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उत्तरी अमेरिका में येसु समाजी कॉलेज और विश्वविद्यालय संघ के प्रतिनिधियों के साथ एक मुलाकात में, पोप लियो 14वें उत्तरी अमेरिका में येसु समाजी कॉलेज और विश्वविद्यालय संघ के प्रतिनिधियों के साथ एक मुलाकात में, पोप लियो 14वें  (@Vatican Media)

पोप: विश्वविद्यालय एकता और आमहित को बढ़ावा देने के लिए प्रभावशाली माध्यम

उतरी अमेरिका में येसु समाजी कॉलेज और विश्वविद्यालय संघ के प्रतिनिधियों के साथ एक मुलाकात में, पोप लियो 14वें ने कहा कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी समाज के सामने आनेवाले मुद्दों का सामना करने के लिए आदर्श जगह हो सकते हैं, जैसे पिछड़े लोगों की जरूरतों को पूरा करना और कृत्रिम बुद्धिमता के प्रभाव पर चिंतन करना आदि।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 25 जून 26 (रेई) : पोप लियो 14वें ने गुरुवार, 25 जून को कहा कि सच्चाई की खोज को बढ़ावा देकर, हाशिए पर पड़े लोगों और युवाओं के करीब रहकर, और पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करके, कॉलेज और यूनिवर्सिटी आज मानव के सामने आनेवाली चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण जगह बन जाते हैं।

पोप ने उतरी अमेरिका में जेसुइट कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष और प्रतिनिधियों के साथ वाटिकन में एक मुलाकात में कहा, “आपके संस्थान न केवल आपके छात्रों को समाज के हाशिए पर रहनेवालों के साथ होनेवाले अन्याय के बारे में सिखाने के लिए, बल्कि एकजुटता और सबकी भलाई पर आधारित नए मॉडल प्रस्तावित करके सिस्टम में बदलाव को बढ़ावा देने में भी एक मजबूत जरिया बनने के लिए बुलाए गए हैं।”

अपने भाषण में, पोप लियो ने एक रोडमैप पेश किया कि ये संस्थान अपने सदस्यों को समाज के सबसे जरूरी मुद्दों का सामना करने में कैसे मदद कर सकते हैं।

पोप ने येसु समाजियों की चार वैश्विक प्रेरितिक वरीयताओं से प्रेरणा ली: ये विषयवस्तु 2019 में बनाई गई थीं और इनका मकसद अगले 10 सालों के लिए येसु समाज के काम को निर्देशित करना है।

इसकी प्राथमिकताएँ हैं: ईश्वर का रास्ता दिखाना, बहिष्कृत लोगों के साथ चलना, युवाओं के साथ यात्रा करना, और हमारे साझा घर की देखभाल करना।

पोप लियो 14वें ने बृहस्पतिवार, 25 जून को कहा कि सच्चाई की खोज को बढ़ावा देकर, हाशिए पर पड़े लोगों और युवाओं के करीब रहकर, और पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करके, कॉलेज और यूनिवर्सिटी आज मानव के सामने आनेवाली चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण जगह बन जाते हैं।

पोप ने उतरी अमेरिका में जेसुइट कॉलेजों और यूनिवर्सिटी संघ के प्रतिनिधियों के साथ वाटिकन में एक मुलाकात में कहा, “आपके संस्थान का मकसद न सिर्फ आपके छात्रों को समाज के हाशिए पर रहनेवालों के साथ होनेवाले अन्याय के बारे में सिखाना हैं, बल्कि एकजुटता और सबकी भलाई पर आधारित नए मॉडल प्रस्तावित करके सिस्टम में बदलाव को बढ़ावा देने में भी एक मजबूत माध्यम बनना है।”

बड़े बदलाव का दौर

पोप लियो 14वें ने अपने भाषण की शुरुआत “आज मानव के सामने मौजूद कई चुनौतियों” पर जोर देकर की, ऐसे समय में जिसे “बड़े बदलाव का दौर कहा गया है।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज अधिक सांसारिक होते जा रहे हैं, “कई लोग ईश्वर का जिक्र सार्वजनिक दायरे और लोकप्रिय संस्कृति से बाहर करना चाहते हैं,” या राजनीतिक प्रणाली “गरीबों, प्रवासियों और उन लोगों की आवाज” पर ध्यान नहीं देते जिन्हें दुनिया बहिष्कृत मानती है।

पोप ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को अक्सर बेहतर भविष्य की उम्मीद नहीं होती है और धरती के संसाधनों का इस्तेमाल नियमित रूप से अपने फायदों के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने मानव पर कृत्रिम बुद्धिमता के बढ़ते असर पर भी ध्यान दिया।

आप्रवासी और शरणार्थी को मौके दें

इस बारे में, उन्होंने कहा कि येसु संघियों की चार वैश्विक प्रेरितिक वरीयताएँ इन मुद्दों को सुलझाने में मदद कर सकती हैं।

गरीबों के साथ चलने की विषयवस्तु के बारे में, पोप ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह “ऐसे समय में खास तौर पर जरूरी है जब रिकॉर्ड संख्या में हमारे भाई-बहन गरीबी में जी रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि युद्ध, धार्मिक या राजनीतिक जुल्म, भूख या जलवायु परिवर्तन की वजह से बहुत से लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं।

पोप ने जोर देकर कहा कि जेसुइट उच्च शैक्षणिक संस्थान न सिर्फ सबकी भलाई और एकता को बढ़ावा देने के लिए हैं, बल्कि “शरणार्थी, प्रवासी और कम सामाजिक आर्थिक स्थितिवाले लोगों को उत्तम शिक्षा का फायदा उठाने के मौके देने के लिए भी हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “इस तरह, वे जिस समाज में रहते हैं, उसमें पूरी तरह से घुल-मिल पाएंगे और साथ ही अपने अलग-अलग अनुभवों और नजरिए से बड़े विद्यार्थी दल को बेहतर बना पाएंगे।”

युवाओं में उम्मीद जगाएँ

युवाओं का साथ देने की विषयवस्तु के बारे में, पोप ने जोर देकर कहा कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी बेहतर भविष्य में उम्मीद जगाने की स्वाभाविक जगहें हैं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अक्सर अपने शैक्षणिक करियर की शुरुआत विचारधाराओं और ऊर्जा से भरकर करते हैं और अपनी पढ़ाई एवं रिश्तों के जरिए, दुनिया को बेहतर बनाने की उम्मीद की एक नई भावना पाते हैं।

पोप ने कहा, “मैं आपको अपने समुदायों में बातचीत, सेवा और प्रार्थना के मौकों के जरिए उम्मीद की उसी भावना को बढ़ावा देते रहने के लिए आमंत्रित करता हूँ, हमेशा याद रखें कि ख्रीस्त का पुनरूत्थान ही उम्मीद का सबसे बड़ा स्रोत है और उनके साथ सब कुछ संभव है।”

सृष्टि की देखभाल में, मिसाल बनकर आगे बढ़ें

सृष्टि की देखभाल के विषय पर बात करते हुए, पोप लियो ने जेसुइटों द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों को “सिर्फ व्याख्या में नहीं, बल्कि मिसाल बनकर सिखाने” के लिए बढ़ावा दिया, खासकर जलवायु परिवर्तन के असर और “आम भलाई की कीमत पर कुछ लोगों द्वारा संसाधनों के गलत इस्तेमाल” को देखते हुए।

उन्होंने कहा, “मैं आपको हिम्मत देता हूँ कि आप अपने परिसर में लोगों को इन मौजूदा खतरों के बारे में बताने की अपनी कोशिशें जारी रखें, लेकिन साथ ही अपने समुदायों को पारिस्थितिक स्थिरता, सादगी और ईश्वर के वरदानों के लिए धन्यवादी होने का उदाहरण बनने दें।”

जो सत्य को खोजते हैं वे ईश्वर को खोजते हैं

ईश्वर का रास्ता दिखानेवाले विषय के संबंध में, पोप ने बताया कि "जो लोग शोध करते हैं, जो अध्ययन करते हैं, और जो सत्य की खोज करते हैं वे अंततः ईश्वर की तलाश कर रहे हैं, चाहे उन्हें इसका एहसास हो या न हो।"

उन्होंने शैक्षणिक समुदाय बनाने के महत्व पर जोर दिया, जिसमें सदस्य "सच्चाई को" जान सकें और युवाओं के बीच ईश्वर के प्रति बढ़ती भूख का जवाब दे सकें।

इस संबंध में, पोप ने येसु समाजियों से आध्यात्मिक अभ्यासों में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया, क्योंकि वे महत्वपूर्ण निर्णयों पर आत्मपरख प्रदान करने में भी मदद कर सकते हैं।

पोप ने अपने संदेश का समापन इस कामना के साथ की कि येसु संघी अपने संस्थापक संत इग्नासियुस लोयोला की मदद से “जेसुइट परंपरा को जारी रखें” ताकि उनकी देखभाल में सौंपे गए लोगों को “दूसरों की देखभाल करनेवाले पुरुष और महिला” बनाया जा सके।

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25 जून 2026, 18:02