संत पापा लियो, स्पेन की यात्रा के अंतिम दिन संत पापा लियो, स्पेन की यात्रा के अंतिम दिन   (ANSA)

संत पापा लियोः मानव का जन्म मिलन हेतु

संत पापा लियो 14वें ने स्पेन की अपनी यात्रा के अंतिम पड़ा में सांता क्रूज दे तेनेरिफे में मिस्सा बलिदान अर्पित करते हुए सभी कृपादानों के लिए ईश्वर का धन्यवाद अदा किया। उन्होंने अपने प्रवचन में मानवीय सम्मान की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हम सभों का जन्म मिलन हेतु हुआ है जहाँ हम अपने को एक दूसरे के लिए देने में अपने मानवीय जीवन के अर्थ को समझते हैं।

वाटिकन सिटी़

संत पापा लियो 14वें ने स्पेन की अपनी प्रेरितिक यात्रा के अंतिम पड़ाव में शुक्रवार को, सांता क्रूज दे तेनेरिफे में पवित्र हृदय के महोत्सव का ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा कि आज के इस दिन में हमारा एक साथ आना एक कृपा है जब हम येसु के हृदय को इतिहास के हृदय में प्रकट होता पाते हैं। मुझे आप सभों के संग यह यूख्रारीस्तीय बलिदान अर्पित करने में खुशी हो रही है, जहाँ मैं असंख्य विश्वास के साक्ष्य और करूणा के कार्यों के लिए ईश्वर का धन्यवाद अदा करता हूँ जिसका अनुभव मैंने इस प्रेरितिक यात्रा में किया है। यह हमारे द्वीपसमूह को सुन्दर और आतिथ्य का प्रसिद्धि स्थल बनाता है, एक स्थल जहाँ पुनर्जीवित येसु हमसे आगे जाते और हमें अपने को प्रकट करते हैं। समुद्र हमारे सामने अनंत के भाव को व्यक्त करता है और उसी भांति आकाश भी, लेकिन उस से भी बढ़कर ईश्वर की तीव्र इच्छा जो मानव हृदय के संग अपने को संयुक्त करना चाहते हैं, जिनकी खुशी और आशा, दुःख और चिंताएं कलीसिया के हृदय में गूंजित होती हैं।

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन   (AFP or licensors)

हमारा जन्म मिलन के लिए

कोई भी मानव अपने में एक द्वीप, अकेला नहीं है। इस धर्माप्रांत की भौगोलिक स्थिति और इसकी प्रेरितिक चुनौतियाँ जिसका यह सामना करती है इस सत्य का साक्ष्य देती है हमारा जन्म मिलन के लिए हुआ है और कोई भी बाधा, दूरी, खतरा या जोखिम हमें इस यात्रा में रोक नहीं सकती है। चाहे हम अपना जीवन एक जगह पर जीते या उसे छोड़ने का चुनाव करते हैं, कोई भी अपने में अपरिवर्तित नहीं रहता है। यह हृदय का रहस्य है, जहाँ हम निर्गमन और मिलन के आंतरिक बुलावे को पाते हैं।

संत पापा लियो ने कहा कि लेकिन येसु का हृदय हमें यह दिखलाता है कि उस निरर्थक संघर्ष में हमें नहीं खोना है। “ईश्वर ने अपने पुत्र को दुनिया में भेजा जिससे हम उनके द्वारा जीवन प्राप्त कर सकें।” यह अपने को देना है जहाँ हम सचमुच में अपने लिए जीवन को पाते हैं। ऐसा नहीं होता तो हम एक शून्य में घूमते रहते हैं। वास्तव में, जैसे की धर्मसभा हमें याद दिलाती है, मानव ईश्वर के संग एकता में बनने रहने को बुलाया गया है और “निष्ठा में स्वार्थहीन अपने को देने के द्वारा हम जीवन के सच्चे अर्थ को पाते हैं।” वास्तव में, उनके बुलाहट की गहराई तृत्वमय ईश्वर के प्रेमपूर्ण आयाम में प्रवेश करना है जिसे उन्होंने पाया है।” (मनीफिका ह्यूमानितास,48)। संत पापा फ्रांसिस उसी भांति इसके बारे में कहते हैं, “आज बहुत से लोगों अपने में एक बहृद असंतुलन का अनुभव करते हैं, जो उन्हें बहुत ज़्यादा क्रियाशील होने को बाध्य करती है, यह उनमें व्यस्तता के दबाव उत्पन्न करती है, और इस निरंतरता में जल्द ही, वे अपने आस-पास की हर चीज़ को नज़रअंदाज़ करने लगते हैं। यह इस बात पर भी असर डालती है कि वे प्रर्यावरण के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।” (लौदातो सी. 225) ये शब्द टेनेरिफ़ में आतिथ्य के काम को भी चुनौती प्रदान करते हैं, यह दोनों तरह के लोगों का हृदय स्पर्श करता है, वे जो यहां अपनी छुट्टियां बीताने का चुनाव करते और वे जो इस द्वीप में रहते और काम करते हैं, जो दुनिया भर के कई देशों से आने वाले मेहमानों का स्वागत करते हैं।

संत पापा लियो मिस्सा बलिदान में
संत पापा लियो मिस्सा बलिदान में   (@Vatican Media)

मानवीय हृदय की चाह

मानव हृदय क्या की खोज करता है? हम इसकी प्यास का जवाब कैसे दे सकते हैं जो झूठी न हो? यह महत्वपूर्ण है विशेष कर उनके लिए जो सुसमाचार के द्वारा संचालित किये जाते हैं, वे हर चीज को व्यपार और लाभ की दृष्टिकोण से नहीं देखते हैं। “वे जो हर क्षण अधिक आनंदित होते और बेहतर जीवन जीते हैं, वे लोग हैं जो यहाँ-वहाँ डूबकी लगने का परित्याग करते हैं, वे उन चीजें पर ध्यान नहीं देते जो उनके पास नहीं है। वे इस बात का अनुभव करते हैं कि हर व्यक्ति और हर चीज की प्रशंसा करने का अर्थ क्या होता है, वे छोटी से छोटी चीजों से सीखते और उनका आनंद उठाते हैं। इस भांति वे अपनी अधूरी ज़रूरतों का परित्याग करने के योग्य होते हैं, जिससे उनका जुनून और थकान कम हो जाता है” प्रिय भाइयो और बहनों, आतिथ्य के अपने उत्तरदायित्व को आप इसी तरह समझें।

संत पापा लियोः स्पेन की यात्रा का अंतिम पड़ाव

गरीब सुसमाचार के केन्द्र में

संत पापा ने कहा कि आज का सुसमाचार इस चुनौती को अपनी चरम पर ले जाता हुआ प्रतीत होता और हमें दरिद्र के धन की याद दिलाता है,एक विरोधाभाव जो हमें येसु के जीवन की ओर, उनकी सच्चाई, उनके मार्ग की ओर सीधे तौर पर इंगित कराता है, जिस पर वे निरंतर हमें चलने को निमंत्रण देते हैं। सुसमाचार में हमने सुना कि वे इसके लिए पिता को धन्य कहते हैं कि उन्होंने अपने को निरे बच्चों के लिए प्रकट किया है- सबसे छोटों के लिए, उनके लिए जिनके विचारों और शब्दों की अवहेलना की जाती है। उन्होंने उन्हें उन चीजों से समृद्ध किया है जो उन लोगों से छिपा है जो तारीफ़ और सफलता से घिरे हुए हैं। प्रेरितिक प्रबोधन दिलेक्सी ते के द्वारा हमारा ध्यान इस ओर आकर्षित किया जाता है कि दिव्य रहस्योद्घाटन और कलीसिया की प्रेरिताई के क्रेन्द में गरीबों का विशेष स्थान है।

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद   (@Vatican Media)

गरीबों से सीखें

संत पापा लियो ने कहा कि इन द्वीपों में हम इस रहस्य को एक अद्वितीय रुप में ध्वनित होता पाते हैं, प्रवासी मार्गो के केन्द्र में, जो उन भाई-बहनों के लिए शुरुआती स्वागत की जगह बनती है जिनकी यात्रा आम तौर पर बहुत ज़्यादा खतरों और हिंसा से भरी होती है। वे लोग जो निराशा का फ़ायदा उठाते हैं, उनके सामने हम ख्रीस्तीय, प्रभु के उदाहरण से कहीं ज़्यादा कर सकते हैं, जो कहते हैं- “थके मांदे और बोझ से दबे हुए लोगों तुम सब के सब मेरे पास आओ मैं तुम्हें विश्राम दूंगा” (मत्ती. 11.28)। हमारे लिए सबसे बड़ी कृपा अपने को उन लोगों के द्वारा सुसमाचार प्रचारित होने देना है जिनकी सेवा हम करते और उनमें ईश्वर के रहस्यमय विवेक को पहचानते हैं जो उनके शरीर में अंकित किया गया है। “अनिश्चित परिस्थितियों में बढ़ना, अति विषम परिस्थितियों में जीने सीखना, ईश्वर में विश्वास करते हुए इस बात की सुनिश्चितता कि ईश्वर के सिवाय कोई भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेता और अधंकारमय क्षणों में एक दूसरे की मदद करना- गरीबों ने इन बहुत सारी चीजों को सीखा है, जिन्हें वे अपने हृदय के अंदर गुप्त रखते हैं। हम जिन्हें उन अनुभवों से होकर गुजरना नहीं पड़ा है निश्चित रुप में गरीबों के अनुभव हमारे लिए अधिक सीखने के स्रोत होते हैं। सिर्फ़ अपनी शिकायतों को उनकी तकलीफ़ों और मुश्किलों से जोड़ते हुए हमें अपनी ज़िंदगी को आसान बनाने की चुनौती दे सकते हैं।” (दिलेक्सी ते 102)। ईश्वर अपने प्रेम करने वालों को फटकारते और सुधारते हैं (प्रका.3.19) वे हमारे जीवन को सरल और आनंदमय बनाना चाहते हैं।

संत पापा के प्रेरितिक यात्रा की निशानी
संत पापा के प्रेरितिक यात्रा की निशानी   (@Vatican Media)

प्रेम सुसमाचार का हृदय

प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा लियो ने कहा, आप जो हैं और आप इस द्वीप को, मित्रता और आतिथ्य के चेहरों में भातृत्वमय समुदायों स्वरुप, येसु के हृदय से मिलन हेतु एक स्थल बनाने के लिए आप जो करते हैं उसके लिए मैं आप का धन्यवाद करता हूँ। “इस प्रकार हम अपने लिए ईश्वर का प्रेम जान गये हैं और इसमें विश्वास करते हैं। (1.यो.4.16) विश्वास की यह अभिव्यक्ति, जो हमें संत योहन के प्रथम पत्र में मिलती है, सदैव आप में चमकती रहे और आप को प्रार्थना और कार्य करने हेतु प्रेरित करे। “आप युवाओं और किशोरों के प्रति, धनी और गरीबों, स्थानीय निवासियों और अतिथियों के प्रति सजग रहें, उन सभों को ऐसी नज़र से देखने  की ज़रूरत है जो दिखावे से परे हो और उनके बेचैन हृदयों की गहराई को पहचानती हो, जो अक्सर पहले से ही, शायद अचेतना में, ईश्वर के राज्य और उसके न्याय की ओर उन्मुख हैं। यह आप सभों में झलके कि “ईश्वर प्रेम है और जो कोई प्रेम में रहता है वह ईश्वर में निवास करता और ईश्वर उसमें।” यह सुसमाचार का हृदय है, येसु ख्रीस्त का हृदय। जो कोई अपने को इसमें डूबोता है वह अपने लिए नहीं जीता है। संत पापा ने शुभकामनाएँ देते हुए अपने प्रवचन के अंत में कहा “इस प्रेम के समुद्र को सभों के लिए खोलें यह मेरी इच्छा और प्रार्थना है आपके लिए और उन सभी के लिए जो आपको जानेंगे।

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12 जून 2026, 15:48