बोर्गो दियालोगेस के प्रतिभागियों से सन्त पापा लियो
वाटिकन सिटी
वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 जून 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन के कन्सिस्ट्री भवन में शुक्रवार को बोर्गो दियालोगेस कार्य शिविर के प्रतिभागियों ने सन्त पापा लियो 14 वें का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना। इस अवसर पर सन्त पापा ने कहा कि बोर्गो दियालोगेस कार्य शिविर उस प्रक्रिया का पहला कदम है जिसका लक्ष्य ऐसे विश्व में नैतिक नेतृत्व को नवीकृत करना है, जो आज टूटी-फूटी है और अपनी ऐतिहासिक जड़ों को भूली हुई लगती है।
रोम शहर के परिसर में कास्टेल गोन्दोलफो स्थित बोर्गो लाओदादो सी उद्यान में बोर्गो दियालोगेस अर्थात् सम्वाद का स्थल शीर्षक से पहली बार कार्य शिविर सम्पन्न हुआ।
चिन्ता के विषय
सन्त पापा ने कहा कि प्रतिभागियों ने उन मुद्दों पर विचार विमर्श किया जो कि वर्तमान विश्व में तर्कसंगत हैं तथा जिनके प्रति काथलिक कलीसिया भी चिन्तित है। इनमें सन्त पापा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा मानवता के साथ इसका सम्बन्ध, वृद्धावस्था और सत्ता, खेल और कूटनीति तथा धारणीय विकास का भविष्य गिनाया। सन्त पापा ने कहा कि उक्त कार्य शिविर में भाग लेकर प्रतिभागियों ने उनकी उस मनोकामना को पूरा किया है जिसे उन्होंने हाल ही में प्रकाशित अपने विश्व पत्र मानिफिका ऊमानितास में व्यक्त किया था, और वह यह कि अपने युग के सभी स्त्री-पुरुषों के साथ सम्वाद करना और उनके साथ मिलकर “जन कल्याण एवं सभी के लिए सम्मानजनक जीवन को बढ़ावा देना” (अंक 2)।
अतीत को न भूलें
सन्त पापा ने कहा, "हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब हम आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से अंधे हो चले हैं। एक मिथ्या व्यावहारिक सोच हमें अपने इतिहास की जड़ों को काटने के लिए उकसाती है, मानों अतीत से अलग एक तरह की 'नई रचना' की शुरुआत करना सम्भव हो।" उन्होंने कहा, "जो लोग ज़रूरी नैतिक सिद्धांतों का हवाला देते हैं, वे भी इस ऐतिहासिक शून्यवाद में पड़ सकते हैं, और उन्हें भी यह भ्रम हो सकता है कि बीसवीं सदी के अत्याचार फिर कभी नहीं हो सकते" (अंक 204)।
प्रेम की सभ्यता का निर्माण करें
सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि बोर्गो दियालोगेस काथलिक कलीसिया के दर्शन और दृष्टि पर संरचित सम्वाद शिविर है, जिसका उद्देश्य ज़मीनी स्तर पर सुनकर वैश्विक एकता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहाः “बाबुल की मानीर” बनाने के प्रलोभन के समक्ष, जो सबसे कमज़ोर लोगों की कीमत पर लाभ की पूजा करना सिखाता तथा इंसानियत को खत्म करने के खतरे को बढ़ाता है, हमें नये जैरूसालेम अर्थात् प्रेम की सभ्यता के निर्माण में योगदान देने के लिए बुलाया गया है, जिसमें प्रेम ही आर्थिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक जीवन का मार्गदर्शक सिद्धान्त हो।"
सन्त पापा ने कहा, “प्रेम की सभ्यता किसी एक या शानदार कृत्य से नहीं, बल्कि वफ़ादारी के छोटे-छोटे और सुनिश्चित कृत्यों के जोड़ से उत्पन्न होगी, जो मानवता को समाप्त करने के खिलाफ एक मज़बूत दीवार का काम करते हैं। इसी वजह से, यह सोचना सही रहेगा कि हम सब अपने-अपने तरीके से प्रेम की सभ्यता के निर्माण में कैसे सहयोग कर सकते हैं।” (मानिफिका ऊमानितास, 213)
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