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गहरी संसाधन की खुदाई का समुद्र गहरी संसाधन की खुदाई का समुद्र  (AFP or licensors)

गहरे समुद्री खनन हेतु सतर्कता का आहृवान

एशिया पैसिफिक के विभिन्न भागों में बढ़ रहे गहरे समुद्री खनन के संबंध में, पैसिफिक प्रांत के धर्माध्यक्षों ने सतर्कता का आहृवान करते हुए इस बात पर जोर दिया है कि जब गंभीर या ऐसे नुकसान होने की वास्तविक संभावना हो जिसकी भरपाई न की जा सके, तो पूरी वैज्ञानिक जानकारी के बिना उसमें आगे बढ़ा नहीं चाहिए।”

वाटिकन सिटी

पैसिफ़िक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीएपीएसी) के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष  रायन पी. जेमीनेज ने 10 अगस्त को गहरी समुद्री खनन के संबंध में एक प्रेस विज्ञाप्ति में कहा, “हम गहरे समुद्री खनन से जुड़े फ़ैसलों की ज़िम्मेदारी लेने वाले सभी लोगों को सम्मान के साथ प्रोत्सहन देते हैं कि वे समझदारी, पार्दशिता, विनम्रता और जन हित का सच्चा ख्याल रखते हुए अपने कार्यों में आगे बढ़ें।”

उन्होंने कहा कि सदियों से, मानवता ने आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए हम धरती के संसाधनों को निकालते आ रहे हैं, इस संदर्भ में हमने इसके द्वारा सामान्य निवास को होने वाले लंबे समय के नतीजों पर पूरी तरह से विचारमंथन नहीं किया है। 

गहरी चिताएं

एशिया पैसिफिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि पैसिफिक प्रांत में व्यवासायिक गहरे समुद्री खनन तेज़ी से होने वाली जान पड़ती है। अतः उन्होंने इस बात की चेतावनी दी कि पैसिफिक समुद्री तल,  जिसमें अमेरिकन समोआ के आस-पास 33 मिलियन एकड़ और मारियाना ट्रेंच मरीन नेशनल मॉन्यूमेंट के इलाके शामिल हैं, जिन्हें व्यवासायिक लीज़ पर देने पर विचार किया जा रहा है।

पैसिफिक के धर्माध्यक्षों ने कहा कि सरकारों, वैज्ञानिकों, आदिवासी समुदायों, चर्चों और कई नेक विचार के लोगों ने इन घटनाओं से जुड़ी बातों को लेकर, विशेष कर अपने समुद्र के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ी जाने वाली विरासत के संबंध में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए वार्ता का एक दौर शुरू किया है।

इस घटनाओं के संबंध में उन्होंने याद दिलाया कि, प्रेरितों के रुप में,  उनकी ज़िम्मेदारी सुसमाचार का प्रचार करना और कलीसिया की सामाजिक शिक्षा में प्रकाश डालते हुए प्रकृति और जन सामान्य के जीवन में उत्पन्न होने वाले खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।  

इन बातों को ध्यान में रखते हुए, पैसिफिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सदस्यों ने दोहराया कि दुनिया के संसाधन न केवल वर्तमान पीढ़ी, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी सौंपे गये हैं।

वैज्ञानिक अनिश्चिता में समझदारी की आवश्यकता

उन्होंने कहा,  “ऐतिहासिक घटनाएं हमें सिखाती हैं कि जब विज्ञान उन कामों के नतीजों के बारे में अनिश्चित रहता है जिनसे गंभीर या ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती, तो समझदारी हमें विनम्रता, विवेक और प्रार्थना में आगे बढ़ने का आहृवान करती है।”

धर्माध्यक्ष ने अपने विचारों को रखते हुए कहा कि पैसिफिक लोगों के लिए, यह विश्वास उनके जीने के तरीके में गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इस बात कि दृढ़ता जताई कि उनकी पीढ़ी को “उसने सृष्टि से क्या निकाला” उसके लिए नहीं,  बल्कि उसके लिए याद किया जायेगा कि “उसकी रक्षा कैसे” की गई।

उन्होंने कहा कि गहरे समुद्र पृथ्वी पर सबसे कम समझे जाने वाले पारिस्थितिकी में से एक है,वैज्ञानिकों का “यह माना है कि इसकी बायोडायवर्सिटी, पारिस्थितिकी के संग इसका संबंध और लंबे समय तक बने रहने वाली लोचकता के बारे में बहुत कुछ अभी भी अज्ञात है।”

इसी कारण, उन्होंने चेतावनी दी कि आज लिए गए फैसलों के ऐसे नतीजे हो सकते हैं जिन्हें आसानी से बदला नहीं जा सकता। धर्माध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा, “जब गंभीर या ऐसा नुकसान होने की असली संभावना हो जिसे ठीक न किया जा सके, तो पूरे वैज्ञानिक खोज में निश्चितता की कमी हमारे लिए बहाना का कारण न बनें।”

तकनीकी विकास के खिलाफ नहीं

उन्होंने कहा,“समाझारी हमारे लिए विकासमय जीवन में रूकावट नहीं है, बल्कि यह वह गुण है जो सच्ची तरक्की को मानवता और दुनिया दोनों की सेवा के योग्य बनाता है।”

धर्माध्यक्षों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि "कलीसिया वैज्ञानिक शोध या ज़िम्मेदारी पूर्ण आर्थिक विकास का विरोध नहीं करती, बल्कि हमें यह सुनिश्चित करने को कहती है कि तकनीकी विकास सदैव मानवीय सम्मान का ध्यान रखें, दुनियावी एकता की रक्षा और सबकी भलाई करे।” धर्माध्यक्ष रेयान के कहा कि दुनिया की देखभाल को न्याय, शांति, संस्कृति और मानवीय सम्मान से अलग नहीं किया जा सकता।

अंत में, पैसिफिक के धर्माध्यक्षों ने प्रार्थना की कि “ख्रीस्त, जिनके ज़रिए सब कुछ बनाया गया और जिनमें सब कुछ एक साथ है, हमारे नेताओं को विवेक प्रदान करें,  हमारे समुदायों को हिम्मत और ऐसा हृदय प्रदान करे जो धरती और गरीबों, जिससे वे दोनों की पुकार पर ध्यान दे सकें।”

उन्होंने कहा, "पवित्र आत्मा हमें सच्चाई, न्याय और प्रेम पर आधारित फैसले लेने को दिशा-निर्देशित करे, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसा समुद्र विरासत में मिले जिसके द्वारा ईश्वरीय महिमा घोषित होती है जो पैसिफिक के लोगों को सहारा बना रहता हो।”

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13 अगस्त 2026, 15:49