खोज

जिनिवा में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षकीय मिशन के सदस्य (28.02.2026) जिनिवा में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षकीय मिशन के सदस्य (28.02.2026) 

ख्रीस्तानुयायी विश्व में सर्वाधिक प्रताड़ित समुदाय

वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष एत्तोरे बालेस्त्रेरो ने सम्पूर्ण विश्व में ईसाइयों पर हो रहे हमलों पर ध्यान आकर्षित कराया तथा इस तथ्य को रेखांकित किया कि राष्ट्रों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी सुनिश्चित करनी चाहिये।

वाटिकन सिटी

जिनिवा, शुक्रवार, 6 मार्च 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): जिनिवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवोक्षक तथा वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष एत्तोरे बालेस्त्रेरो ने सम्पूर्ण विश्व में ईसाइयों पर हो रहे हमलों पर ध्यान आकर्षित कराया तथा इस तथ्य को रेखांकित किया कि राष्ट्रों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी सुनिश्चित करनी चाहिये।

देशों की ज़िम्मेदारी

3 मार्च को “प्रताड़ित ख्रीस्तीयों के साथ खड़े होना: आस्था और ख्रीस्तीय मूल्यों की रक्षा करना” शीर्षक से आयोजित कार्यक्रम में, महाधर्माध्यक्ष बालेस्त्रेरो ने कहा कि देशों की ज़िम्मेदारी है कि वे धर्म पालन की स्वतंत्रता की रक्षा करें, उसका सम्मान करें और उसकी गारंटी दें।

उन्होंने कहा, “तमाम विश्व में लगभग 40 करोड़ ख्रीस्तानुयायी उत्पीड़न, यातनाओं और हिंसा का सामना करते हैं, जिससे वे विश्व में सबसे अधिक प्रताड़ना झेलने वाले धार्मिक समुदाय बन जाते हैं। इसका मतलब है कि सात में से एक ईसाई इससे प्रभावित है।”

उन्होंने कहा, "इससे भी बुरी बात यह है कि 2025 में लगभग 5,000 ख्रीस्तानुयायी अपने विश्वास के लिए मारे गए, जो हर दिन औसतन 13 के बराबर है।"

महाधर्माध्यक्ष ने समझाया कि ईसाइयों के लिए, जो लोग अपने विश्वास के लिए मारे जाते हैं, वे “शहीद” हैं, इसलिए “अपने धर्म के ‘साक्षी’ हैं और ऐसे मूल्यों को अपनाते हैं जो सत्ता के तर्क को चुनौती देते हैं, जबकि अंतर्राष्ट्रीय कानून के नज़रिए से वे मानवाधिकार उल्लंघन के शिकार हैं।”

ख्रीस्तीय साक्ष्य

वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक ने इस बात पर ज़ोर दिया, कि ख्रीस्तीयों के साक्ष्य के कारण देशों को बुनियादी ज़िम्मेदारी से ध्यान नहीं हटाना चाहिए क्योंकि, उन्होंने कहा, धर्म पालन की आज़ादी एक बुनियादी मानवाधिकार है।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा, “धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता की रक्षा करना देश का दायित्व है, जिसमें तीसरे पक्ष को इस अधिकार का उल्लंघन करने से रोकना भी शामिल है।” उन्होंने कहा, “इस सुरक्षा का मकसद उन मानने वालों की सुरक्षा करना है जिन्हें हमले से पहले, उसके दौरान और बाद में निशाना बनाया जाता है।

सज़ा से बचाव गम्भीर

इस बात पर उन्होंने दुख व्यक्त किया कि “दुनिया भर में धार्मिक उत्पीड़न के मामले में सज़ा से बचना सबसे गंभीर मुद्दों में से एक है।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया, “एक देश को सबसे पहले और सबसे बढ़कर धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करना चाहिये क्योंकि यह एक मूलभूत और बुनियादी मानवाधिकार है।”

येसु का क्रूस

येसु के क्रूस की पवित्रता की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि जो लोग ख्रीस्तानुयायियों पर हमले करते हैं वे क्रूस की तौहीन करते हैं, क्योंकि क्रूस एक ऊर्ध्वाधर रेखा से बना है जो "उत्कृष्टता के लिए मानव खुलेपन और उदारता का प्रतिनिधित्व करता है" और एक क्षैतिज रेखा जो "दूसरों के साथ मानव बंधन" का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि विश्वास को मौन या सीमित करने के प्रयास “उस स्थान को बंद कर देते हैं जिसमें मानव आत्मा स्वयं से परे जाती है।” और इस प्रकार “सत्य को स्वतंत्र रूप से प्रचारित करने की मानवीय क्षमता पर प्रहार करते हैं।”

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

06 मार्च 2026, 11:30