सन मरिनो में पोप : सुसमाचार का अनुपालन करते हुए संघर्ष का जवाब दें
वाटिकन न्यूज
सन मरिनो गणराज्य, शनिवार, 22 अगस्त 2026 (रेई) : डीकन संत मरिनो को समर्पित महागिरजाघर के प्रवेश द्वार पर, सन मरिनो-मोंतेफेल्त्रो के धर्माध्यक्ष, दोमेनिको बेनेवेंती ने रेक्टर मार्को माजंती के साथ संत पापा लियो 14वें का स्वागत किया।
महागिरजाघर के अंदर पुरोहित, धर्मसंघी और धर्मप्रांत के कलीसियाई प्रतिनिधि उपस्थित थे। संत पापा ने महागिरजाघर में पवित्रतम संस्कार की आराधना की और संत मरिनो के पवित्र अवशेष का सम्मान किया।
धर्माध्यक्ष दोमेनिको का स्वागत भाषण
धर्माध्यक्ष दोमेनिको बेनेवेंती ने संत पापा को सम्बोधित करते हुए कहा, “संत पिता, अत्यन्त खुशी और बेटे जैसे स्नेह के साथ, सन मरिनो-मोंतेफेल्त्रो की कलीसिया इस महागिरजाघर में आपका स्वागत करती है, जो गणराज्य के संस्थापक और हमारे धर्मप्रांत के संरक्षक, संत मरिनो के पवित्र अवशेष की पवित्र जगह है। आपकी उपस्थिति कृपा का एक उपहार है जो हमें हिम्मत देता है और हमारे विश्वास को सुदृढ़ करता है, एक अनोखी भूमि को आशीर्वाद देता है जो एक ही स्थानीय कलीसिया में, दो स्वतंत्र देशों, दो गणराज्यों—सन मरिनो और इटली—को समेटे हुए है। उन्होंने बतलाया कि इसके बावजूद वे भाईचारे, शांति और विविधता के बीच एकता के साथ जीते हैं।
उन्होंने कहा कि उनका इतिहास आजादी के सिद्धांत पर आधारित है, जो विश्वास और सामुदायिक भावना में पूरी होती है। उस आजादी के द्वारा वे ईश्वर और इतिहास के सामने जिम्मेदार पुरुष और महिला के रूप में, जैसा कि विश्वपत्र मनिफिका ह्यूमानितास में सिखाया है, हर जीवन की गरिमा को गर्भ धारण से लेकर उसके स्वाभाविक अंत तक सुरक्षित रखने के प्रयास में अपना सहयोग देते हैं। वे परिवार का साथ देने, युवा पीढ़ियों की अच्छी शिक्षा को बढ़ावा देने और आम भलाई की सेवा करने के लिए सुसमाचार की भविष्यवाणी करनेवाली आवाज के रूप में अपना सहयोग देते हैं। धर्माध्यक्ष ने संत पापा के सामने शांति के लिए, सभी युद्धों को खत्म करने के लिए अपनी जोरदार अपील दोहराई।
और अंत में कहा, “हम आपसे गुज़ारिश करते हैं कि आप हमें विश्वास में सुदृढ़ करें और हमारे कदमों को आशीर्वाद दें, ताकि यह भूमि शिष्यों के लिए घर और उम्मीद की जगह बनी रहे।
धर्माध्यक्ष के स्वागत भाषण के बाद संत पापा ने महागिरजाघर में उपस्थित विश्वासी समुदाय को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ दिन।
मुझे इस महागिरजाघर में आप सभी से मिलकर खुशी हो रही है, जो आपके संरक्षक संत डीकन मरिनो को समर्पित है। मैं धर्माध्यक्ष का अभिवादन करता हूँ, और उनके सुवचनों के लिए धन्यवाद देता हूँ, साथ ही, पुरोहितों, धर्मसंघियों, धर्मप्रांत के कलीसियाई प्रतिनिधियों और यहाँ उपस्थित सभी लोगों का अभिवादन करता हूँ।” संत पापा ने इस पल को ख्रीस्त के पदचिन्हों पर एक साथ यात्रा में एक पड़ाव के रूप में अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया।
मानव पर केंद्रित संस्कृति और सभ्यता
सन मरिनो की कलीसिया के इतिहास पर नजर डालते हुए संत पापा ने कहा, “सन मरिनो-मोंतेफेल्त्रो धर्मप्रांत संत मरिनो और लियोन के विश्वास और साहस का एक शानदार इतिहास की विरासत है जिन्होंने अठारह सदियों पहले, ख्रीस्तीय संदेश के साथ ... ऐसे मूल्यों को लाया, जिससे एक ऐसी संस्कृति और सभ्यता का जन्म हुआ जो ईश्वर की छवि, मानव पर केंद्रित हो।” लोकधर्मी और राजमिस्त्री – जिन्हें बाद में, अलग-अलग सेवाओं के लिए बुलाया गया – सुसमाचार के संदेश को एक नए समुदाय और राजनीतिक मॉडल में बदलने में कामयाब रहे, जिसकी खासियत स्वतंत्रता, आपसी सम्मान और मेल-जोल के ख्रीस्तीय सिद्धांत थे। संत पापा ने गौर किया कि यह मॉडल आज भी जीवित है। यह देखने में बहुत अच्छा लगता है कि धर्मप्रांत और नागरिक समुदाय अपने संस्थापकों के काम को उसी जोश और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
संत पापा ने कलीसिया के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को सम्बोधित कर कहा, “मैं सबसे पहले युवाओं की ओर मुड़ता हूँ।” उनसे पोप बेनेडिक्ट 16वें की बात दोहराते हुए कहा, "आधे-अधूरे, तुरंत जवाबों पर न रुकें... जो ज्यादा आसान और अधिक आरामदायक लगता है, जो आपको खुशी, उत्साह, उमंग के कुछ पल दे सकता है, लेकिन आपको जीने का असली आनन्द नहीं दे सकता है।" (युवा लोगों के साथ मुलाकात, 19 जून 2011); और आगे कहा: "आपका हृदय अनंत के लिए खुली एक खिड़की है!" इस खिड़की को खुली रखें! अपनी आत्मा की दृष्टि से उन रास्तों का अनुसरण करें जो सुंदरता, अच्छाई और जीवन की उन महान इच्छाओं द्वारा आपके भीतर खोजे गए हैं जिन्हें आप अपने दिल में रखते हैं। यदि आप ध्यान से उनके रास्तों को देखें और उनकी आवाज सुनें, तो वे आपको ऊपर की ओर ले जाएंगे, ईश्वर से मुलाकात के लिए, जहां वे आपको खोजते और आपकी प्रतीक्षा करते हैं; और उसकी मदद से आपके सपनों में इतिहास को प्रभावित करने और उसे बेहतर बनाने की ताकत आएगी।
युवाओं से पोप : अनन्त के लिए अपना हृदय खोलें
संत पापा ने युवाओं को एक दूसरा सुझाव दिया। उन्होंने कहा, “दुनिया में अपने मिशन को पूरे जोश के साथ अपनाएं! ऐसा करने के लिए, सबसे पहले, अपने बुलावे को समझने की कोशिश करें, जो आप में से हर एक के लिए खास है, और उसकी महानता की तारीफ करें। ....और फिर ईश्वर ने आपको जो भी वरदान दिए हैं, बिना किसी हिचकिचाहट के सब कुछ उसमें लगा दें। विवाह संस्कार, पुरोहित या समर्पित जीवन अपनाने, सामाजिक और राजनीतिक प्रतिबद्धता जैसे मुश्किल फैसले लेने से न डरें; जो जिम्मेदारियाँ आपका इंतजार कर रही हैं, उनके लिए खुद को जितना हो सके उतना अच्छे से तैयार करें। उदारता और न्याय की पहल एवं परियोजनाओं में शामिल हों। इस तरह, आप भी "दुनिया से बात करनेवाली शांति की गवाही" देने में योगदान देंगे, जो इस यात्रा के लिए मेरा आदर्शवाक्य है।
संत पापा ने उन पुरोहितों, धर्मगुरुओं और शिक्षकों को धन्यवाद दिया, जो अलग-अलग कार्यक्रमों और कोशिशों के जरिए बच्चों के मानवीय और ख्रीस्तीय विकास के लिए काम करते हैं। पोप ने कहा, “प्यारे मित्रो, आपका काम एक छिपा हुआ लेकिन बहुत महत्वपूर्ण काम है, एक विन्म्र और मूल्यवान सेवा है, क्योंकि इससे माता-पिता को मदद मिलती है, जो अपने बच्चों की धर्म शिक्षा के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं। वास्तव में परिवार विश्वास के प्रशिक्षण के लिए पहला स्थान है, वह कुदरती कोख है जहाँ बचपन से सुसमाचार को सीखा और हर दिन साँस लिया जाता है। इसलिए, एक विवेकशील प्रचारक अपनी देखभाल के द्वारा यह सुनिश्चित करेगा कि परिवारों और कलीसिया समुदायों के बीच एक मजबूत शैक्षणिक तालमेल बने, एक शैक्षणिक समझौता हो, ताकि माता-पिता शामिल महसूस करें, अपने धर्म को एक नए तरीके से पुनः खोज सकें, और अपने बच्चों को विरासत में मिले ख्रीस्तीय मूल्यों को देने की खुशी पा सकें।
बच्चों को ख्रीस्तीय मूल्यों में बढ़ायें
माता-पिता एवं शिक्षकों को सलाह देते हुए पोप ने कहा कि वे विकास के रास्ते पर खासकर ख्रीस्तीय दीक्षा में, सबसे पहले बपतिस्मा और संस्कारीय जीवन की सुंदरता और आनन्द को बतायें, ताकि समुदायों में पवित्रता के रास्ते बन सकें और मजबूत हो सकें, और सभी लोगों में अपनी नबी, पुरोहित और राजा की गरिमा के बारे में जागरूकता बढ़ सके। द्वितीय वाटिकन महासभा की भावना के अनुसार, धर्मविधि को ध्यान पूर्वक विकसित किया जाना चाहिए और विश्वासियों को एक समुदाय में, एक जीवित शरीर के संयुक्त कार्य के रूप में अनुभव करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए (संविधान साक्रोसांक्तुम कॉन्सिलियुम, 26), जिसमें हर सदस्य दुनिया के रास्तों पर उनकी रोशनी लाने के लिए प्रभु की मेज से बल प्राप्त करता है।
संत पापा ने कहा, “हमारा विश्वास है कि सुसमाचार हर समय के पुरुषों और महिलाओं के लिए स्वतंत्रता का रास्ता है, और येसु ख्रीस्त एवं उनके वचन में मानवता की खुशियों, जख्मों और गहरे सवालों को अर्थ और पक्के जवाब मिलते हैं। इसलिए, हमें यकीन है कि प्रभु हमारे रास्ते पर जो भाई-बहन लाते हैं, उन्हें हम जो सबसे बड़ा उपहार दे सकते हैं, वह है प्रभु से मिलने में उनकी मदद करना, जिन्होंने शरीरधारण किया, जो हमारे लिए मरे और फिर जी उठे, और जिनमें हमारी मुक्ति है। इस नजरिए से, हम हर तरह के उदार कार्य करते हैं, बिना किसी हिचकिचाहट और गहरी चिंता के साथ, बल्कि हमेशा उन लोगों की बड़ी और पूरी भलाई को ध्यान में रखते हुए जिनका हम साथ देते हैं।
हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो कई युद्धों से घायल है, जहाँ हम बढ़ती हिंसा, अकेलेपन और दूसरों के डर से परेशान हैं। इन परेशान करनेवाले बहाव का सामना करते हुए, हमारा जवाब सिर्फ सुसमाचार के रास्ते पर और भी अधिक पक्के विश्वास के साथ चलना हो सकता है। इसकी प्रेरणा एक ऐसे समाज की नींव है जो "अपनी और दूसरों की आज़ादी के सम्मान पर, और सबसे बढ़कर ईश्वर की पवित्र इच्छा के सम्मान पर बना हो" (संत पापा जॉन पॉल द्वितीय, उपदेश, सन मरिनो, 29 अगस्त, 1982), जो सबसे कमजोर लोगों के लिए चिंता, माफी, मेल-जोल और एकजुटता सिखाता एवं आज्ञा देता है।
अधिक पक्के विश्वास से सुसमाचार को जीते हुए संघर्ष का जवाब दें
संत पापा ने तीसरी सलाह के रूप में एकता बनाये रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, आइए, हम अपने समुदायों में एकता की गवाही दें: पल्लियों के बीच और उनके अंदर, पुरोहितों और विश्वासियों के बीच, एवं अलग-अलग करिस्मों और प्रेरिताई के बीच। यह भी उस जीवित सुसमाचार की विरासत का हिस्सा है जो संत मरिनो और लियोन ने हमें दी है, और हमारे मिशन का भी हिस्सा है कि जो उन्होंने शुरू किया था, उसे आगे बढ़ाने के लिए हम लगन और ध्यान के साथ आगे बढ़ें। उनकी दुआओं से, प्रभु आपको आशीर्वाद दें और आपकी यात्रा में हमेशा आपका साथ दें।
संत पापा ने अंत में कहा, “आपके स्वागत के लिए मैं दिल से आपका शुक्रिया अदा करता हूँ! मैं आपको अपनी प्रार्थनाओं में अपने साथ रखता हूँ, और मुझे यकीन है कि आप भी पोप के लिए प्रार्थना करते रहेंगे। धन्यवाद!”
अपना संदेश समाप्त कर संत पापा ने महागिरजाघर के अंदर और बाहर उपस्थित सभी विश्वासियों का अभिवादन किया और उन्हें अपना आशीर्वाद दिया।
Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here.
