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रोम के कोलोसेऊम में क्रूस रास्ता, 2025 (प्रतीकात्मक तस्वीर) रोम के कोलोसेऊम में क्रूस रास्ता, 2025 (प्रतीकात्मक तस्वीर)   (ANSA)

कार्डिनल गुजेरोत्ती ने समझाया पुण्य शुक्रवार के दान का अर्थ

प्रतिवर्ष की तरह, पुण्य शुक्रवार को इस वर्ष भी पवित्र भूमि के गिरजाघरों और ख्रीस्तीय समुदायों के समर्थन हेतु सार्वभौमिक कलीसिया की एकजुटता स्वरूप अनुदान एकत्र किया जाएगा।

वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 20 मार्च 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): प्रतिवर्ष की तरह, पुण्य शुक्रवार को इस वर्ष भी पवित्र भूमि के गिरजाघरों और ख्रीस्तीय समुदायों के समर्थन हेतु सार्वभौमिक कलीसिया की एकजुटता स्वरूप अनुदान एकत्र किया जाएगा।

युद्ध और पुण्य शुक्रवार

पूर्वी रीति की कलीसियाओं के लिये गठित वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय विभाग के अध्यक्ष कार्डिनल क्लाऊदियो गुजेरेत्ती ने समझाया कि वर्तमान में जारी युद्ध के सन्दर्भ में पुण्य शुक्रवार को जमा किये जानेवाले चन्दे का क्या अर्थ है। उन्होंने कहाः “जिन लोगों ने उन देशों में सब कुछ खो दिया है, उनके लिए यह उत्तरजीविता का सवाल है और ख्रीस्तानुयायी होने के नाते आशा को पुनर्जीवित करना हमारा दायित्व है।”

कार्डिनल गुजेरेत्ती ने इसे एक सार्वभौमिक कलीसिया की ओर से पवित्र भूमि के लोगों के प्रति एकात्मता की महत्वपूर्ण पहल निरूपित किया। उन्होंने हथियारों के लगातार गर्जन की निंदा की और सभी से चिन्तन का आग्रह किया ताकि वे उन लोगों के साथ शामिल न हों जो दुनिया में आग लगा रहे हैं।

सभ्यता पर मुसीबत

वाटिकन न्यूज़ से कार्डिनल ने कहा, “मुझे लगता है कि दुनिया के ज़्यादातर लोगों को इस बात का एहसास नहीं है कि हमारी सभ्यता पर कितनी बड़ी मुसीबत आ रही है। जो लोग आज युद्ध को बढ़ावा दे रहे हैं वे दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी हर चीज़ को खत्म कर रहे हैं। मैं सिर्फ़ आदर्शों की बात नहीं कर रहा बल्कि लोगों और चीज़ों की भी बात कर रहा हूँ—यहाँ तक कि बहुत कीमती ऐतिहासिक इमारतों की भी।”

पुण्य शुक्रवार को पवित्र भूमि के लोगों के लिये उदारतापूर्वक चन्दा देने का अनुरोध करते हुए कार्डिनल ने कहा, यह हमारे उन भाई-बहनों के प्रति ज़िम्मेदारी की बात है जो तमाम विश्व में फैली निरर्थक हिंसा की वजह से मर रहे हैं और जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है और न ही अपना ख्याल रखने के लिए कुछ है। हमें उनके दुख में भागीदार होना पड़ेगा क्योंकि वे “हमसे अलग” नहीं हैं—वे हमारा ही शरीर हैं।

 

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20 मार्च 2026, 11:03