पोप लियो : मैं सुउटा की खतरनाक स्थिति को चिंता के साथ दे रहा हूँ
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, सोमवार, 3 अगस्त 2026 (रेई) : पोप ने कहा, “प्यारे भाइयो एवं बहनो, मैं सेउटा की खतरनाक हालत देखकर परेशान हूँ।”
स्पेन का स्वायत शहर सेउटा, जो अफ्रीका के उत्तरी तट पर स्थित है और मोरक्को की सीमा से लगा हुआ है, एक बड़े आप्रवासन संकट का सामना कर रहा है।
हाल के दिनों में, हजारों लोगों ने मोरक्को से इस इलाके में घुसने की कोशिश की है, जिससे जगहें भर गईं हैं और स्पेन को और सुरक्षा दल तैनात करनी पड़ीं।
इस संकट और समुद्र के रास्ते पार करने की खतरनाक कोशिशों के बीच कम से कम 67 लोगों की जान चली गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, अधिकांश लोग समुद्र में डूब गए या अफरा-तफरी के दौरान कुचलकर मर गए।
संत पापा ने कहा, “अफ्रीका की माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि शांति, स्थिरता और न्याय का हल मिल सके।
उन्होंने विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, “आइये, हम शांति के लिए प्रार्थना करते रहें ताकि दुनिया में लड़ाइयाँ खत्म हों और झगड़ों का कूटनीतिक हल मिल सके। आइए, हम दुश्मनी के शिकार सभी लोगों को याद करें, खासकर सबसे कमजोर और सबसे लाचार लोगों को: बच्चे, बूढ़े और बीमार। प्रभु उन लोगों को आराम दें जो परेशान हैं और उन लोगों को आशीष प्रदान करें जो सहायता एवं सांत्वना लाने के लिए काम करते हैं।”
उसके बाद, पोप ने इस सप्ताह के अंत में प्रायश्चित दण्डमोचन के अवसर को भी याद किया, और विश्वासियों को इस महान आध्यात्मिक वरदान के लिए धन्यवाद देने और इसे संजोये रखने के लिए आमंत्रित किया।
ये दिन, असीसी के दण्डमोचन के लिए समर्पित हैं जो पारंपरिक रूप से असीसी के संत फ्रांसिस से जुड़ा है, जिसे पाप स्वीकार संस्कार और पवित्र मिस्सा में हिस्सा लेकर तथा किसी पल्ली या फ्रांसिस्कन चर्च में जाकर, विश्वास का धर्मसार, प्रभु की विन्ती, प्रणाम मरियम और पोप एवं उनके मतलबों के लिए प्रार्थना करके प्राप्त किया जा सकता है।
पोप ने कहा, “ये दिन "असीसी की माफी" के रूप में मनाए जाते हैं। संत फ्रांसिस को यह दण्डमोचन 1216 में पोप होनोरियस तृतीया से मिला था। यह उन्हें तब मिला था जब उन्होंने पोर्जुनकोला में प्रार्थना करते हुए येसु और मरियम को दूतों से घिरा हुआ देखा था। आइए, हम इस महान वरदान के लिए प्रभु का शुक्रिया अदा करें और इसे संभाल कर रखें, खासकर असीसी के संत फ्राँसिस के "मांग" की आठवीं सदी पर, जिनकी मृत्यु 3 अक्टूबर, 1226 को पोर्जुनकोला में हुई थी।
“असीसी की क्षमा” 1216 से ही हो रही है, जब येसु ख्रीस्त, कुँवारी मरियम और दूत संत फ्रांसिस के सामने छोटे से प्रार्थनालय में आए थे, यह चैपल फ्रांसिस ने इटली के शहर असीसी में बनवाया था।
तत्पश्चात संत पापा ने रोम तथा विभिन्न देशों से आये सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। और अंत में उन्होंने सभी को शुभ रविवार की मंगल कामनाएँ अर्पित की।
(अनुवाद -सिस्टर उषा मनोरमा तिरकी, डीएसए)
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