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संत पापा लियो 14वें संत पापा लियो 14वें   (ANSA)

देवदूत प्रार्थना : ख्रीस्त मानव के भूख सचमुच मिटाते हैं

रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा लियो 14वें ने रोटी और मछली के चमत्कार पर चिंतन किया और विश्वासियों को याद दिलाया कि ख्रीस्त से मुलाकात एक तृप्ति का अनुभव है।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार, 3 अगस्त 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 2 अगस्त को संत पापा लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।

जब हम सुसमाचार पाठ सुनते हैं, तो हम अक्सर येसु के चमत्कारों को सुनते हैं : वे ऐसे कार्य हैं जो हमारे प्रति उनके विशेष समर्पण को दिखाते हैं, अर्थात् उस मुक्ति को जिसको वे दुनिया में लाते हैं। प्रभु को उस रूप में प्रस्तुत करता है जो जीवन को अर्थ प्रदान करते, बुराई एवं पाप से मुक्त करते हैं।

येसु से मुलाकात में तृप्ति का अनुभव

चमत्कारों के गूढ़ अर्थ पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा, “अंधे को दृष्टि और बहरे को श्रवण देकर ख्रीस्त न केवल चमत्कारिक कार्य सम्पन्न करते, बल्कि सभी के लिए घोषणा करते हैं कि ईश्वर का राज्य निकट आ गया है। इस तरह, आज का सुसमाचार (मती. 14:13–21) इस बात की गवाही देता है कि येसु न केवल उन लोगों को अर्थ प्रदान करते, जिनमें इसकी कमी है, बल्कि वे हमें अच्छी चीजों से भी भर देते हैं। बहरा जो फिर सुनने लगा, येसु उसके लिए सुसमाचार की घोषणा करते हैं, अंधा जो फिर देखने लगा उसके लिए मुक्ति के महान कार्य को प्रकट करते हैं जो उसके लिए किया गया है। उसी तरह येसु उन लोगों को भोजन देते हैं जो भूखे हैं। निर्जन प्रदेश अर्थात् जब हम आवश्यकता में हैं तो येसु जीवन की रोटी हैं। रोटी का चमत्कार हमें दिखलाता है कि येसु के साथ मुलाकात एक तृप्ति का अनुभव है। “सबों ने खाया और खा कर तृप्त हो गये, और बचे हुए टुकड़ों से बारह टोकरे भर गये।” (पद 20) ये संख्या दिखलाता है कि ईश्वर का दान सभी के लिए है और हमारे लिए उनकी कृपा कभी कम नहीं होती।

लालच की आत्मा की बीमारी

संत पापा ने कहा, “प्यारे मित्रो, ख्रीस्त सचमुच मानवता की भूख मिटाते हैं, सत्य और जीवन की हमारी भूख को। उनके कार्य हमें सिखाते हैं कि जब बांटा जाता है तो कुछ भी बेकार नहीं जाता। दूसरी ओर, जमा करना और बर्बादी एक ही बुराई के दो पहलू हैं: लालच। आत्मा की इस बीमारी से अर्थ खोने लगता है क्योंकि समृद्धि व्यक्ति को मतवाला बना देता है, उस हद तक कि वह उन लोगों को भूल जाता जो भूख से बिलखते एवं प्यास से रोते हैं। और इसलिए, सड़ती हुई चीजों की अमीरी के सामने, उन लोगों के फैले हुए हाथ खड़े हैं जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है, उन लोगों के जले हुए घर जिनके पास शांति नहीं है।

संत पापा ने दुनिया की वर्तमान स्थिति की याद करते हुए कहा, “युद्ध के निर्जन प्रदेश और अहंकार का सामना करते हुए, हम प्रभु की दया को देखें जो स्वर्ग की ओर नजर उठाते, धन्यवाद की प्रार्थना करते, रोटी तोड़ते और उन्हें अपने शिष्यों को देते हैं ताकि वे भीड़ को बांट सकें। (पद. 19)

यूखरिस्त की कृपा के द्वारा उदारता में बढ़ना

संत पापा ने कहा, “उदारता के इस चमत्कार में हम येसु के कार्यों की विशेषता को पाते हैं, जिनकी पराकाष्ठा को हम अंतिम व्यारी में पाते हैं। जब ईश्वर के बेटे ने मानव जाति में हमारे भाई के रूप में अपनी जान दे दी। जब हम यूखरिस्ट की कृपा को ग्रहण करते हैं, तो आइए हम अपने रोज के कामों में इसकी सुन्दरता को दिखाने के लिए खुद को तैयार करें, जिसकी शुरुआत परिवार और दोस्तों के साथ खाने की मेज पर भोजन को आशीर्वाद देने से होती है। येसु के साथ, छुट्टियाँ भी भाईचारे की शांति का समय बन सकती हैं, अगर हम जरूरतमंद पड़ोसियों की मदद करते हैं।

तब संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, “हम कुँवारी मरियम हमारी प्यारी माता से प्रार्थना करें कि वे हमें उदारता में बढ़ने में मदद करें ताकि कोई भी अपने दैनिक आहार से वंचित न रहे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

(अनुवाद - सिस्टर उषा मनोरमा तिरकी, डीएसए)

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03 अगस्त 2026, 14:43