प्रभु प्रकाश महापर्व, देवदूत प्रार्थना में पोप का संदेश
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, मंगलवार, 6 जनवरी 26 (रेई) : संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, प्यारे भाइयो एंव बहनो, इस पवित्र काल में हमने कई त्योहार मनाया। आज का प्रभु प्रकाश महापर्व, जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, हमें दिखाता है कि मुश्किल समय में भी खुशी संभव है। “एपिफेनी” या प्रभु प्रकाश शब्द का मतलब है “प्रकट होना,” और हमारी खुशी एक ऐसे रहस्य से आती है जो अब छिपा नहीं है। ईश्वर का जीवन कई बार और अलग-अलग तरीकों से प्रकट हुआ, लेकिन येसु में यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया, ताकि हम जान सकें कि मुश्किलों के बीच भी उम्मीद कैसे रखा जाय। “ईश्वर बचाते हैं” का कोई दूसरा अर्थ नहीं है, [येसु के अलावा] कोई दूसरा नाम नहीं है। सिर्फ वही चीज ईश्वर से आ सकती है जो हमें स्वतंत्र करती और बचाती है और यह ईश्वर की प्रकाशना है।
येसु के सामने दण्डवत करने का अर्थ
बेतलेहेम के बालक येसु के सामने दण्डवत करने का अर्थ है, यह मानना कि हमने वह सच्ची मानवता पा ली है जिसमें ईश्वर की महिमा प्रकट होती है। येसु में, सच्चा जीवन प्रकट होता है, एक जीवित मानव, जो अपने लिए नहीं बल्कि सबके लिए है और सहभागिता में है, जो हमें यह कहना सिखाता है, “जैसा स्वर्ग में है, वैसा ही पृथ्वी पर भी हो” (मती. 6:10)। सचमुच, ईश्वरीय जीवन हमारी पहुँच में है; यह इसलिए प्रकट होता है ताकि हम इसकी स्वतंत्रता में शामिल हो सकें, जो डर के बंधन को ढीला करती है और हमें शांति को स्वीकार करने के योग्य बनाती है। यह एक संभावना और एक निमंत्रण है, क्योंकि सहभागिता को रोका नहीं जा सकता। हम इससे ज्यादा और क्या चाह सकते हैं?
ज्योतिषियों का जोखिम उठाना और उपहार भेंट करना
सुसमाचार में, और चरनी में, ज्योतिषियों ने बालक येसु को कीमती उपहार: सोना, लोबान और गंधरस भेंट किये (मती 2:11)। हो सकता है कि ये चीजें एक बच्चे के काम की वस्तु न लगें, लेकिन ये हमें जुबली साल के अंत पर चिंतन करने के लिए बहुत कुछ देती हैं। सबसे बड़ा उपहार है सब कुछ दे देना। आइए, हम उस गरीब विधवा को याद करें, जिसने मंदिर के खजाने में अपने पास बचे दो पैसे दान कर दिया था। (लूक 21:1-4) हम पूरब से आए ज्योतिषियों की चीजों के बारे में कुछ नहीं जानते, लेकिन उनका जाना, उनका जोखिम उठाना और उनका उपहार भेंट करना बताता है कि उन्होंने सब कुछ अर्पित कर दिया।
हमारा कीमती खजाना
ज्योतिषी हमें प्रेरित करते हैं कि हम और हमारे पास जो है, हमारा अनमोल खजाना, उसे येसु को चढ़ा देना। जुबली ने हमें उस न्याय की याद दिलाई है जो बिना किसी स्वार्थ के मिलता है, जुबली का महत्व, जिसमें शांतिपूर्ण जीवन को एक साथ लाने, जमीन और उसके संसाधनों को फिर से बांटने, और “जो अपने पास है” उसे ईश्वर की योजनाओं के मुताबिक वापस करने की बात शामिल थी, जो हमारी योजनाओं से बड़ी हैं।
आशा सच्चाई पर स्थापित हो
संत पापा ने कहा, “प्यारे दोस्तो, हम जो आशा करते हैं, उसे सच्चाई पर स्थापित होनी चाहिए, क्योंकि येसु स्वर्ग से नीचे आए ताकि यहाँ एक नया इतिहास बना सकें। ज्योतिषियों के उपहारों में, हम देखते हैं कि हममें से हरेक जन कुछ न कुछ दे सकता है, हम अब अपने लिए क्या नहीं रख सकते बल्कि दूसरों को दे सकते हैं, ताकि येसु की उपस्थिति हमारे बीच बनी रहे। उनका राज बढ़े, उनके शब्द हममें पूरे हों, अजनबी और दुश्मन, भाई-बहन बन सकें। ऊँच-नीच की जगह, इंसाफ हो, और लड़ाई की जगह शांति आए। आशा के शिल्पकार स्वरूप, आइए हम एक साथ भविष्य की ओर एक रास्ते से आगे बढ़ें।”
इतना कहकर संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।
बाल मिशनरी दिवस
देवदूत प्रार्थना करने के बाद, पोप लियो ने याद किया कि आज इटली में बाल मिशनरी दिवस है, जिसे दुनियाभर के स्थानीय कलीसियाओं में अलग-अलग तारीखों से मनाया जाता है। उन्होंने "दुनिया के कई हिस्सों में उन सभी बच्चों और युवाओं को धन्यवाद दिया जो मिशनरियों के लिए प्रार्थना करते हैं और अपने सबसे जरूरतमंद साथियों की मदद करने के लिए समर्पित हैं।"
फिर उन्होंने पूर्वी कलीसियाओं की याद की, जो कल, 7 जनवरी को जूलियन कैलेंडर के अनुसार क्रिसमस मना रहे हैं।
अंत में, उन्होंने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्रित रोम और दुनियाभर के अलग-अलग देशों से आए तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया।
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