देवदूत प्रार्थना में पोप : ईश्वर सच्ची संतुष्टि लाते हैं, उपभोक्तावाद नहीं
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, सोमवार, 27 जुलाई 2026 (रेई) : संत पापा लियो 14 ने कास्तेल गंदोल्फो से देवदूत प्रार्थना का पाठ करने से पहले सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए विश्वासियों को सम्बोधित किया।
संत पापा ने कहा, “येसु की शिक्षा के केंद्र में ईश्वर के राज्य का रहस्य है, जिसकी आज के सुसमाचार में खजाने और मोती से तुलना की गई है (मती. 13:44–52)। ये दृष्टांत उन लोगों के आश्चर्य को दिखाती हैं जिन्हें कुछ ऐसी चीज मिलती है जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी, इतना कि सब कुछ बेचना या छोड़ देना भी उन्हें घाटा नहीं लगता, बल्कि फायदा लगता है। वास्तव में, शुरू से ही, सुसमाचार लेखक येसु के उनके पीछे चलने के बुलावे को ऐसा दिखाते हैं जिसे रोका नहीं जा सकता। यह एक स्वतंत्र चुनाव है, फिर भी जरूरी है और एक तैयार एवं पूरे दिल से जवाब देना है। यह इस बात का पहला महत्वपूर्ण पहलू है कि ईश्वर कैसे पास है और खुद को कैसे प्रकट करते हैं: उनके राज्य का सामना एक ऐसा मोड़ है जो जीवन को सीमित नहीं करता बल्कि उसे विकसित करता है। अगर हमारी तरफ से बदलना है, तो वह सिर्फ इसलिए है ताकि हमारा जीवन सीमित न हो, बल्कि अधिक संभावनाओं के लिए खुल सके।
ख्रीस्त से संयुक्त कलीसिया
एक दूसरी बात है जिसे येसु बहुत महत्व देते हैं: खेत में छिपा खजाना पानेवाला शायद एक किसान होगा, जबकि मोती को पानेवाला एक व्यापारी, जो एक यात्री हो सकता है। इसके बाद और दो दृष्टांत हैं, जिनमें मुख्य पात्र मछुआरे और एक शास्त्री हैं जो पुरानी और नई दोनों चीजों के जानकार हैं। दूसरे दृष्टांतों में राज्य की तुलना आटा गूंथने या अपना घर साफ करनेवाली औरत से, युद्ध की योजना बनानेवाले राजा से, मीनार बनानेवाले आदमी से, प्रबंध करनेवाले प्रबंधक से, और चरवाहों एवं किसानों से की गई है। संक्षेप में, ईश्वर का राज्य अपनी बेमिसाल सुंदरता को अलग-अलग तरीकों से प्रस्तुत करता है, लेकिन सभी लोगों - पुरुषों और महिलाओं, युवाओं और बुजूर्गों, अमीरों और गरीबों को एक गहरे बदलाव के लिए बुलाता है। हर कोई इसे समझ सकता है और इसकी ओर खिंचा चला आता है।
आज भी, कलीसिया उन लोगों का एक समूह है जो अपने मूल, संस्कृति, क्षमता और जिम्मेदारियों में अलग-अलग हैं। फिर भी येसु ख्रीस्त में सभी “एक” के रूप में पहचाने जाने के लिए बुलाये गये हैं: वे छिपे खजाने हैं, कीमती मोती हैं, एक जाल हैं जो बिखरे हुए लोगों को एकत्रित करते हैं। शुरू से ही, येसु ने ऐसे लोगों को बुलाया और अपने आसपास एकत्रित किया अन्यथा वे कभी एक-दूसरे को जान नहीं पाते। इस तरह, उन्होंने दिखाया कि ईश्वर सिर्फ कुछ लोगों को पसंद नहीं करते, बल्कि वे अपना प्यार मुफ्त में सभी को देते हैं, खासकर छोटों या उन्हें भी, जिन्हें छोड़ दिया जाता है।
महत्वपूर्ण चीजों को समझने के लिए कृपा मांगना
संत पापा ने विश्वासियों से कहा, “भाइयो और बहनो, हमें बस वही वरदान माँगना है, वही उपहार जिसे युवा राजा सुलेमान ने माँगा था। (1राजा 3:5, 7-12) यह अमूल्य मोती को पहचानने का, उस खजाने को पहचानने का वरदान है जिसके लिए सब कुछ बेच देना ही अधिक फायदेमंद है। जबकि उपभोक्ता संस्कृति हमारे पसंद को प्रभावित करती है, लगातार ऐसे साधन बेचने के लिए नई जरूरतें उत्पन्न करती जो कभी संतुष्ट नहीं करते, और कभी-कभी दिल को भी विषाक्त कर देती हैं, हमें यह परखने सीखना चाहिए कि क्या वास्तव में मायने रखता है: ईश्वर के साथ रिश्ते का खजाना जो हमें खुशी के लिए खोलता और हमें एक-दूसरे के साथ अपने रिश्तों को और अधिक खुलकर जीने में मदद करता है।
तब माता मरियम से प्रार्थना करते हुए पोप ने कहा, “प्रज्ञा का सिंहासन, माता मरियम की प्रार्थना, जीवन के लिए हमारी चाह को येसु की ओर ले जाए, ताकि यह उनमें पूरी तरह से पूरी हो सके।”
इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।
Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here.