देवदूत प्रार्थना का संचालन करते पोप लियो 14वें देवदूत प्रार्थना का संचालन करते पोप लियो 14वें  (ANSA)

पोप : लाजरूस के समान, नये जीवन के लिए हम प्रभु को सुन सकें

चालीसा काल के पाँचवें रविवार के देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा लियो 14वें ने लाजरूस के जी उठने की घटना तथा यह हमें किस तरह अनन्त जीवन के लिए आमंत्रित करता एवं ईश्वर की कृपा से नवीनीकृत होकर प्रेम के रास्ते पर चलने, उनकी असीम उदारता को प्रतिबिम्बित करने पर चिंतन किया।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार, 23 मार्च 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में चालीसा के पाँचवें रविवार 22 मार्च को, संत पापा लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, “प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ दिन।

चालीसा काल के इस पाँचवें रविवार की धर्मविधि लाजरूस के जी उठने के सुसमाचार की घोषणा करता है।

 (यो. 11:1-45) चालीसा काल की यात्रा में, यह एक संकेत है जो मौत पर ख्रीस्त के विजय और अनन्त जीवन के वरदान के बारे बतलाता है, जो हमें बपतिस्मा में मिलता है।

आज येसु हमसे भी कहते हैं, जैसा कि उन्होंने लाजरूस की बहन मार्था से कहा था: “पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ। जो मुझ में विश्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा और जो मुझ में विश्वास करते हुए जीता है वह कभी नहीं मरेगा। क्या तुम इस बात पर विश्वास करती हो?” (यो.11:25-26)

पास्का की तैयारी

यह पाठ पुण्य सप्ताह के पहले आया है जिसको ध्यान में रखते हुए संत पापा ने कहा, “यह पूजन-पद्धति हमें, इस बात को ध्यान में रखने के लिए आमंत्रित करता है कि पवित्र सप्ताह निकट आ रहा है, जब हम प्रभु के दुःखभोग की घटना पर चिंतन करेंगे, उनके येरुसालेम में प्रवेश, अंतिम भोज, मुकदमा, सूली पर चढ़ाया जाना, दफनाया जाना,  ताकि हम उनका असली मतलब समझ सकें और उनमें मौजूद कृपा के लिए खुद को खोल सकें।”

ये सारी घटनाएँ जी उठे ख्रीस्त में पूरी होती हैं, जिन्होंने मौत को हरा दिया है और बपतिस्मा के द्वारा हमारे अंदर रहते हैं, ताकि हम मुक्ति और जीवन की परिपूर्णता पा सकें।

कृपा दुनिया को रोशन करती है

ईश्वर की कृपा इस दुनिया को रोशन करती है, जबकि हम अक्सर उन चीजों तलाश में खो जाते हैं, जो हमें कभी भी अनन्त खुशी नहीं दे सकती, जैसे कि नई चीजों की लगातार खोज जो समय, ऊर्जा, मूल्य, प्यार आदि के लिए हमारी संवेदनशीलता को खत्म कर देती है, मानो कि शोहरत, भौतिक चीजें, मनोरंजन और सतही रिश्ते महारे दिलों को भर सकते हैं या हमें अमर बना सकते हैं। यह उस अनंत चीज की चाहत का लक्षण है जो हममें से हरेक के अंदर होती है, एक ऐसी जरूरत जो नश्वर चीजों से पूरी नहीं हो सकती। कोई भी सीमित चीज हमारी अंदर की प्यास नहीं बुझा सकती, क्योंकि हम ईश्वर के लिए बने हैं, और जब तक हम उनमें आराम नहीं करते, हमें शांति नहीं मिल सकती।

पत्थरों को हटाना

अंत में, पोप ने यह देखने की हिम्मत दी कि लाजरूस के उठने की कहानी हमें भी प्रेरित करती है कि हम पवित्र आत्मा की मदद और शक्ति से, "अपने दिलों को उन आदतों, शर्तों और सोचने के तरीकों से मुक्त कर सकते हैं जो पत्थरों की तरह हमें स्वार्थ, चीजों की चाहत, हिंसा और दिखावे की कब्र में बंद कर देती हैं।"

 “यह हमें इस गहरी आवश्यकता को सुनने और पवित्र आत्मा की शक्ति से अपने दिलों को आदतों, शर्तों और सोचने के तरीकों से मुक्त करने के लिए आमंत्रित करती है, जो पत्थरों की तरह हमें स्वार्थ, भौतिकवाद, हिंसा और दिखावटीपन की कब्रों में बंद कर देते हैं।” उन्होंने कहा, “इन जगहों पर कोई जीवित नहीं रह सकता, बस उलझन, उदासी और अकेलापन है।”

हमें भी येसु पुकारते हैं: “बाहर निकलो!” (ये.11:43), वे हमें इन तंग जगहों से बाहर निकलने, उनकी कृपा से नए सिरे से जीने, प्यार की रोशनी में चलने, नये व्यक्ति की तरह, बिना गिनती और बिना माप के, उनकी असीम दया के आदर्श अनुसार आशा करने और प्यार करने में काबिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।

तब संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करते हुए कहा, “कुँवारी मरियम हमें इन पवित्र दिनों को अपने विश्वास, भरोसे और अपनी निष्ठा के साथ जीने में मदद करें, ताकि उनके जी उठे बेटे से मिलने का महिमामय अनुभव हममें हर दिन नया हो सके।”

इतना कहने के बात संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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23 मार्च 2026, 15:34

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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