खोज

वाटिकन में आध्यात्मिक साधना के दौरान फादर पासोलीनी का चिन्तन वाटिकन में आध्यात्मिक साधना के दौरान फादर पासोलीनी का चिन्तन   (ANSA)

सन्त फ्राँसिस के भ्रातृत्व प्रेम पर चिन्तन, पासोलीनी

परमधर्मपीठीय रोमी कार्यलयों के धर्माधिकारियों के समक्ष चालीसाकालीन चिन्तन जारी करते हुए फादर पासोलीनी ने सन्त फ्राँसिस द्वारा स्थापित समाज में भ्रातृत्व प्रेम पर चर्चा करते हुए कहा कि भाईचारा ईश प्रदत्त अप्रतिक्षित और निशुल्क वरदान है।

वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 13 मार्च 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन में परमधर्मपीठीय रोमी कार्यलयों के धर्माधिकारियों के समक्ष चालीसाकालीन चिन्तन जारी करते हुए शुक्रवार को उपदेशक फादर पियर पासोलीनी ने असीसी के सन्त फ्राँसिस द्वारा स्थापित समाज में भ्रातृत्व प्रेम पर चर्चा करते हुए कहा कि भाईचारा ईश प्रदत्त अप्रतिक्षित और निशुल्क वरदान है।  

ख्रीस्त की शिक्षा

उन्होंने कहाः अपनी स्थापना के आरम्भ ही से फ्रांसिस्कन धर्मसमाज का रूप येसु ख्रीस्त की शिक्षा के प्रति वफ़ादार रहने की कोशिश करता था। जैसा कि सन्त मत्ती रचित सुसमाचार में हम पाते हैं: "तुम्हारा एक ही मालिक है, और तुम सब भाई हो, तुम धरती पर किसी को अपना पिता मत कहो क्योंकि तुम्हारा एक ही पिता है, जो स्वर्ग में है।"

उपदेशक फादर पासोलीनी ने कहा, भाईचारा आध्यात्मिक जीवन का केवल एक हिस्सा नहीं है, न ही यह सिर्फ़ एक अच्छा माहौल है जिसमें कृपा में ज़्यादा आसानी से बढ़ा जा सके। यह वह जगह है जहाँ यथार्थ मनपरिवर्तन होता है: सबसे गंभीर परीक्षा और साथ ही, यह इस बात का सबसे स्पष्ट संकेत है कि सुसमाचार हमारे जीवन में क्या ला सकता है।

पाँच चरण

फादर पासोलीनी ने कहा कि असीसी के सन्त फ्राँसिस का जीवन पाँच चरणों में विभाजित हैः सबसे पहले ईश वरदान रूप में फ्राँसिसी धर्मसमाजियों के बीच भाईचारा, फिर काईन और आबिल की तरह भाईचारे का ख़त्म होना, इसके बाद ऐसे प्रेम की आवश्यकता जो शिष्टता से बढ़कर हो। तदोपरान्त,  ख्रीस्तशास्त्रीय बुनियाद, जिसके बिना कोई भी भाईचारा वाला रिश्ता सच में टिका नहीं सकता और अन्ततः, युगान्त विषयक क्षितिज, जिसमें जिया गया भ्रातृत्व ख़ुद अनन्त जीवन के दर्शन करा देता है।

फादर पासोलीनी ने कहा कि सन्त फ्रांसिस ने आरम्भ में किसी धर्मसमाज की स्थापना का मनोरथ नहीं रखा था किन्तु भाई बर्नार्ड और भाई पियेत्रो के आने के बाद उन्होंने गिरजाघर में प्रवेश कर धर्मग्रन्थ के पन्ने खोले और अपना रास्ता ढूँढ़ा, जो सुसमाचार के अनुसार जीवन यापन हेतु निमंत्रण दे रहा था। कलीसिया के साथ सहभागिता में रहते हुए अपने हाथों से काम करना, लोगों के साथ रहकर मनपरिवर्तन की घोषणा करना और प्रार्थना, मनन-चिन्तन एवं आध्यात्मिक साधना में ध्यान लगाना।

शक्ति और वरिष्ठता का कोई स्थान नहीं

उन्होंने कहा कि इस तरह धर्मसमाज का जन्म हुआ, जिसमें इसमें अमीर, ग़रीब, पुरोहित और आम लोग सभी शामिल हो सकते थे। फ्रांसिस चाहते थे कि भाइयों के बीच शक्ति या वरिष्ठता  का कोई रिश्ता न हो, जैसा उस समय के समाज में होता था। सभी का एक ही नाम होना था: "फ्रायर्स माइनर" यानि छोटे भाई। अस्तु, फादर पासोलीनी ने कहा कि सन्त फ्रांसिस की लिखी बातें पढ़कर, कोई भी तुरंत एक जीवंत, गहन और मानवीय भावनाओं से परिपूर्ण उनकी इच्छा को महसूस कर सकता है।         

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

13 मार्च 2026, 10:55