हजारीबाग धर्मप्रांत में ‘आशा के तीर्थयात्री’ जुबली 2025 का ऐतिहासिक समापन समारोह
सिस्टर नीलम खेस्स एच.सी.
हजारीबाग, गुरुवार 8 जनवरी 2026 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फाँसिस द्वारा घोषित ‘आशा के तीर्थयात्री’ जुबली वर्ष 2025 का समापन हजारीबाग धर्मप्रांत में ‘प्रभु रुपांतरण महागिरजाघऱ’ में ख्रीस्तयाग समारोह के साथ संपन्न हुआ। समापन समारोह में भाग लेने हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, रामगढ़ और बोकारो इन पांच जिलों की 25 पल्लियों से हजारों विश्वासी, पुरोहितगण, धर्मबहनें और धर्मबंधुगण बड़ी आशा एवं उत्साह के साथ एकत्रित हुए। महागिरजाघर के परिसर में एक विशाल एवं प्रतीकात्मक जुलुस के साथ समापन समारोह शुरु किया गया। जुलुस में विश्वासीगण पाँच विभिन्न रंगों के झंडे लिए हुए थे, जो धर्मप्रांत के विभिन्न क्षेत्रों एवं जुबली के थीम को प्रतिपादित करते थे।
कजरकिलो पल्लीवासियों ने आनंद एवं उत्साह के साथ प्रवेश नृत्य करते हुए जुबली क्रूस एवं मुख्य याजक धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो एवं तीस सह-याजकों का स्वागत किया। इसके बाद सभी झंडों और जुबली क्रूस को बलिवेदी के पास श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया। धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो और पुरोहितों का प्रतिनिधित्व करते हुए फादर अंतोनी के.जे., धर्मबहनों की ओर से सिस्टर जेसी जोस एच.सी., काथलिक सभा की ओर से पीटर तिड़ू, महिला संघ की ओर से एस्थेर डहंगा, युवा संघ की ओर से आदित्य टूटी, क्रूसवीर की ओर से पुनीता तिर्की एवं सिस्टर नीलम खेस्स एच.सी. जुबली क्रूस को श्रद्धांजली दी। उद्घोषक फादर अनुप लकड़ा ने पूरे समारोह को अत्यंत कुशल एवं प्रवाहपूर्ण संचालन किया।
पवित्र मिस्सा समारोह के दौरान धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो ने अपने गहन एवं हृदयस्पर्शी प्रवचन में जुबली संदेश की गहनता पर प्रकाश डाला। उनहोंने कहा कि ‘आशा के तीर्थयात्री’ की यह पवित्र यात्रा एक समारोह मात्र का समापन नहीं है, अपितु जीवनपर्यंत धारण करने योग्य सतत् आह्वान है। विश्वासियों के परस्पर आदर सम्मान, समावेशी दृष्टिकोण, असहाय एवं जरुरकतमंदों की निःस्वार्थ सेवा तथा प्रेमपूर्ण जीवनयापन की कटिबद्धता का संदेश दिया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह जुबली हमें आशा के प्रकाश के समाज के प्रत्येक कोने तक पहुँचाने का दायित्व प्रदान करती है।
पवित्र क्रूस की धर्मबहनों ने अत्यंत मार्मिक एवं भक्तिमय गीतों से मिस्सा समारोह को आध्यात्मिक उल्लास से भक्तिमय कर दिया। एफ.सी.सी. धर्मबहनों ने जुबली समापन के अनुरुप ही महागिरजाघर का सजाया था, जो आशा एवं नवीनीकरण की भावना को प्रत्यक्ष रुप से प्रतिबिंबित कर रहा था।
पवित्र मिस्सा समारोह के बाद जुबली का केक काटा गया। सिस्टर नीलम खेस्स ने राष्ट्रीय एवं धर्मप्रांतीय स्तर पर आयोजित लोगोस बाइबिल क्वीज प्रतियोगिताओं के विजेताओं का नाम घोषित किया और धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो ने उन्हें पुरस्कार प्रदान किया, जिससे युवा पीढ़ी में बाइबिल ज्ञान एवं आध्यात्मिक जागरुकता को प्रोत्साहन मिला। फिर पल्ली परिसर में धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो, सभी पुरोहितों, धर्मबहनों और विश्वासियों ने मैत्री भोज (फेलोशिप मील) में भाग लिया, जो ख्रीस्तीय भाईचारे एवं एकात्मकता के सुन्दर प्रतीक के रुप में उभरा।
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