संत पीयुस 10वें के पुरोहितीय बंधुत्व धर्मसंघ के चार नए बिशपों का अभिषेक इकोन में संत पीयुस 10वें के पुरोहितीय बंधुत्व धर्मसंघ के चार नए बिशपों का अभिषेक इकोन में   (AFP or licensors)

लेफेब्राईट धर्माध्यक्षीय अभिषेक के लिए कलीसिया से बहिष्कार का आदेश

विश्वास के धर्मसिद्धांत के लिए गठित विभाग के प्रीफेक्ट कार्डिनल विक्टर मानुएल फर्नांडीज के द्वारा हस्ताक्षरित एक दस्तावेज में, 1 जुलाई को हुए धर्माध्यक्षीय अभिषेक को “एक फूट डालनेवाला कृत्य” बताया गया है, और साथ ही एक व्याख्यात्मक टिप्पणी में रोम की कलीसिया से बहिष्कार की गंभीर कानूनी प्रतिबंध की जानकारी दी गई है।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 2 जुलाई 26 (रेई) : संत पीयुस 10वें के याजकीय सोसाईटी के धर्माध्यक्षों, अल्फोंसो दी गालारेता और बर्नार्ड फेले—क्रमशः मुख्य अभिषेककर्ता और सह-अभिषेककर्ता—एवं नव अभिषिक्त धर्माध्यक्ष  पास्कल श्रेइबर, माइकल गोल्दादे, मिशेल पॉइंसिनेट दी सिवरी, और मार्क हनापियर को “इपसो फक्तो (स्वतः ही)” “लाते सेंतेनसिए” (सजा) का सामना करना पड़ा है, जो परमधर्मपीठ के लिए आरक्षित है, क्योंकि उन्होंने “एक फूट लाने का काम” किया है: “चार पुरोहितों का धर्माध्यक्षीय अभिषेक, परमधर्मपीठ के आदेश के बिना और सर्वोच्च अधिकारी पोप की इच्छा के विरुद्ध।”

यह बात 2 जुलाई को जारी एक आज्ञप्ति में कही गई है, जिसपर विश्वास के धर्मसिद्धांत के लिए गठित विभाग के अध्यक्ष कार्डिनल विक्टर मानुएल फर्नांडीज ने हस्ताक्षर किये हैं, और उसी विभाग के दो सचिवों से प्रतिहस्ताक्षरित है।

यह फैसला 1 जुलाई, 2026 की सुबह स्विट्जरलैंड के एकोन में हुए अभिषेक समारोह के 24 घंटे बाद आया।

विश्वास के धर्मसिद्धांत के लिए गठित विभाग की आज्ञप्ति यह तय करती है कि अभिषेक में, अभिषेककर्त्ता और अभिषेक पानेवाले, दोनों ही तय बहिष्कार में शामिल हैं।

यह दर्दनाक अंत लेफेब्रिस्टों के उस फैसले का नतीजा है, जो उन्होंने पोप लियो 14वें की बार-बार कही गई इच्छा के खिलाफ लिया है।

बहिष्कार की आज्ञप्ति
बहिष्कार की आज्ञप्ति

इस बहिष्कार ने संत पीयुस 10वें के याजकीय सोसाईटी के सदस्यों को रोम की कलीसिया से अलग कर दिया है।

जहाँ तक लोकधर्मियों की बात है, जो लोग औपचारिक रूप से सोसाईटी के नियमों का पालन करते हैं, उन्हें बहिष्कृत माना जाएगा।

अधिक जानकारी एक “व्याख्यात्मक टिप्पणी” में दी गई है, जिसे बहिष्कार के आदेश के साथ ही विभाग ने प्रकाशित किया, जिसे नीचे दिया जा रहा है:

विभाग की टिप्पणी

संत पापा पॉल षष्ठम के समय से लेकर अभी के विभाग में हाल ही में हुई बातचीत तक, महाधर्माध्यक्ष मार्सेल लेफेब्रे द्वारा शुरू किए गए आंदोलन के सदस्यों को काथलिक कलीसिया के साथ पूरी तरह से जोड़ने की कई कोशिशें बेकार साबित हुई हैं।

यह स्थिति परमधर्मपीठ के आदेश के बिना, पोप की इच्छा के विरुद्ध और कलीसियाई कानून का खुला उल्लंघन करके किए गए धर्माध्यक्षीय अभिषेक से और भी खराब हो गई।

इसलिए, यह विभाग, उसे सौंपे गए कामों को ईमानदारी से करते हुए, यह बताना जरूरी समझता है कि यह काम फूट का कारण बना, जिसके याजकों और इसमें शामिल लोकधर्मियों पर कानूनी नतीजे हुए। असल में, जैसा कि 1988 में कहा जा चुका है, “ऐसी अवज्ञ – जिसका मतलब व्यवहारिक रूप से रोमी परमाध्यक्ष को नकारना है – एक फूट डालनेवाला काम है” (पोप जॉन पॉल द्वितीय, प्रेरितिक पत्र एक्लेसिया देई, 3)।

https://www.vatican.va/content/john-paul-ii/it/motu_proprio/documents/hf_jp-ii_motu-proprio_02071988_ecclesia-dei.html

इस संबंध में अब से:

1.संत पीयुस 10वें के याजकीय सोसाईटी से जुड़े पुरोहित काथलिक धर्म से फूट में हैं और इसलिए उन्हें कलीसिया से बहिष्कृत माना जाना चाहिए (एक्लेसिया देई, 5 सी; विधायी दस्तावेज के लिए परमधर्मपीठीय समिति, बिशप मार्सेल लेफेब्रे के आंदोलन को माननेवालों द्वारा किए गए मतभेद के लिए निकाले जाने पर व्याख्यात्मक टिप्पणी, 24.08.1996, 5-6), और वे कानून द्वारा तय बहिष्कार के अधीन हैं। (कलीसियाई कानून 1364 § 1 CIC)।

2. उन लोकधर्मियों के लिए, जो औपचारिक रूप से संत पीयुस 10वें के याजकीय सोसाईटी के नियमों का पालन करते हैं, उन्हें 1996 में विधायी दस्तावेज के लिए परमधर्मपीठीय समिति के व्याख्यात्मक दस्तावेज (ibidem, 7) में बताई गई शर्तों के तहत अलग माना जाएगा और उन्हें कलीसिया से निकाल (एक्सकम्यूनिकेट) दिया जाएगा, जो लागू हो चुका है और जिसे इस विभाग ने अपना लिया है।

https://www.vatican.va/roman_curia/pontifical_councils/intrptxt/documents/rc_pc_intrptxt_doc_19960824_vescovo-lefebvre_it.html

3. अंत में, ईश्वर की पवित्र प्रजा को चेतावनी दी जाती है कि संत पीयुस 10वें के याजकीय सोसाईटी के पुरोहितों और धर्माध्यक्षों द्वारा संस्कारों का अनुष्ठान अवैध है, और उनके द्वारा दिए गये पापस्वीकार संस्कार और शादी संस्कार अमान्य हैं।

कलीसिया, एक देखभाल करनेवाली माँ की तरह, उन सभी लोगों का सच्चे स्नेह और पूरी चिंता के साथ स्वागत करेगी जो कलीसिया के साथ पूर्ण एकता में रहना चाहते हैं। प्रेरितिक राजदूत उन प्रक्रियों का इंतजाम करेंगे जिनका इस्तेमाल धर्माध्यक्ष अलग-अलग मामलों में कर सकते हैं।

अंत में, सभी विश्वासियों से कहा जाता है कि वे रोमी पोप, धर्माध्यक्षों और पूरी कलीसिया के साथ मजबूती से जुड़े रहें (लुमेन जेंसियुम, 22; can. 751 CIC), और संत पीयुस 10वें की याजकीय सोसाईटी द्वारा अर्पित पवित्र मिस्सा एवं अन्य क्रिया-कलापों में हिस्सा लेने से बचें।

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here.

02 जुलाई 2026, 11:59