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संत पापा बारर्सिलोना के साग्रदा फमिलिया महागिरजाघर में मिस्सा बलिदान के दौरान संत पापा बारर्सिलोना के साग्रदा फमिलिया महागिरजाघर में मिस्सा बलिदान के दौरान  (ANSA)

संत पापा लियोः क्रूस ख्रीस्त के प्रेम का चमकता प्रतीक है

संत पापा लियो ने बारर्सिलोना के साग्रदा फमिलिया महागिरजाघर में नवनिर्मित येसु के क्रूस मीनार का उद्घाटन किया। संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा, "इस महागिरजाघर के ऊपर स्थापित किया गया ख्रीस्त का क्रूस अंतिम लोगों का क्रूस है जो प्रथम बनते है, यह पापियों का क्रूस है जो संत बनते हैं, उन मरे हुए लोगों का जो फिर से जी उठेंगे।"

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने स्पेन की अपनी प्रेरित यात्रा में बारर्सिलोना के साग्रदा फमिलिया महागिरजाघर में यूखारीस्तीय बलिदान अर्पित किया।

“हे प्रभु ईश्वर तेरा नाम समस्त पृथ्वी पर कितना महान है।” (स्तो.8.1) इस स्तोत्र की महिमा से, जो आनंद और आश्चर्य से भरी है, मैं आप सभों का प्रिय भाइयो एवं बहनों अभिवादन करता हूँ। संत पापा ने बारर्सिलोना के महाधर्माध्यक्ष, अन्य धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, उपयाजकों और समर्पित धर्मसमाजियों का अभिवादन करते हुए कहा कि बारर्सिलोना और स्पानी लोगों के इस शहर में, इस संध्या की धर्मविधि में मैं आप सभों का अभिवादन करता हूँ, इसके साथ ही मैं अन्य दूसरे ख्रीस्तीय समुदायों और धर्मों के लोगों का अभिवादन करता हूँ जो धन्यवाद की धर्मविधि में सम्मिलित हो रहते हैं।

आज साग्रदा फमिलिया का महागिरजाघर हमें सभों को, अपना द्वार खोलते हुए मानों यह अपनी बाहों को खोल रहा हो, इस सुन्दर शहर में, इस बलिवेदी में ईश्वर के वचनों को सुनने हेतु स्वागत करता है, जो हमें ईश्वर के एक परिवार का अंग बनाता है, जहाँ हम यूखारीस्त में उनके जीवन द्वारा पोषित किये जाते हैं।

संत पापा बारर्सिलोना के महागिरजाघर प्रांगण में
संत पापा बारर्सिलोना के महागिरजाघर प्रांगण में   (@Vatican Media)

इस तरह, कॉम ला सियुतात कोमटाल और पूरा कतालोनिया इस ईशमंदिर में इकट्ठा होते हैं, जो पूरे स्पेन के लिए एकता और मिलन की निशानी है, हम अपनी निगाहें उठाकर ईश्वर पिता के चेहरे को देखते हैं, बेटे येसु ख्रीस्त में जो मानव बन चमकते हैं।

संत पापा ने कहा कि जैसे कि हम ईश्वर के प्रेम के लिए उनका धन्यवाद अदा करते हैं, हम अपने जीवन में उनके कार्यों के लिए उनकी महिमा करते हैं। हम विशेष रुप से इस अद्वितीय महागिरजाघर के लिए उनका धन्यवाद करते हैं जिसका पवित्रिकरण 2010 में संत पापा बेन्दिक्त 16वें के द्वारा इस बात की याद दिलाते हुए की गई कि यह एक अदृश्यमान ईश्वर की दृश्मान निशानी है, जिसकी महिमा मीनारों की तरह ऊपर उठती है। मेरे पूर्ववर्ती धर्माध्यक्ष की प्रार्थना की निरंतरता में, कुछ क्षणों के बाद मैं येसु ख्रीस्त के विश्व मीनार की आशीष करूंगा।

संत पापा का प्रवचन
संत पापा का प्रवचन   (@Vatican Media)

जीवन एक यात्रा है

संत पापा ने कहा कि यह गिरजाघर बहुत सारे पत्थरों से बनी एक ईमारत है। एक घर जो एक परियोजना के हिसाब से वर्षों में निरंतर बढ़ता रहा है। हम सभी इस जीवित पत्थर के अंग हैं जिसकी नींव और महिमामय मुकुट, आदी और अंत येसु ख्रीस्त हैं। एक स्मरण से अधिक, साग्रदा फामिलिया  का यह महागिरजाघर आज कार्य प्रगति में है, जो हमें इस बात की याद दिलाती है कि ख्रीस्तीय जीवन सदैव एक यात्रा है, क्योंकि यह एक योजना है जिसे ईश्वर संचालित करते हैं।

ईश्वर का बुलावा सहयोग करने हेतु  

हम, इस भांति, अपूर्ण कार्यों में निवास नहीं करते हैं, लेकिन एक मंदिर में जिसका निर्माण कार्य जारी है। वास्तव में, यह अधूरा है, जो कमी नहीं है क्योंकि यह एक चाह का साक्ष्य प्रस्तुत करता है। यह कमी को नहीं बल्कि एक प्रतिज्ञा को प्रकट करता है जिसका हम लगातार सम्मान करना चाहते हैं। इस भांति कृतज्ञता हमारे लिए एक निष्ठा बनाती है जैसे हम ईश्वर की योजना में सहयोग करते हैं- अर्थात इसके लिए वे स्वयं हमें बुलाते हैं। चूंकि हम पवित्र आत्मा के मंदिर हैं, यह कार्य हमारे जीवन में समाहित है, जिसे ईश्वर एक उत्कृष्ट कृति के रूप में देखते हैं जिसे हमें एक साथ करना है, और जिसके लिए वे हमें सहयोग करने को बुलाते हैं।

मिस्सा बलिदान में विश्वासियों का दल
मिस्सा बलिदान में विश्वासियों का दल   (@Vatican Media)

हम ईश्वर के निवास स्थल

इस संबंध में ईश्वर के द्वारा राजा दाऊद को कहे गये वचनों को हम अपने हृदय में वहन करते हैं-“क्या तुम मेरे लिए एक निवास स्थल तैयार करोगे?” (2 सामु. 7.5) इसके विपरीत, “प्रभु यह कहता है ईश्वर तुम्हारे लिए एक निवास स्थल तैयार करेगा।” धर्मग्रंथ के ये वचन हमें यह शिक्षा देती है कि यह हम नहीं हैं जो ईश्वर के लिए एक निवास स्थल तैयार करते हैं, बल्कि ईश्वर हमारे लिए एक स्थान तैयार करते हैं, और वे हमारे लिए स्वयं अपने हृदय को एक स्थान स्वरूप देते हैं-पुत्र का स्थान, हमारे लिए जो अपरिचित थे, प्रिय पुत्र का स्थान, उनके लिए जो पापी थे।

ईश वचन में मुक्ति का निमंत्रण

संत पापा लियो ने कहा कि उनकी इच्छा येसु ख्रीस्त में पूरी होती है, इस भांति हम ईश वचनों के अर्थ को समझ सकते हैं जिसे हमने सुसमाचार में सुना, जिसे येसु फरीसियों से कहते हैं, “तुम पाप में मर जाओगे यदि तुम विश्वास नहीं करोगे कि मैं वही हूँ।”(यो.8.24)। ये हमारे लिए कठोर शब्द  हैं, जिसका उद्देश्य धमकी या ब्लैकमेल करने से नहीं है। यह हमारे लिए मुक्ति हेतु एक निमंत्रण हैं- अर्थात स्वतंत्रता हेतु जो हमें येसु से आता है, जो हमारी अनंत भलाई चाहते हैं। जब हम बुराई की जोखिम में पड़ जाते हैं तो ईश्वर सदैव हमारे संग रहते हैं, सदैव हमारी ओर। “मैं हूँ” यह ईश्वर का अति पवित्र नाम है जिसे वे मूसा के संग जलती हुई झांड़ी से साझा करते हैं, वे अपनी अविचलित निष्ठा को साझा करते हैं। मानव के रुप में ईश्वर, वे सदैव हमारे संग रहते हैं, कृपा और क्षमा के स्रोत, मुक्ति और नये जीवन की भांति। प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा ने कहा, हम येसु पर विश्वास करते हुए युद्ध को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं। हम येसु पर विश्वास करते हुए निर्दोषों को नहीं मार सकते हैं। हम येसु पर विश्वास करते हुए दुःखियों, रोते हुए लोगों, और मुसीबतों से भागने वालों का परित्याग नहीं कर सकते हैं।

महागिरजाघर की भव्यता
महागिरजाघर की भव्यता   (@Vatican Media)

आज की शाम, आइए तब हम येसु के क्रूस की याद करें जो इस महागिरजाघऱ का मुकुट है, यह अंतिम व्यक्ति का क्रूस है जो प्रथम बनता है, पापियों का जो संत बनाते हैं, जो मृत्यु से पुनः जी उठते हैं। तीन सदियों से साग्रादा फमिलिया इस साक्ष्य को प्रस्तुत करता है- जन्म के द्वारा सर्वप्रथम हमारे लिए अंतिम बनते हैं, अपने बलिदान, अपने दुःखभोग द्वारा वे हमें मुक्ति प्रदान करते हैं, उनकी मृत्यु हमें जीवन प्रदान करती है जिसके द्वारा वे हमें दिव्य महिमा के भागीदार बनाते हैं। जैसे हम येसु ख्रीस्त के मीनार की प्रशंसा करते हैं, हम अपनी निगाहें उनकी ओर उठाते हैं, उनकी ओर जो हमें ईश्वर और स्वयं हमारे सच्चाई को प्रकट करते हैं। येसु को देखने के द्वारा हम दुनिया को नई निगाहों से देख सकते हैं- इस भांति क्रूस का मीनार हमारे लिए करूणा का एक झंडा बनता है, क्योंकि ईश्वर हमें इसी रूप में प्रेम करते हैं, मृत्यु को हमारे लिए आशा की एक निशानी में परिवर्तित कर देते हैं। येसु के क्रूस में, हमारा विश्वास अपनी शिखर तक पहुंचता है, “जैसे कि शिखर के आधार पर अंकित शिलालेख से पता चलता है: यह क्रूस दिन में चमकता, सूर्य की रोशनी बनता, और रात में चमकता है, भूमध्य सागर को देखते हुए शहर को ज्योतिगृह की भांति प्रकाशित करता है।

क्रूस प्रेम का प्रतीक

संत पापा ने कहा, हाँ, येसु ख्रीस्त की ज्योति रात में चमकती है, यद्यपि अंधकार ने उसे नहीं स्वीकारा (यो.1.5,11)। फिर भी इस परित्याग का अर्थ यह नहीं होता कि ईश्वर के प्रेम की कमी हैः “जब तुम मानव पुत्र को ऊपर उठाओगे, तो यह जान जाओगे कि मैं वही हूँ और मैं अपनी ओर से कुछ नहीं करता, मैं जो कुछ कहता हूँ वैसे ही कहता हूँ जैसे पिता ने मुझे सिखाया है” (यो. 8.28)। यह जरूरी है कि हम क्रसित येसु के दुःखभोग से पार हों जिससे हम उनके पुनरूत्थान की माहिमा द्वारा प्रकाशित हो सकें, क्योंकि पिता शुरू से ही हमें जीवन देने की शिक्षा देते हैं, और पुत्र जो उनके द्वारा जीवन प्राप्त करते हैं, उसे हमें पवित्र आत्मा की शक्ति से प्रदान करते हैं। यही कारण है कि क्रूस हमारे लिए उनके प्रेम का चमकता प्रतीक है। जब ख्रीस्त को ऊपर उठाया गया, हम उनकी महिमामय मानवता को चमकता हुए पाते हैं और हमारे कार्य ईश्वर की महिमा करते हैं। ये सभी ईश्वर के कार्य हैं और कला उनके बीच अनोखा है।

संत पापाः बारर्सिलोना के साग्रदा फमिलिया में मिस्सा

कला में ईश्वर की महिमा

संत पापा ने कहा कि यह विश्वास है जो पत्थरों को आकार देता है और उस इमारत को अर्थपूर्ण बनाता है जिसमें हम साथ रहते हैं। हमारी प्रार्थना में, इस भांति, हम ईश्वर और सारी चीजों, स्वर्ग और पृथ्वी के सृजनहार के मध्य एक वास्ताविक संबंध को पाते हैं। वे वह शिल्पकार हैं जिन्होंने सारे बह्माण्ड में अपनी शानदार छाप छोड़ी है। ईश्वर के रूप में सृष्ट मानव उनकी कला-कृति का प्रत्युत्तर देता है- इस तरह कलाकार हुनर को प्रशंसा में और सृजनात्मकता को सृष्टिकर्ता के साक्ष्य में बदल देता है। एक शिल्पकार के रुप में विश्वास के प्रेरित, पूज्यनीय आंतोनी गौऊदी ने इस स्थान का निर्माण किया इस उद्देश्य से कि वे ईश्वर के रहस्यमय जीवन की चर्चा कर सकें। इस भांति उन्होंने हमारे लिए एक आध्यात्मिक तीर्थ प्रस्तुत किया है, जो हमें येसु से मिलन को अग्रसर करता जो हमारे खातिर जन्मे, मरे और पुनर्जीवित हुए। गौऊदी के संग, जैसे कि हम उनकी मृत्यु की सालगिरह मनाते हैं, हम इस बात की याद करते और इस संध्या बेला में उनके सहयोगियों और हितैषियों के लिए धन्यवाद देते हैं, कलाकारों और मज़दूरों के सहयोग से एक अद्वितीय कलाकृति का निर्माण किया गया है जो पत्थरों, रंगों और रोशनी से बनी एक शानदार शिक्षा को प्रस्तुत करती है। अपने विवेक में, कलीसिया इस भांति बिब्लिया पापेरूम, गरीब व्यक्ति का बाईबल, पुराने महागिरजाघऱ को नया बनाता है, जो अपने आप में सुसमाचार प्रचार की समृद्धि का संदेश है। इस समय में जब ख्याति इतनी महत्वपूर्ण हो जाती है, यह हमारे लिए और भी स्पष्ट हो जाता है कि कला और सुंदरता कैसे सुसमाचार प्रचार के खास माध्यम बनते हैं।

महागिरजाघर में स्थापित क्रूस
महागिरजाघर में स्थापित क्रूस

जीवन जीने की कला सीखें

संत पापा ने कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों, इस गिरजाघर की सुन्दरता हमें हमारे गुरू और स्वामी से उनके सुसमाचार के अनुसार जीवन जीने की कला सीखने को प्रेरित करती है। अपनी निगाहें उनकी ओर उठाते हुए, जो क्रूसित और पुनर्जीवित हुए, आइए हम अपने को उन्हें उठाने हेतु समर्पित करें जो गिरे पड़े हैं। और ऐसा करते हुए हम इस बात को घोषित करेंगे कि साग्रदा फमिलिया विश्वास का सबसे ऊंचा गिरजाघर है, दुनिया की गिनती में अलग दिखने के लिए नहीं, बल्कि उन तीर्थयात्रियों की मदद करने के लिए जो कतालोनिया की तीर्थयात्रा करते हैं, जिसे क्रूस उनका मार्ग प्रशस्त करे, वैसी ही जैसे एक दीप उदीप्त होता है और हम दूल्हे के लौटने का इंतज़ार करते हैं।

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10 जून 2026, 20:38