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संत पापा का मिस्सा रिमीनी में संत पापा का मिस्सा रिमीनी में  (AFP or licensors)

संत पापा लियोः अधिकार में सेवा के भाव निहित हैं

संत पापा लियो ने गणतंत्र संत मारिनो की एकदिवसीय यात्रा के अंतिम पड़ाव में रिमीनी में यूखारीस्तीय बलिदान अर्पित किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा कि मैं आप सभों के संग यहां रिमीनी में यूख्रारीस्तीय बलिदान अर्पित करते हुए आनंद का अनुभव करता रहा हूं। यह इस प्रेरितिक यात्रा का अंतिम पड़ाव है जहाँ हम प्रभु के दिन में प्रवेश करने वाले हैं, यह वह समय है जहाँ हम उनके रहस्य की यादगारी मनाते हैं जो सारी चीजों को अर्थ प्रदान करती है जो हमारे प्रेरिताई का स्रोत और चरम सीमा है।

सुसमाचार जिसका श्रवण हमने किया, येसु अपने शिष्यों से पूछते हैं कि मैं कौन हूँॽ पेत्रुस सबों की ओर से उत्तर देते हुए कहते हैं, “आप ख्रीस्त हैं, जीवंत ईश्वर के पुत्र”। हम भी दो हजार वर्षों के उपरांत अपने विश्वास के नवनीकरण हेतु बुलाये जाते हैं- हम विश्वास करते हैं कि येसु ख्रीस्त मसीह, पिता के शाश्वत पुत्र हैं, जो दुनिया में भेजे गये, जिससे वे दुनिया के लिए, बहुतों की मुक्ति हेतु अपने को बलि अर्पित कर सकें।  

संत पापा लियो ने कहा, हाँ प्रिय मित्रों, पेत्रुस के शब्दो में हम सत्य को जानते हैं जो हमें खुशी और आशा से भर देता है, और हम उनमें उस मार्ग को पाते हैं जो हमें जीवन की ओर ले चलता हैः ईश्वर के मार्ग को जो अपने को मानवता की सेवा हेतु अर्पित करते हैं। उस शिक्षक को जो झुककर अपने शिष्यों के पैर धोते हैं, उस चरवाहे को जो अपनी रेवड़ के लिए प्राण अर्पित करते हैं। इस संदर्भ में हम पेत्रुस को येसु से चाभियाँ प्राप्त करता हुआ पाते हैं, क्योंकि कलीसिया के हर स्तर में अधिकार सेवा हेतु है।

संत पापा लियो ने कहा कि पोप, धर्माध्यक्षगण, पुरोहित और उपयाजक सर्वप्रथम ऐसा करने हेतु बुलाये जाते हैं, और उनके बाद ईश्वर की सारी प्रजा उनका अनुसरण करने को बुलायी जाती है, अपने बुलावे के अनुरूप। ईश सेवक डान ओरेस्ते बेंजी ने आप के समक्ष इसी साक्ष्य को प्रस्तुत किया, जब उन्होंने यह कहा, “हमारी बुलाहट इस बात में निहित है... कि हम अपने को ख्रीस्त के गरीबों संग, ख्रीस्त सेवक, जिन्होंने दुनिया के पापों को अपने में वहन किया, जो शरीरधारण कर हमारे संग निवास करते हैं, अपने को संलग्न करते हैं।”

कलीसिया में, वास्तव में, खोलने और बंद करने की प्रेरिताई, ईश्वर के नाम में उन्हें प्राप्त है जिन्हें यह अधिकार दिया गया है, वहीं दूसरी ओर हम इसे हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति के कार्यों स्वरुप पाते हैं, जिसके फलस्वरुप हम आलिंगन, एकता, स्वागत, मुक्ति, पापों से क्षमा देने हेतु बुलाये गये हैं जो हमें ईश्वर में धार्मिक और विवेकी रक्षक होने का अधिकार प्रदान करता है, जिससे हम अपने कार्यों में सभों की भलाई कर सकें।

प्रथम पाठ में हम नबी इसायस के बारे में सुनते हैं जो शेबेना,राजा हेजेकिया का एक अधिकारी था, जिन्हें येरूसालेम के लोगों के लिए धार्मिक, सामाजिक नवीनता हेतु अधिकार दिया गया था। लोभ और महत्वकांक्षा में उन्होंने अपने अधिकारों का गलत उपयोग कर, अपने तथा अपने मित्रों और संबंधियों के लिए धन इकट्टा किया। वह अपने अधिकार की महत्वपूर्णतः को भूल गया था कि उसे समुदाय की भलाई हेतु कार्य सौंपे गये हैं। इस कारण उसे सारे अधिकारों से वंचित कर दिया जाता और उन अधिकारों को एलियाकिम एक ईमानदार व्यक्ति को सौंप दिया जाता है।

संत पापा लियो ने कहा कि हमारे लिए संदेश स्पष्ट है, हमारे पास जो कुछ भी है वह ईश्वर का उपहार है जिसे हमें एक दूसरे की मुक्ति, न्याय हेतु दिया गया है, चाहे हम जहाँ कहीं रहते और जिनके बीच अपने कार्यों को करते हैं, हम सारी दुनिया को खुले हृदय से आलिंगन करने हेतु बुलाये गये हैं।

संत पौलुस दूसरे पत्र में, ईश्वर की योजना के बारे में कहते हैं, कि वे हमारी समझ से बाहर है: उनके तर्क जटिलता के कारण नहीं, बल्कि उनके प्यार की अति विशालता के कारण, जो हमारी क्षमताओं और उम्मीदों से कहीं विशाल है। प्रेरित कहते हैं, “और उसी के ज़रिए और उसी के लिए सब कुछ है" (रोमियों 11:36)। ईश्वर सरल हैं, क्योंकि वे शुद्ध और दयालु हैं, और वे हमें अपने जैसे हृदय से प्रेम करने का निमंत्रण देते हैं। वे हमारे तरीकों को अपने तरीकों और विचारों के अनुरूप बनाते हैं।

संत पापा लियो ने कहा कि ईमानदारी, उदारता और भलाई के ये गुण रोमाग्ना के लोगों को बहुत पसंद हैं, जो सच्चे और खुशमिजाज, मेहनती और मददगार हैं। इसका साक्ष्य यहाँ जन्म लिये कई संतों और धन्य लोगों के जीवन में देखने को मिलता है, जो करूणा के कार्य करते हैं और सुसमाचार को जीते हैं, जिसके कारण उन्हें शहीद भी होना पड़ा है। यह हमारे लिए अलग-अलग कलीसिया के समुदायों, पल्लियों, परिवारों, काथलिक प्रेरितिक कार्यों, अलग-लग आंदोलनों और संघों, और ख्रीस्तीय करूणा तथा शिक्षण के परियोजनाओं देखने को मिलता है। यह निश्चित रूप से इस समृद्धि के साथ-साथ एड्रियाटिक तट और उसके अंदरूनी इलाकों की प्राकृतिक और कलात्मक सुंदरता के कारण भी है, जिसके कारण इटली और दुनिया के कई हिस्सों से इतने सारे लोग हर साल अपनी छुट्टियों के लिए यहाँ आते हैं।

संत पापा ने इन कार्यो के संबंध सभों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप अपनी कोशिशें जारी रखें ताकि यह इलाका न सिर्फ़ रिफ्रेशमेंट और मनोरंजन के लिए, बल्कि आत्माओं का भी स्वागत का स्थल बनें। संत जोन पॉल द्वितीय, जो कई साल पहले यहां आए थे, इस बात पर ज़ोर देते थे कि “आराम करने का मतलब खुद से अलग होना नहीं है। बल्कि, “उन्होंने कहा, "आराम करने का मतलब है खुद से मिलना और अपने अंदर की आत्मा से मेल-मिलाप करना" (रिमिनी में पवित्र मास में प्रवचन, 29 अगस्त, 1982)।

संत पापा ने कहा कि हम जिस दुनिया में रहते हैं, उसमें मनोरंजन के कई तरीके हैं, लेकिन उनमें से कुछ, सही मायने में "खुद के पास लौटने" के बजाय बिखराव और बर्बादी की ओर ले जाते हैं, और हृदय में एक खालीपन छोड़ जाते हैं। कुछ लोग उन्हें “भागना” कहते हैं, मानो ज़िंदगी एक कैदखाना हो जिससे भाग जाये। लेकिन हम जानते हैं कि सुकून पाने का सबसे अच्छा स्थल ईश्वर से मिलना है, जो बाहर, उथल-पुथल में नहीं, बल्कि हमारे अंदर, हमारी आत्मा की गहराई में हैं। इसलिए, एक ख्रीस्तीय समुदाय के रुप में हम इसका अनुभव करने और उसके दूसरों के संग साझा करने को बुलाये गये हैं, अपनी खेलुपन और आतिथ्य द्वारा, व्यक्तिगत और संस्थागत रुप में, अपने कलीसियाओं की देखभाल और विचारमंथन में, मदद करने और करूणा के कार्यों से दूसरों तक पहुँचाने में। यह उनके लिए भी लागू होता है जो एक साल बाद एक अच्छी छुट्टी की कामना करते हुए यहाँ आते हैं, और उन लोगों के लिए भी जो शरीर और आत्मा से घायल हैं, जो अपने देश से दूर शरण, भोजन और मदद की चाह रखते हैं।

संत पापा ने धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष द्वारा विश्वासियों को लिखे गये प्रेरित पत्र की चर्चा करते हुए विश्वासियों को अपने जीवन में- "प्रार्थना, एकता, सुनना, हिम्मत, सादगी, आभार, सुंदरता (...) ज़िंदगी के हर पल में मौजूदगी की कामना की। अतः में उन्हेंने सभी विश्वासियों को उनके स्वागत, और विश्वास की सहभागिता हेतु कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए, कुंवारी मरियम और रिमीनी के संरक्षक संत गैदेन्तुस के हाथों में सुपूर्द किया। 

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22 अगस्त 2026, 20:40