मानव तस्करों से पोप : प्रायश्चित करें! ईश्वर का न्याय आपकी प्रतीक्षा में है
वाटिकन न्यूज
स्पेन, शुक्रवार, 12 जून 2026 (रेई) : एक पुरोहित एवं तीन आप्रवासियों का साक्ष्य सुनने के बाद पोप लियो 14वें ने तेरेरिफ के प्लाजा देल क्रिस्तो देला लगुना में आप्रवासियों और उनके एकीकरण के लिए काम करनेवाले संगठनों को अपना संदेश किया।
“दीवारों से रहित शहर”
पोप ने कहा, “इस धर्मप्रांत के मुख्यालय, सन क्रिस्टोबल दे ला लगुना में, आपके साथ इस पल को व्यतीत करना, मेरे लिए खुशी की बात है। इस शहर के बारे में जो कहा गया है, उससे मैं विस्मित हूँ: यह बिना दीवारों वाला, एक खुला शहर है।”
शायद यह बात हमें यह समझने में मदद कर सकती है कि जिन रुकावटों को तोड़ना सबसे मुश्किल होता, वे हमेशा पत्थर की नहीं होतीं। कभी-कभी वे हमारे नजरिए में, डर में या उदासीनता में होती हैं। इन द्वीपों को घेरे हुए यह समुद्र हमारे लिए ऐसी कहानियाँ लाता है जिनका मतलब हम अक्सर नहीं समझ पाते: दर्द की कहानियाँ, उम्मीदों की कहानियाँ और खोज की कहानियाँ। बिना दीवारोंवाले शहर में, दिल भी उन लोगों का स्वागत करने के लिए खुल जाता है जो इन कहानियों को अपने साथ लाते हैं। इसीलिए हमें सामीप्य की भाषा सीखने की जरूरत है, जिसे शब्दों से ज्यादा हाथों से समझा जाता है।
दूसरी तरह से देखने सीखना
ब्रेल (नेत्रहीन लोगों के लिए प्रयुक्त लिपि) और स्पर्श योग्य दूसरी तरह की लिखावट हमें याद दिलाती है कि शब्दों को छूकर भी पढ़ा जा सकता है। उसी तरह, जुड़ने के लिए एक अलग तरीके से पढ़ने सीखना होगा। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी नजरें देखती हैं, फिर भी पहचान नहीं पातीं; वे एक चेहरे को एक नंबर में, एक कहानी को एक दस्तावेज में और विविधता को दूरी में बदल देते हैं। इसलिए, सुसमाचार हमें असलियत को पढ़ने का एक गहरा तरीका सिखाता है: जो सामीप्य, धैर्य और मदद करने, साथ देने, मार्गदर्शन करने, सिखाने और रास्ते खोलने में साक्षम हाथों से शुरू होता है।
हमारे इन भाइयों और बहनों को जोड़ने की कोशिशों में — जैसा कि हर उदार कार्य में होता है — कलीसिया उन लोगों के असल जीवन में पढ़ना सीखती है जो शरीर या आत्मा से परेशान हैं, एक जीता-जागता चिन्ह जो पवित्र सुसमाचार की ओर इशारा करता है। जब हम दूसरों के जख्मों को महसूस करते हैं, तो यह स्पर्श करने और करीब आने से साफ हो जाता है। जैसे संत थॉमस ने जी उठे प्रभु के महिमामय शरीर के सामने देखा था, वैसे ही कलीसिया भी सीखती है कि विश्वास के लेंस से देखने पर, घाव पहचान की जगह बन जाते हैं। जहाँ मानवीय दुःख को प्यार से छुआ जाता है, वहाँ ख्रीस्त हमें यह सुनिश्चित करते हैं कि वे भूखे, प्यासे, नंगे, बीमार, कैदी और अजनबी में मौजूद हैं (मती. 25:35–40)। उस विश्वास से जो जीवित ख्रीस्त को पहचानता है, फादर डार्विन (जिन्होंने साक्ष्य दी) और कई दूसरे लोगों की सेवा शुरू होती है।
उदारता से बढ़कर
ख्रीस्तीय उदारता विश्वासी के दिल में डाले गए ईश्वर के प्यार से बहती है; इसी वजह से, जरूरतमंदों की मौजूदगी में, विश्वास मजबूत हो जाता है और ख्रीस्त के लिए प्यार कामों में बदल जाता है। इस यकीन से, हमारी उपस्थिति का मकसद इस बात का साक्ष्य देना है कि एकजुटता मानव प्रतिष्ठा को पहचानने से उत्पन्न होती है और यह सिर्फ दान या भलाई के काम से बढ़कर है। इसे एक प्रतिबद्धता कहा जाता है और इसे एक प्रक्रिया का रूप लेना चाहिए। स्वागत द्वार खोलता है; एकाकीकरण की दहलीज पार करने में मदद करता है। मदद घाव पर मरहम लगाती है, और एकीकरण भविष्य को फिर से बनाता है।
एकीकरण का मतलब यह नहीं है कि जो लोग आते हैं, उनका इतिहास मिटा दिया जाए या उनसे वह सब कुछ पीछे छोड़ने के लिए कहा जाए जो उनकी यादों का हिस्सा है। न ही इसका मतलब एक-दूसरे से अलग-थलग समानांतर दुनिया बनाना है, जहाँ लोग एक-दूसरे से मिले बिना साथ-साथ रहते हैं। एकीकरण एक आपसी यात्रा है: जो लोग आते हैं वे एक नई भूमि पर रहना सीखते हैं, और जो लोग उनका स्वागत करते हैं वे अपनी पहचान को कमजोर किए बिना या मुलाकात के लिए अपने दिल बंद किए बिना अपने घरों को बढ़ाना सीखते हैं।
संत पापा ने कहा, “प्यारे प्रवासी भाइयों और बहनों, आप इस यात्रा के एक नेक और जरूरी हिस्से हैं: उस समुदाय के प्रति भरोसे के साथ खुद को खोलें जो आपका स्वागत करता है, उसकी भाषा सीखें, उसके कानूनों का सम्मान करें, उसके रीति-रिवाजों को जानें, सामुदायिक जीवन में हिस्सा लें और कृतज्ञता के साथ अपना उपहार दें।”
संत पापा ने स्वागत करनेवाले और स्वागत किये जानेवाले दोनों के कर्तव्यों की याद दिलाते हुए कहा कि हर स्वागत करनेवाले समाज की आगंतुकों के प्रति जिम्मेदारियाँ होती हैं, वहीं जिनका स्वागत किया जाता है उनका सम्मान तब फलता-फूलता है जब यह एक फर्ज बनता है और दूसरों के साथ मिलकर निर्माण की सच्ची इच्छा बन जाता है। इस तरह, जो लोग अजनबी के रूप में आए थे, वे रिश्तों को फिर से पा सकते हैं, भरोसा फिर से बना सकते हैं और एक समुदाय का जीता-जागता हिस्सा महसूस कर सकते हैं। यह दया का एक अनमोल रूप है।
सिर्फ समस्याओं का हल कर देने से अधिक
पोप ने कहा, “हम सबसे बढ़कर, ईश्वर की छवि और प्रतिरूप में बनाए गए लोगों की बात कर रहे हैं, न कि कानूनी श्रेणियों या हल की जानेवाली समस्याओं की। मुश्किल सफर और कभी-कभी कई कोशिशों के बाद — जैसा कि खालिद के मामले में हुआ — वे किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करते हैं जो उन्हें शब्दों के बजाय कामों से बताए कि आपका जीवन व्यर्थ नहीं है; आपकी तकलीफें दिखाई नहीं देतीं; आपकी इज्जत उन पानी में नहीं बह गई है जिन्हें आपने पार किया है — जैसा कि एमबैक ने हमें बताया। इसके अवाले वे कुछ और भी ढूंढ रहे हैं: नए सिरे से शुरू करने, सीखने, काम करने, सेवा करने, हिस्सा लेने और हमेशा पीड़ितों की भूमिका में फंसे न रहने की एक ठोस संभावना।
इस बारे में, धर्माध्यक्ष एलॉय के शब्दों के माध्यम से एक ऐसी कलीसिया की गवाही के लिए पोप ने शुक्रिया अदा की, जो कम संसाधनों के साथ भी, "चलने वालों के साथ चलने" की कोशिश करती है। धर्मप्रांतीय कारितास, धर्मप्रांतीय आप्रवासन कार्यालय, पल्ली और कई कलीसियाई एवं नागरिक संगठन, तुरंत मदद देने के लिए आगे बढ़कर सुरक्षा, प्रोत्साहन और एकीकरण प्रक्रिया का समर्थन करते हैं। वे उन लोगों के लिए इसे संभव बनाते हैं, जो कभी साथ थे जैसा कि थालिया याद दिलाती हैं कि वे दूसरों के लिए एक पुल बनें, उस प्यार को लौटाएँ जो उन्हें मिला है। जब वे लोग जिन्हें कभी मदद की जरूरत थी, अपना हाथ बढ़ाना शुरू करते हैं, तो मिली मदद बदलकर जिम्मेदारी बन जाती है।
साथ ही, हम लैटिन अमेरिका, फिलीपींस और दुनिया के दूसरे हिस्सों से आए उन आप्रवासियों को नहीं भूल सकते जो समुदाय के जीवित हिस्से बन चुके हैं। अपने विश्वास, काम और उपहारों के माध्यम से, वे समुदाय को नवीनीकृत करने में मदद करते हैं। आप भी उनसे सुसमाचार सुनें, क्योंकि वे अपने साथ जरूर वे उपहार लाते हैं जिन्हें ईश्वर ने उन लोगों के द्वारा आपको भेजना चाहा है जो एकीकृत हो रहे हैं। वे हमें याद दिलाते हैं कि एकीकरण का मतलब है ऐसी जगह बनाना जहाँ एक व्यक्ति साझा जिम्मेदारी का एहसास कर सके। इस तरह, कल का अजनबी आज का भाई और पड़ोसी बन सकता है।
संत पापा ने कहा, “मैं कैथोलिक से कुछ और माँगना चाहूँगा: कि एकीकरण को एक सामाजिक काम तक सीमित न रखा जाए, चाहे वह कितना भी जरूरी क्यों न हो। जो लोग हमारे पल्लियों में आते हैं, उन्हें रोटी, रहने की जगह, भाषा में मदद, काम और सुरक्षा की जरूरत होती है। उन्हें एक ऐसा समुदाय मिले जो जीवन और वचन की गवाही के माध्यम से येसु ख्रीस्त को जानने का रास्ता दे सके, और साथ ही हर व्यक्ति के अंतःकरण और स्वतंत्रता का सम्मान करे। सुसमाचार प्रचार का मतलब है, सम्मान और विनम्रता के साथ उस खजाने को बाँटना जो हमारे काम और हमारी उम्मीद को बनाए रखता है। जो कलीसिया स्वागत करती है, वह ऐसी कलीसिया भी है जो मसीह को बिना थोपे, उसकी घोषणा करती है, उसे प्रस्तुत करती है और साथ ही, गरीबों के हाथों से सुसमाचार भी ग्रहण करती है।
दूसरे जहाज डूबने को रोकना
एक मानव चेतना, और उससे भी बढ़कर एक ख्रीस्तीय अंतःकरण, समुद्र के इन कब्रों, जहाज डूबने के शिकार लोगों और मदद की कमी के सामने उदासीन नहीं रह सकता। इन रास्तों पर खोया हर जीवन मानव परिवार के लिए एक नाकामी है। हालांकि, आने के बाद भी मौन रूप से जहाज का डूबना होता है: शहर में अकेले रह जाना, बिना किसी आवाज, बिना किसी रिश्ते, काम या सुरक्षा की भावना के, और उन लोगों के सामने जो कमजोरी का फायदा उठाते हैं। एक होने का मतलब है उस दूसरे जहाज डूबने को रोकना। इसका मतलब है उन लोगों की मदद करना जो घायल होकर पहुँचे हैं ताकि वे हमेशा अपने दर्द में फँसे न रहें, बल्कि अपने पैरों पर खड़े हो सकें, अपनी क्षमता को पहचान सकें और उन्हें समाज को दे सकें।
मानव तस्करों को चेतावनी
मानव तस्करी में लिप्त लोगों को चेतावनी देते हुए पोप ने कहा, “इस प्रांगण से, मैं उन लोगों को एक साफ संदेश देना चाहता हूँ जो लोगों की निराशा का फायदा उठाते हैं, जो मौत के रास्ते बनाते हैं, इंसानों की तस्करी करते हैं, दस्तावेज रोकते हैं, मजदूरों का शोषण करते, औरतों को धमकाते, परिवारों को धोखा देते और दूसरों की तकलीफ को धंधा बना लेते हैं। रूकें, प्रायश्चित करें (मती. 1:15)। इन भाई-बहनों के आँसू और खून ईश्वर को पुकारते हैं, और उनकी तकलीफ उनके पास पहुँचती है (उत्प. 4:10; उत्प 3:7–9)। गरीबों की दुर्बलता से छीना गया पैसा न तो शांति लाएगा, न सम्मान, न ही भविष्य।” (एजे 22:13; Job 5:1–6)।
भाइयो और बहनो, मानव जीवन का सौदा करनेवालों का डर, उदासीनता और हिंसा अंतिम फैसला नहीं होनी चाहिए। यह ख्रीस्त का काम है, जो अनजान लोगों को पहचानते हैं, मानव के ज़ख्मों का स्पर्श करते हैं और हमें हर उस भाई-बहन में उन्हें पहचानने के लिए कहते हैं जिनका स्वागत, सुरक्षा, समर्थन और जिनके साथ मेलजोल होना चाहिए।
ख्रीस्तीय प्रत्युत्तर
अंत में संत पापा ने एकीकरण में सहयोग करने वालों से कहा, “आइए हम अपनी नजरें उनकी ओर करें, उन लोगों से मुँह न मोड़ें जो परेशान हैं; हम प्रभु की ओर देखें ताकि हम अपने भाइयों और बहनों को उनकी नजरों से देखना सीखें।”
नाजरेथ का पवित्र परिवार, जिसे बालक येसु की जान बचाने के लिए मिस्र भागना पड़ा था (मती. 2:13–15), हर शरणार्थी परिवार, हर प्रवासी और हर इंसान के लिए हमेशा एक मिसाल और पनाहगाह बना रहे जिसे डर, जुल्म या जरूरत के कारण से अपना वतन छोड़ने हेतु मजबूर होना पड़ा (पोप पीयुस 12वें, प्रेरितिक संविधान एसुल फमिलिया)। पवित्र परिवार के सदस्य आपकी सेवा को बनाए रखें और इस भूमि को एक ऐसी जगह बनाएँ जहाँ हर कोई एक-दूसरे को भाई-बहन के रूप में पहचाने और उनके साथ अच्छा बर्ताव करे। ईश्वर आप सभी को आशीर्वाद दें। बहुत-बहुत धन्यवाद।
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