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देवदूत प्रार्थना का पाठ करते संत पापा लियो 14वें देवदूत प्रार्थना का पाठ करते संत पापा लियो 14वें  (ANSA)

देवदूत प्रार्थना में पोप : मुक्तिदाता इतिहास के घावों को बदल देते हैं

चालीसा काल के दूसरे सप्ताह के देवदूत प्रार्थना में संत पापा लियो 14वें ने रूपांतरण के रहस्य पर चिंतन किया, यह देखते हुए कि मुक्तिदाता ख्रीस्त ने इतिहास के घावों को बदल दिया और ईश्वर के मुक्ति के वरदान को दिखलाया।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार, 2 मार्च 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में चालीसा काल के दूसरे रविवार 1 मार्च को संत पापा लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित किया।

उन्होंने कहा, “आज की धर्मविधि का सुसमाचार पाठ हम सबके लिए एक उज्वल छवि प्रस्तुत करता है, जो प्रभु के रूपांतरण के बारे में बताता है।” (मती. 17:1-9) इसे दिखाने के लिए, सुसमाचार लेखक अपनी कलम को प्रेरितों की याद में डुबकी लगाते हैं, जिसमें ख्रीस्त को मूसा और एलियस के बीच दिखाया गया है। शब्द जिसने शरीर धारण किया संहिता और भविष्यवाणी के बीच खड़ा है: वह जीवित प्रज्ञा है, जो हर दिव्य शब्द को पूरा करता है। ईश्वर ने मानव को जो भी आज्ञा दी है और जिसके लिए उसे प्रेरित किया है, वह येसु में पूर्णता और साकार रूप पाता है।

यर्दन नदी में बपतिस्मा के दिन के समान, आज पर्वत पर हम पिता की आवाज सुनते हैं जो घोषित करते हैं : “यह मेरा प्रिय पुत्र है” जबकि पवित्र आत्मा येसु को एक "चमकीले बादल" से ढक लेता है (मती. 17:5)।

संत पापा ने कहा, “सुसमाचार इस अनोखी अभिव्यक्ति के साथ, ईश्वर के प्रकट होने के तरीके को व्यक्त करता है। जब वे खुद को प्रकट करते हैं, तो प्रभु हमारी नजरों के सामने अपनी महानता दिखाते हैं: येसु के सामने, जिनका चेहरा "सूरज की तरह" चमक रहा था और जिनके कपड़े "रोशनी की तरह सफेद" हो गये थे, शिष्य ईश्वर की मानवीय गरिमा की प्रशंसा करते हैं। पेत्रुस, याकूब और योहन एक विनम्र महिमा पर चिंतन करते हैं, जो भीड़ के लिए तमाशा नहीं, बल्कि एक गहरे भरोसे के तौर पर दिखाई जाती है।     

रूपांतरण का अर्थ समझाते हुए संत पापा ने कहा, “रूपांतरण पास्का की रोशनी का संकेत देता है: मौत और फिर से जी उठने की घटना का, अंधेरे और नई रोशनी की, जिसे ख्रीस्त उन सभी लोगों पर फैलाते हैं जो हिंसा से पीड़ित हैं, पीड़ा से क्रूसित हैं, या दुःख में त्याग दिए गए हैं। जबकि बुराई हमारे शरीर को एक वस्तु या एक गुमनाम चीज बना देती है, यही शरीर ईश्वर की महिमा से चमकता है। इस तरह मुक्तिदाता इतिहास के जख्मों को बदल देता, और हमारे मन और दिल को रोशन करता है: उनकी प्रकाशना मुक्ति का वरदान है!”

संत पापा ने विश्वासियों को चिंतन हेतु प्रेरित करते हुए कहा, “क्या यह हमें प्रेरित करता है? क्या हम ईश्वर का असली चेहरा हैरानी और प्यार भरी नजर से देखते हैं?”

नास्तिकता की निराशा का जवाब, पिता का अपने पुत्र, हमारे मुक्तिदाता को वरदान के रूप में प्रदान करना है; पवित्र आत्मा हमें जीवन और कृपा प्रदान कर नास्तिकता के अकेलेपन से मुक्त करते हैं; और हमारे कमजोर विश्वास के जवाब में, भविष्य में पुनरूत्थान की प्रतिज्ञा की घोषणा की जाती है। शिष्यों ने ख्रीस्त की महिमा में यही देखा, लेकिन उन्हें समझने में समय लगा (मती 17:9), मौन का समय ताकि वे वचन सुन सकें, मन परिवर्तन का समय ताकि प्रभु के साथ रहने की खुशी को महसूस कर सकें।

जब हम चालीसा काल के दौरान इसका अनुभव करते हैं, तो आइए हम प्रार्थना की शिक्षिका और भोर का तारा, माता मरियम से प्रार्थना करें कि वे विश्वास में हमारा मार्गदर्शन करें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना - चालीसा का दूसरा रविवार

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02 मार्च 2026, 13:32

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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