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देवदूत प्रार्थना का संचालन करते पोप लियो 14वें देवदूत प्रार्थना का संचालन करते पोप लियो 14वें  (ANSA)

देवदूत प्रार्थना में पोप : क्रिसमस की खुशी हमारी यात्रा में बल प्रदान करे

पोप लियो 14वें ने क्रिसमस के दूसरे रविवार को देवदूत प्रार्थना में विश्वासियों को बालक येसु के करीब आने का प्रोत्साहन दिया और याद दिलाया कि ईश्वर की सच्ची पूजा के लिए मानवता पर ध्यान रखना जरूरी है।

वाटिकन न्यूज 

वाटिकन सिटी, रविवार, 4 जनवरी 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 4 जनवरी को पोप लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।

प्रभु के जन्म के बाद इस दूसरे रविवार को, मैं सबसे पहले आप सभी को अपनी शुभकामनाएँ दोहराना चाहता हूँ। संत पेत्रुस महागिरजाघर के पवित्र द्वार बंद होने के साथ, हम जुबली वर्ष का समापन करेंगे। क्रिसमस का रहस्य, जिसमें हम अभी भी डूबे हुए हैं, हमें याद दिलाता है कि हमारी आशा की नींव ईश्वर का शरीरधारण है। संत योहन की प्रस्तावना, जिसे आज धर्मविधि हमारे सामने रखती है, यह बात साफ तौर पर याद दिलाती है: “शब्द ने शरीरधारण किया और हमारे बीच रहा।” (यो.1:14)

ख्रीस्तीय आशा हमारे कार्यों में प्रकट होती है

संत पापा ने कहा, असल में, ख्रीस्तीय आशा उम्मीद भरे अंदाजों या इंसानी हिसाब-किताब पर आधारित नहीं है, बल्कि ईश्वर की हमारी यात्रा में साथ देने के फैसले पर आधारित है, ताकि जीवन में यात्रा करते समय हम कभी अकेले न हों। यह ईश्वर का कार्य है: येसु में, वे हम में से एक बन गए, हमारे साथ रहने का फैसला किया, और हमेशा, ईश्वर हमारे साथ की इच्छा की।

मानव शरीर की कमजोरी में येसु का आना हमारी उम्मीद को फिर से जगाता है। साथ ही, यह हमसे दो तरह के समर्पण की मांग करता है: एक ईश्वर के लिए और दूसरा हमारे पड़ोसियों के लिए।

हम ईश्वर के लिए समर्पित हैं, क्योंकि जब से उन्होंने शरीरधारण लिया है, हमारी मानवीय कमजोरी को अपना घर चुना है, हमें उनके बारे में अपनी सोच पर फिर से चिंतन करना है, जिसकी शुरुआत येसु के शरीर से होती है, न कि किसी निराकार धर्मसिद्धांत से।

आध्यात्मिकता की जाँच, विश्वास की अभिव्यक्ति

इसलिए, हमें अपनी आध्यात्मिकता और जिस तरह से हम अपना विश्वास दिखाते हैं, उसे लगातार जांचना चाहिए, ताकि यह सुदृढ़ हो सके कि वे सच में शरीरधारी हैं। दूसरे शब्दों में, हमें उस ईश्वर के बारे में सोचने, उसकी घोषणा करने और उनसे प्रार्थना करने के योग्य होना चाहिए जो हमें येसु में मिलता है। वे कोई दूर के देवता नहीं हैं बल्कि एक ऐसे ईश्वर हैं जो पास हैं और हमारी नाजुक धरती पर रहते हैं, हमारे भाई-बहनों के चेहरों पर, और रोजमर्रा के जीवन के हालात में खुद को दिखाते हैं।

ईश्वर की सच्ची उपासना के लिए मानवता का ध्यान रखना जरूरी

सभी पुरुषों और महिलाओं के लिए हमारी प्रतिबद्धता भी एक जैसा होना चाहिए। क्योंकि ईश्वर हम में से एक बन गए हैं, इसलिए हर इंसान उनकी परछाई है, उनकी छवि है और उनकी रोशनी की एक चिंगारी है। यह हमें हर इंसान की अटूट गरिमा को पहचानने और एक-दूसरे के लिए आपसी प्यार को प्रकट करने के लिए कहता है। इसके अलावा, शरीरधारण भाईचारे और मेलजोल को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस समर्पण की मांग करता है। इस समर्पण के जरिए, एकजुटता सभी मानवीय रिश्तों का पैमाना बन जाती है, जो हमें न्याय और शांति के लिए कोशिश करने, सबसे कमजोर लोगों की देखभाल करने और दुर्बलों की रक्षा करने के लिए कहती है। ईश्वर शरीरधारी बन गए हैं; इसलिए, मानवता की परवाह किए बिना ईश्वर की सच्ची पूजा नहीं हो सकती।

संत पापा ने माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, भाइयो एवं बहनो, ख्रीस्त जयन्ती की खुशी हमारी यात्रा को जारी रखने हेतु प्रोत्साहित करे। आइये, हम कुँवारी मरियम से प्रार्थना करें ताकि हम ईश्वर और पड़ोसियों की सेवा करने के लिए सदा तैयार रह सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

स्विट्जरलैंड में आग से पीड़ित लोगों के प्रति सामीप्य

देवदूत प्रार्थना के उपरांत, पोप लियो 14वें ने 1 जनवरी को स्विट्जरलैंड के क्रांस-मोंताना में लगी आग के कारण दुःखी लोगों के प्रति पुनः अपना सामीप्य व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, "मैं एक बार फिर स्विट्जरलैंड के क्रान्स-मोंताना में हुए हादसे से दुःखी लोगों के प्रति अपना सामीप्य व्यक्त करना चाहता हूँ। मैं आपको मरनेवाले युवाओं, घायलों और उनके परिवारों के लिए अपनी प्रार्थनाओं का भरोसा दिलाता हूँ।”

वेनेजुएला के प्रति चिंता

पोप लियो ने वेनेजुएला में इन दिनों के घटनाक्रम पर चिंता जताई, जब अमरीका की सेना ने शनिवार को काराकस में निकोलस मादुरो को गिरफ्तार की और जाँच के लिए न्यूयॉर्क ले गई।

पोप ने कहा, “मैं वेनेजुएला में बढ़ रही हालात पर गहरी चिंता से नजर रख रहा हूँ। वेनेजुएला के प्यारे लोगों के हित बाकी सभी बातों से ऊपर होनी चाहिए और हमें हिंसा को दूर करने और न्याय एवं शांति के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित होना चाहिए, देश की संप्रभुता की गारंटी देनी चाहिए, संविधान में दिए गए कानून के राज को पक्का करना, हर व्यक्ति के मानवाधिकारों और नागरिक अधिकारों का सम्मान करना, और मिलकर काम करके सहयोग, स्थिरता और मेलजोल का एक शांत भविष्य बनाना चाहिए, जिसमें मुश्किल आर्थिक हालात से जूझ रहे सबसे गरीब लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसलिए, वेनेजुएला के लोगों के लिए प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा,  “मैं प्रार्थना करता हूँ और आपको भी प्रार्थना करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ, और हमारी प्रार्थनाओं को कोरोमोटो की हमारी माता मरियम एवं संत जोस ग्रेगोरियो हर्नांडेज और सिस्टर कारमेन रेंडिलेस की प्रार्थनाओं के सिपूर्द करता हूँ।”

उन्होंने युद्ध पीड़ितों के लिए भी प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, “प्यारे भाइयो एवं बहनो, आइए हम शांति के ईश्वर पर भरोसा रखें: हम प्रार्थना करें और युद्ध से परेशान लोगों के साथ खड़े हों।”

और अंत सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन करते हुए उन्हें शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।

     

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05 जनवरी 2026, 14:55

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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