपील है, कि वे कमजोर लोगों की रक्षा करें और उन्हें अपराधी नेटवर्क के हाथों में न छोड़ दें। यह यूरोप की अंतरात्मा से भी एक अपील है, जो भूमध्यसागर और अटलांटिक में गुमनाम कब्र बनने की आदत डालते हुए मानव प्रतिष्ठा बनाए रखने का दावा नहीं कर सकता, साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की जाती है, कि वह प्रभावशाली और मजबूत सहयोग दे।

कलीसिया को भी चुनौती देते हुए पोप ने कहा, “आप्रवासी का स्वागत करना छोटी बात नहीं हो सकती जिसे कुछ ही स्वयंसेवकों पर छोड़ दिया जाए। हम यूखरिस्त में उपस्थित ख्रीस्त की उपासना के लिए वेदी के सामने घुटने टेकें, जिनसे हमें दया से जीने की ताकत और प्रेरणा मिलती है; यही कारण है कि, हम छोटी नावों और बेड़ों को "नजरअंदाज" नहीं कर सकते, क्योंकि सभी सेवा कार्य और हर प्रतिबद्धता प्रार्थना से ही निकलता है और उसी की ओर ले जाता है।” (लूक. 10:31-32)

संत पापा ने कहा, “इस आइलैंड से, मैं चाहता हूँ कि आज बोलनेवालों की आवाज उन लोगों तक पहुंचे जो जिम्मेदारी के बड़े पदों पर हैं — नागरिक अधिकारी, संसद, सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संगठन — साथ ही ख्रीस्तीय समुदाय, दूसरी धार्मिक परंपराएँ और अच्छे मकसद वाले सभी पुरुष और महिलाओं तक। सिर्फ आगंतुकों को व्यवस्थित करना, आँकड़े वितरित करना, बॉर्डर मजबूत करना या मौत हो जाने पर शोक मनाना काफी नहीं है। आनेवाली हर नाव आप्रवासी के साथ एक सवाल लेकर आती है: कि हमने कैसी दुनिया बनाई है, जहाँ इतने सारे भाई-बहनों को जीवन की तलाश में मौत का जोखिम उठाना पड़ता है?”

आप्रवासियों से मुलाकात
आप्रवासियों से मुलाकात

पलायन नहीं करने का अधिकार

मानव प्रतिष्ठा के लिए कानूनी और सुरक्षित रास्ते, बचाव और मदद, मानव तस्करी के खिलाफ सच्चा सहयोग, पीड़ितों के लिए असरदार सुरक्षा, अपनाने और जोड़ने की गंभीर प्रक्रिया, एवं ऐसी नीतियाँ चाहिए जो हर इंसान को अपनी भूमि में इज्जत से जीने दें। जब जान को खतरा हो तो पनाह लेने का अधिकार है, लेकिन पलायन न करने का भी अधिकार है: बिना भूख, युद्ध, जुल्म, हिंसा, जमीन के रहने लायक न होने, भ्रष्टाचार से गरीबों की रोटी छीनने या हथियारों से बच्चों का भविष्य बर्बाद किए बिना अपने घर में रहने का अधिकार। हम मरे हुए लोगों को गिनने के आदी नहीं हो सकते। मानव प्रतिष्ठा का कोई पासपोर्ट नहीं होता और बॉर्डर पार करने पर इसकी कीमत कम नहीं होती।

हमारी मानवता में क्या बचा है?

जीवन की शाम में, ईश्वर जो हमारे प्यार के आधार पर हमारा न्याय करेंगे ( जॉन ऑफ द क्रॉस, सेइंग्स ऑफ लाइट एंड लव, 57) हमें आज गरीबों और विदेशियों में उन्हें पहचानने की कृपा दें, और हमें दूसरों के दुःख को ऐसे देखने से मुक्त करें जैसे कि यह हमारी चिंता का विषय नहीं है। माउंट कार्मेल की हमारी माता मरियम उन लोगों के साथ रहें जो आगंतुक हैं, उन लोगों को सांत्वना दें जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनका स्वागत करनेवालों को सहारा दें और हम सभी में दया की हिम्मत जगाएँ।

इतिहास हम पर यह आरोप न लगाए कि हम उन लोगों के दर्द को अपने तटों पर एक सामान्य दृश्य में बदल रहे हैं जो पीड़ित हैं। आज, यहाँ समुद्र के किनारे, आनेवाला हर व्यक्ति हमसे पूछता है कि हमारी मानवता में क्या बचा है। देर-सवेर, यह पता चल ही जाएगा कि हमने जीवन की रक्षा की या हमने उदासीनता अपनाया। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

समुद्री यात्रा में मौत के शिकार आप्रवासियों को श्रद्धांजलि देते पोप लियो 14वें
समुद्री यात्रा में मौत के शिकार आप्रवासियों को श्रद्धांजलि देते पोप लियो 14वें

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11 जून 2026, 14:56