वाटिकन उद्यान में पेड़ लगाना सृष्टि के प्रति जिम्मेदारी का चिन्ह
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, शनिवार, 7 मार्च 2026 (रेई) : 6 मार्च को, जिन्कगो बिलोबा का पेड़—जो सुदूर पूर्व के सबसे पुराने औषधि वृक्षों में से एक है—वाटिकन उद्यान के एक कोने में रोपा गया। पेड़ को कृषिविदों और वनपालों के राष्ट्रीय ऑर्डर (CONAF) ने पोप लियो 14वें को दान किया, जिसे लूर्द ग्रोटो से कुछ ही मीटर दूर विया देला रेडियो पर लगाया था।
पोप ने 5 नवंबर को संगठन से मुलाकात की थी। उस मुलाकात में, उन्होंने खेती को देखने के नजरिए को पुष्ट करते हुए कहा था, "यह हमारी धरती माता और आनेवाली पीढ़ी के लिए एक ठोस उपहार है: धरती कोई चीज नहीं बल्कि एक उपहार है! यह हमसे पहले से है और हमसे ले ली जाएगी। यह एक माँ है जो पोषण करती है, न कि कोई ऐसा संसाधन जिसका इस्तेमाल किया जाए। जो लोग इसमें सम्मान और समझदारी से खेती करते हैं, वे ईश्वर के रचनात्मक कार्य में हिस्सा लेते हैं और मनुष्यों के बीच शांति में योगदान देते हैं।"
आर्थिक फायदे की छोटी सोच जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाती है
वाटिकन सिटी के गवर्नरेट के सेक्रेटरी जनरल, महाधर्माध्यक्ष एमिलियो नाप्पा ने वृक्षारोपन समारोह में कहा कि “जब कभी कोई पेड़ लगाया जाता है, खासकर, यहाँ वाटिकन में, तो यह एक संबंध की निशानी है। इस बार, यह देश के कृषिविदों और पोप, वाटिकन और कलीसिया के बीच है।”
उन्होंने कहा, "बगीचे में उगनेवाले पेड़, प्रकृति और उसके साथ एवं एक-दूसरे के साथ तालमेल से रहनेवाले साथी मनुष्यों के लिए सम्मान, और दुनिया के प्रति जिम्मेदारी की भावना - ये सभी इटली और दुनियाभर में हो रहे पर्यावरण सुरक्षा के उल्लंघनों के बिल्कुल विपरीत हैं।"
नेपल्सवासी महाधर्माध्यक्ष नाप्पा ने बताया कि प्रकृति से उनका गहरा संबंध है, खासकर, इसलिए क्योंकि वे “ऐसी भूमि से आते हैं जो वित्तीय और आर्थिक फायदे के लिए स्वार्थ और छोटी सोच रखनेवाले लोगों की वजह से तबाह हो गई है, जो जमीन का शोषण करते और प्रदूषण फैलाते हैं।”
गवर्नरेट के सेक्रेटरी जेनरल ने आनेवाली पीढ़ियों के बारे में सोचने की अहमियत पर जोर दिया। “जो लोग उनके बाद आएंगे, उनके लिए ये लोग – वैसा जीवन नहीं छोड़ेंगे जैसा पेड़ दिखाते हैं और जिसके वे हिस्से हैं, बल्कि मौत और प्रदूषण छोड़ जाएंगे, जैसा कि कम्पानिया में ‘आग की भूमि’ है, और, जैसा कि अब कई अध्ययन उत्तरी इटली में भी दिखाते हैं।” उन्होंने कसेर्ता और नेपल्स प्रांतों के बीच कम्पानिया के इलाके का जिक्र किया, जहाँ पोप लियो 14वें 23 मई को जायेंगे।
मनुष्यों को समाधान बनना चाहिए समस्या नहीं
कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए, FAO, IFAD, और WFP के लिए वाटिकन के स्थायी पर्यावेक्षक, महाधर्माध्यक्ष फेर्नांदो चिका अरेलानो ने कहा, “आपने पोप लियो 14वें को यह कीमती उपहार देकर सम्मानित करने का फैसला किया है। पेड़ लगाने का मतलब है जंगलों की कटाई और रेगिस्तान बनने से लड़ना।”
उन्होंने आगे कहा, “जब कई लोग धरती को बर्बाद कर रहे हैं, यहाँ जीवन बढ़ रही है। पेड़ साफ हवा का फेफड़ा है जो हममें से हर एक को हमेशा समाधान की तरह रहने के लिए बुलाता है, समस्या की तरह नहीं, हमेशा अच्छाई की तरफ और कभी बुराई की तरफ नहीं। महाधर्माध्यक्ष अरेलानो ने अंत में कहा, “पेड़ लगाना, जो भले ही अभी छोटा और अनाच्छादित हो,” सबसे बढ़कर एक ऐसी पहल है जो धैर्य के सदगुण को महत्व देती है।”
सृष्टि के प्रति प्रतिबद्धता को पोप लियो का समर्थन
कृषिविदों और वनपालों के राष्ट्रीय ऑर्डर के अध्यक्ष माउरो यूनिफॉर्मी ने याद करते हुए कहा, “पिछले साल, वाटिकन में बैठक पोप के शब्दों को सुरक्षा, शिक्षा और स्थिरता के ठोस कामों में बदलने की हमारी प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई, यह जानते हुए कि धरती की देखभाल करने का मतलब मानवता की देखभाल करना है।”
उन्होंने बताया कि इसी से रोम घोषणापत्र बना। यह कृषिविदों और वनपालों की 19वीं राष्ट्रीय सम्मेलन के अधिनियम में बताया गया एक निर्देशक डॉक्यूमेंट है, जिसका शीर्षक ‘भविष्य में जूड़ें’ है। कृषिविदों और वनपालों के राष्ट्रीय ऑर्डर के अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि “यह कार्यक्रम कृषिविदों और वनपालों के पेशे के लिए भविष्य की दिशा दिखाता है, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ को, सृष्टि और आनेवाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को जागरूक नैतिक नजरिए के साथ जोड़ना होगा।”
यूनिफोर्मी ने आगे कहा, “यह घोषणापत्र आनेवाले सालों में कृषिविदों और वनपालों के पेशे के लिए रास्ता तय करता है, जो प्राकृतिक पूंजी, उत्पादक प्रणाली और क्षेत्रों की देखभाल करने की जिम्मेदारी को परिचालन प्रतिबद्धताओं में बदलता है।”
जिन्कगो बिलोबा का पेड़ अपने रूप से पहले से ही इस प्रोग्राम को दिखाता है: जमीन में मजबूती से जड़ जमाए हुए, और इसके तने एवं पत्ते खूबसूरती से ऊपर की ओर फैले हुए हैं। यह पौधा एक आध्यात्मिक कृति है, जो दो वजहों से सृष्टि को दिखाने के लिए एकदम सही है।
कृषिविदों और वनपालों के राष्ट्रीय ऑर्डर के अध्यक्ष ने कहा, "संतुलन, याद, मजबूती और बदलाव का प्रतीक, जिन्कगो बिलोबा एक ऐसी आत्मा की तस्वीर है जो बिना टूटे सदियों को पार करती है, जो अलग-अलग हिस्सों को जोड़ती है, और जो तबाही के बाद भी, फिर से खिलने की ताकत पाती है।"
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