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कोलकाता में मतदान हेतु कतार में खड़ी धर्मबहनें, 29.04. 2026  कोलकाता में मतदान हेतु कतार में खड़ी धर्मबहनें, 29.04. 2026   (AFP or licensors)

कानूनी लड़ाई के बाद धर्मबहनों को मिला मतदान अधिकार

कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी धर्मसंघ की लगभग 55 धर्मबहनें एक कानूनी लड़ाई के बाद पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान अपना मतदान कर सकीं ...

वाटिकन सिटी

पश्चिम बंगाल, शुक्रवार, 1 मई 2026 (ऊका न्यूज़): कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी धर्मसंघ की लगभग 55 धर्मबहनें एक कानूनी लड़ाई के बाद पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान अपना मतदान कर सकीं इसलिये कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया दिया गया था जिसे उन्होंने चुनौती दी थी।

कोलकाता में मदर तेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की धर्मबहनें 29 अप्रैल को भारतीय चुनाव आयोग द्वारा उनके नाम बहाल कर दिए जाने के बाद मतदान कर सकीं। धर्मबहनों के नाम 28 अप्रैल को प्रकाशित सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट में शामिल किए गए।

अदालती चुनौती  

अधिकांश धर्मबहनों का जन्म राज्य के बाहर हुआ था। 28 फरवरी को जारी वोटर लिस्ट में उन्होंने देखा कि उनके नाम उसमें शामिल नहीं थे। धर्मबहनों ने भारतीय चुनाव आयोग  के विवादित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत अपने नाम हटाए जाने को चुनौती देने के लिए न्यायिक अदालत का दरवाज़ा खटखटाया।

(एसआईआर) में अकेले पश्चिम बंगाल में लगभग सात करोड़ छः लाख पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 91 लाख नाम हटा दिये गये थे। कुछ के नाम वापस आ गए लेकिन ज़्यादातर नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे।

“राजनैतिक साज़िश”

कमीशन ने (एसआईआर) को वोटर लिस्ट से डुप्लीकेट, मरे हुए या अयोग्य वोटरों को हटाने की एक तार्किक कोशिश बताया। हालांकि, पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की नेता  ममता बनर्जी समेत बड़ी राजनैतिक पार्टियों ने इसे “वोटर्स पर्ज” यानि मतदाताओं की सफाई तथा  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू समर्थक भारतीय जनता पार्टी को जिताने के लिए “राजनैतिक साज़िश” निरूपित किया।

अल्पसंख्यकों का संघर्ष

कोलकाता महाधर्मप्रान्त के संचार विभाग के निर्देशक फैरेल शाह के अनुसार, हफ़्तों की उलझन के बाद धर्मबहनों को वोटर लिस्ट में अपनी जगह वापस पाने की अनुमति मिली। फैरेल ने 29 अप्रैल को ऊका न्यूज़ से कहा कि यह न सिर्फ़ मदर तेरेसा की धर्मबहनों के लिये बल्कि राज्य भर के कई ईसाइयों के लिए भी बड़ी राहत की बात है, जो वोटर लिस्ट में अपना नाम वापस लाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।”

एक मानवाधिकार कार्यकर्त्ता ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वोटर्स लिस्ट में परिवर्तन इस तरह से किया गया कि कई लोगों को, खासकर अल्पसंख्यक समूहों को, वोट देने से रोका जा सके।

पश्चिम बंगाल में 294 सीटों वाले राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आने की उम्मीद है।

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01 मई 2026, 11:38