खोज

देवदूत प्रार्थना : ईश्वर की कृपा को मुफ्त में दिया और बांटा जाना चाहिए

रविवार को देवदूत प्रार्थना में, पोप लियो 14वें ने ईश्वर की कृपा की प्रचुरता और हर ख्रीस्तीय के मिशन को याद किया कि मसीह की क्षमाशीलता को सभी लोगों के साथ साझा करना है।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार, 15 जून 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में रविवार 14 जून को संत पापा लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया।

दिन के सुसमाचार (मत्ती 9:36-10:8) पर चितंन करते हुए, पोप ने येसु की नजर को याद किया, जो “परेशान और असहाय भीड़” को देखते और उनपर दया करते हैं।

पोप ने कहा, “आज का सुसमाचार पाठ हमारे लिए एक बड़ा उपहार लाता है, क्योंकि यह उन लोगों को शामिल करता है जो इसे येसु की नजर से सुनते हैं: यह एक ऐसी घटना है जो इस नजर के ध्यान की गवाही देती है, साथ ही हमें बताती है कि प्रभु क्या देखते हैं। हम पढ़ते हैं, कि जब येसु ने भीड़ को देखा, तो उन्हें उन पर तरस आया, क्योंकि वे परेशान और लाचार थे।” (पद 36)। हमारे भाई बनकर, ईश्वर के पुत्र लोगों को देखते हैं, वे मानव को देखते हैं: उस जुल्म को जो बोझ डालता, और उस हिंसा को जो शक्ति को कमजोर करती है। वे युद्ध के जख्मों और उपभोक्तावाद के खालीपन को देखते हैं। नकाबों में सिमटे चेहरों को देखते हैं, बुराई से टूटे परिवारों, और झूठे आदर्शों से गुमराह युवाओं को। येसु देखते हैं और प्यार करते हैं। वे हमारे लिए और हमारे साथ प्यार करते हैं और दुःख उठाते हैं: उनकी तरस न केवल भाईचारे की नजदीकी दिखाती, बल्कि छुटकारा पाने की उनकी इच्छा को भी व्यक्त करती है।

संत पापा ने कहा, “क्योंकि वे हमारे हृदय जानते और उसकी देखभाल करते हैं। बहुत सारे लोगों को “बिना चरवाहे की भेड़ों” (पद 36) की तरह देखते हुए, येसु खुद को भले चरवाहे के रूप में सबके लिए समर्पित करते हैं और फसल के मालिक के रूप में, दुनिया के खेतों में काम करनेवालों को भेजते हैं (पद 38)। उनका काम क्या है? उन्हें दुःख में पड़े लोगों को ईश्वर का आराम देना चाहिए, जहाँ दुःख है वहाँ दया दिखानी चाहिए, जहाँ तकलीफ है वहाँ उम्मीद जगानी चाहिए, जहाँ भरोसा नहीं है वहाँ विश्वास दिखाना चाहिए।

सुसमाचार पाठ प्रथम बारह शिष्यों के नाम की सूची प्रस्तुत करता है: वे चेले हैं जिन्हें प्रेरित बनाया गया, यानी मिशनरी और प्रचारक। उनमें से, सबसे पहले सिमोन का नाम आता है, जिन्हें पेत्रुस कहा जाता है। लेकिन हमें अंत में यूदा इस्करियोती का नाम भी मिलता है, जो हमें याद दिलाता है कि येसु के पीछे कोई भी चल सकता है और उन्हें धोखा दे सकता है। फिर भी, सुसमाचार पाठ सभी के लिए एक जीवित और सच्चा वचन बना हुआ है। सदियों पार करने वाला सुसमाचार एक ही है, “स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है!” (मती. 10:7)।

संत पापा ने कहा कि यह सचमुच पास है क्योंकि येसु ख्रीस्त में, ईश्वर हर पुरूष और महिला, हर आबादी और देश के पास आते हैं। जब इस सुसमाचार की घोषणा की जाती है और इसे जिया जाता है, तो बुराई एक बीमारी की तरह खत्म हो जाती है (8), जैसे रात सुबह में बदल जाती है, जैसे मृत्यु पर पुनर्जीवित ख्रीस्त ने जीत हासिल कर ली है।

इस तरह येसु की नजर वास्तविकता को बदल देती है। प्यार से भरी उनकी पहल नये लोगों, को कलीसिया में जन्म देती है, जिसे प्रेरितों के मिशन को जारी रखने के लिए बुलाया गया है: “तुम्हें मुफ्त में मिला है; मुफ्त में दे दो” (पद 8)। येसु का वरदान पूरी तरह से मुफ्त है, क्योंकि इसकी कीमत हर माप से ज्यादा है: इसे पाना या “खरीदना” नामुमकिन है। यह कृपा ईश्वर की दया का सुंदर नाम है, जो हमें जहाँ कहीं भी हो, ढूँढ़ती है, ताकि हमें अपनी ओर खींचे। इसलिए येसु कहते हैं, “इसलिए, फसल के मालिक से विनती करो कि वह अपनी फसल काटने के लिए मजदूर भेजे।” (मत्ती 9:38)

संत पापा ने कहा, “प्यारे मित्रो, सुसमाचार प्रचार का काम ईश्वर के वरदान से आता है, जो मसीह में दुनिया के लिए माफी, कमजोर और गरीब लोगों की सेवा एवं न्याय के प्रति समर्पण बन जाता है।” अतः संत पापा ने कुँवारी मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, “आइए, हम कृपा से पूर्ण कुँवारी मरियम की मदद माँगें, ताकि हम खुशी और हिम्मत के साथ उस मिशन का प्रत्युत्तर दे सकें जिसके लिए येसु हमें बुलाते हैं।”

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here.

15 जून 2026, 16:14