संत पापा युवाओं के संग मैड्रिड में संत पापा युवाओं के संग मैड्रिड में   (ANSA)

संत पापा लियोः इतिहास को प्रेम से बदलें

संत पापा लियो 14वें ने स्पेन की प्रेरितिक यात्रा के प्रथम पड़ाव के अंतिम चरण में युवाओं के संग जागरण प्रार्थना में भाग लिया और उन्हें अपने संदेश में पृथ्वी का नामक और दुनिया की ज्योति बनने का आहृवान किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने स्पेन की प्रेरितिक यात्रा के प्रथम पड़ाव में युवाओं के संग, मैड्रिड के लीमा प्रांगण में जागरण प्रार्थना में भाग लिया।

संत पापा लियो ने युवाओं को किये गये अपने संबोधन में उनके द्वारा पूछे गये छः सवालों का व्यक्तिगत जबाव दिया।

1. हम जानते हैं कि संत अगुस्टीन आप के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, उनके अलावे और कौन दूसरे संतों और आदर्शों ने आप को एक ख्रीस्तीय स्वरूप बढ़ने हेतु मदद किया है?

2. संत पापा को युवाओं की ओर दूसरा प्रश्न पूछा गया, “पेरू में एक प्रेरित के रूप में आप किन-किन बातों को यादगारी या अनुभव की तरह संजोकर रखते हैं?

संत पापा लियो ने अपने पुरोहिताई प्रशिक्षण और प्रेरिताई के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि मैंने अपनी पवित्रता के लिए बहुत से आदर्शों को पाया जो अब तक मेरे संग मेरी यात्रा में चलते हैं। मेरे लिए विशेष कर तीन संतगण हैं जिनकी याद मैं करता हूँ।

उन्होंने कहा कि प्रथम संत, संत जोन क्रिस्सोसत्म हैं जिसका अर्थ “सुनैला मुख” है जिन्होंने अपनी वाक्पटुता के कारण कलीसिया में आचार्य की प्रसिद्धि पाई। अपने बपतिस्मा के पहले, जो 368 ई. में हुई उन्होंने दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया। उन्होंने बाद में, अंतोखिया के दूसरे युवाओं के संग अपने को पवित्र धर्मग्रंथ के अनुवाद में समर्पित किया, जहाँ उनका जन्म हुआ था। एक मठवासी के रुप में जीवनयापन करते हुए उन्होंने एक पुरोहित और धर्माध्यक्ष के रुप में कलीसिया की सेवा करने का चुनाव किया। अपने हृदय में ईश्वर के वचन को वहन करते हुए उन्होंने उसे हरएक के संग साझा किया और धर्मविधर्मिता की स्थिति में सुसमाचार की सच्चाई का साक्ष्य देते हुए उसका सामना किया। संत पापा ने कहा, “मैं विशेषकर उसकी शानदार धर्मशिक्षाओं से अपने को प्रभावित पाता हूँ जिसमें सत्य के लिए प्रेम और एक निष्ठामय जीवन का समिश्रण है।

युवाओं के बीच संत पापा लियो
युवाओं के बीच संत पापा लियो

उन्होंने कहा कि दूसरे संत विल्लानूवोभा के संत थोमस हैं, एक अगुस्टीनियन धर्मसमाजी जो कलीसिया के चरवाहे होने हेतु बुलाये गये। वे एक स्पानी थे। उन्होंने अल्कला के महाविद्यालय में अध्ययन किया और अपनी विद्वत्ता के कारण उन्हें सम्राट चार्ल्स पांचवें का सम्मान प्राप्त हुआ। वालेंसिया के धर्माध्यक्ष स्वरुप, उन्होंने कलीसिया के अंदर एक गहरी नवनीकरण की पहल की, विशेषकर याजकों के मध्य, उन्होंने अपने पुरोहित भाइयों को प्रार्थना, शुद्धता और आज्ञाकारिता में सुदृढ़ बने रहने का आहृवान किया। उनकी दयालुता मुश्किल के समय मेरे लिए हिम्मत का स्रोत बना है।

संत पापा लियो ने कहा कि मेरी जीवन यात्रा में तीसरे मेरे मित्र संत तोरिबियुस दे मोग्रोवेजो रहे वे भी एक स्पानी थे। उन्होंने 16वीं सदी में पेरू में प्रेरित के रुप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने बड़े उत्साह के संग, स्थानीय भाषों का अध्ययन करते हुए, मूलवासियों के बीच सुसमाचार का प्रचार किया। संत तोरिबियुस ने गहरी प्रार्थना के साथ न्याय ने लिए अपने को समर्पित किया खासकर अपने समय के शोषण और भ्रष्टचार के विरूद्ध। इसी कारण वे मेरे लिए, एक लोगों हेतु, एक समर्पित आदर्श स्वरूप हैं, येसु के नाम पर विशेषकर गरीबों के लिए।

संत पापा लीमा के प्रांगण में, मैड्रिड
संत पापा लीमा के प्रांगण में, मैड्रिड   (AFP or licensors)

संत पापा लियो ने कहा कि इन संतों के जीवन पर चिंतन करना, जैसे संत अगुस्टीन कहते हैं, जैसे मैं भी कहता हूँ यदि वे कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं? आप सभों के लिए एक अच्छे जीवन का चुनाव करने के लिए निमंत्रण देते हुए, जो आप को और दूसरों को प्रेरित करता है, इन सवालों के संग साझा करने में मुझे खुशी हो रही है।

संत पापा ने पेरू में अपनी प्रेरिताई और एक धर्माध्यक्ष के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि मैं लोगों के विश्वास के साक्ष्य की याद करता हूँ- एक विश्वास जिसमें बहुत सारी कठिनाइयाँ हैं फिर भी यह आशा से भरी है। लोगों से विशेषकर उनकी कठिनाइयों और खुशी से मिलन ने मुझे अपने जीवन की यात्रा में बढ़ते हुए येसु का अनुसरण करने में मदद किया। सुसमाचार की घोषणा करते हुए, मैं भी उसके द्वारा परिवर्तित हुआ, यह अनुभव करते हुए कि कैसे ईश्वर का वचन संघर्ष भरे परिस्थितियों में शांति लाता है, जहाँ हममें से हरएक जन मेल-मिलाप और न्याय का माध्यम बनते हैं।

संत पापा और युवाओं का प्रतिनिध दल
संत पापा और युवाओं का प्रतिनिध दल   (ANSA)

आप क्या सोचते हैं कि बहुत सारी आवाजों के बीच हमें क्या ईश्वर की आवाज को पहचाने में मदद करेगा?

हम कैसे, जैसे जो अपने को खोजते हैं, दूसरों की यात्रा में उन्हें विश्वास की सुन्दरता को खोजने में मदद कर सकते हैं?

शांति की खोज

इस सवाल के उत्तर में संत पापा लियो ने कहा कि ईश्वर की आवाज को पहचानने में, शांति हमें सबसे अधिक मदद करती है, जहाँ हम ध्यान करते हुए अपने को केन्द्रित कर सकते हैं। हम सभी शांति की खोज करते हैं, हमें क्या नहीं सुनना है उसका चुनाव करते, और कौन-सा शोर जो हमें विचलित नहीं करता उसे देखते हैं। अपने को हजारों शोर-शराबे से मुक्त रखते हुए, हम यह पहचानते हैं कि कुछ हमें गलत चाहतों की ओर ले चलते हैं, दूसरे बिना कुछ दिये हमारा शोषण करते हैं, और वहीं कुछ अपने स्वार्थ के बारे में बातें करते हैं। शांति में हम इस बात को समझते हैं कि आदर्शे खत्म हो जाती हैं सिर्फ सच्चाई सदैव बनी रहती है।

ईश्वर की आवाज

दूसरी बात संत पापा ने कहा कि आप इस बात से सुनिश्चित हों कि ईश्वर आप की आवाज को पहचानते हैं, वे आप को सुनते और जबाव देते हैं। आप अपने हृदय में जो अनुभव करते हैं उसे व्यक्त करें। एक स्त्रोत है जो हमें कहता है, क्या जिसने कान दिये हैं, वह नहीं सुनेगा? (स्तो.94.9) हमारी आंतरिक वार्ता हमारी प्रार्थना, प्रशंसा और निवेदन बनती है जब हम उसे उनकी ओर उन्मुख करते हैं जो उन्हें सुन सकते हैं। प्रार्थना हमारे लिए स्वतंत्र आवाज है इसी कारण से वह अपने को साबित करने की कोशिश नहीं करता है, अपने को दिखाने कि हम तैयार हैं या अपनी महत्वपूर्णत को घोषित नहीं करना है। जब हम स्वयं प्रार्थना बन जाते हैं तो येसु अपने वचन से हमें उत्तर देते हैं, जो हमारे लिए मानव बनें, इस बात को प्रकट करते हुए कि वे हमें अपने सारे रूपों में प्रेम करते हैं।

मैड्रिड में युवागण
मैड्रिड में युवागण   (AFP or licensors)

ईश वचनों को सुनें

तीसरा, ईश्वर को पहचानने के लिए, हमें उनके जीवित वचनों को सुनने की आवश्यकता है, येसु ख्रीस्त जिनकी आवाज निरंतर कलीसिया में गूंजती रहती है, उनके शरीर के रूप में। उनमें संहिता की परिपूर्णत है, नये और पुराने विधान को हम मानवता के लिए मुक्ति की एक प्रतिज्ञा के स्वरूप दिया गया पाते हैं। यूख्रारीस्त की आराधना, जिसे हम आज की संध्या करते हैं, शांति का एक श्रेष्ठ स्थान है, हमारे हृदयों को खोलने का, और स्वयं अपने को येसु की उपस्थिति में लाने का, उनसे प्रेम और बातें करने का, जो सारी मानवता के लिए पोषण स्वरुप अपने को परिवर्तित किया है, जो श्रेष्टता में हमसे बातें करते हैं।

विश्वास की सुंदरता खोजें

और आगे, प्रिय युवाओं, जैसे आप दूसरों को विश्वास की सुंदरता खोजने में मदद करते हैं, आप याद रखें हममें से कोई शिक्षक की भांति जन्म नहीं लिया है, और ईश्वर के सामने हम सभी उनके शिष्यगण हैं। अतः आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा को दूसरों के संग, अपने सच्चे जीवन के द्वारा साक्ष्य दें- येसु का अनुसरण करने का निर्णय निरंतर आप को नवीन बनायेगा, विशेषकर चिंतामय स्थितियों में। वे हमारे गति के संग चलते हैं और हमारा मार्ग ज्योर्तिमय करते हैं। आप स्वामी के मार्ग का अनुसरण करें- इस भांति मैं आप को चरवाहों, शिक्षकों और मित्रों की तरह कार्य करने का निमंत्रण देता हूँ। यदि आप प्रेम से प्रार्थना करते हैं तो युवाजन प्रार्थना की महत्वपूर्ण को पहचानेंगे। यदि आप का विश्वास आप के अंदर ज्वलित है, तो आप उस जीवित आग को दूसरों के लिए प्रदान करेंगे। यदि आप अपनी बुलाहट के प्रति निष्ठावान बने रहते हैं, तो आप कृपा की सुन्दरता को प्रतिबिंबित करेंगे। अतः आत्मापरीक्षण करने की शिक्षा दें, इस बात का ध्यान रखते हुए कि हर क्षण ध्यान में सुनने से, वार्ता बनती है जो दूसरों को दिया जाता है। उत्साही दंपत्तियों और माता-पिता, विवेकी पुरोहितों, समर्पित नर और नारियों का चेहरा जो ईश्वर को अर्पित अपने पड़ोसियों की सेवा करते हैं एक विचार के कारण नहीं चमकते हैं, लेकिन पवित्र जीवन के कारण जिसकी कोशिश की गई है और जिसका स्वाद लिया गया है। येसु की निकट उपस्थिति को हम अपनी असफलतों में भी अनुभव करते हैं, जब हम अपने हाथों और आलिंगन को अपनी यात्रा में दूसरों की मदद के लिए प्रसारित करते हैं।

पवित्र यूख्रारीस्त की आराधना
पवित्र यूख्रारीस्त की आराधना   (AFP or licensors)

5. हम कैसे समर्पित ख्रीस्तीयों के रूप में आज के समाज में जीवन जी सकते हैं?

6. युवाओं के रूप में आप हमें कलीसिया में कौन-सा विशेष प्रेरितिक कार्य वहन करने को कहते हैं?

युवाओं की प्रेरिताई

सदियों से पूरी कलीसिया के इतिहास में, हम ख्रीस्तीयों ने सभी तरह के समाजों में जीवनयापन किया है, संस्कृतियों में परिवर्तन के समय आगे बढ़ते हुए हमने उनका साक्षा दिया और उन्हें स्थापित करने में मदद किया है। एक प्राचीन पद, दोनियेतुस का पत्र हम इस संबंध में एक सुन्दर विचार से अवगत करता है, “दुनिया के लिए ख्रीस्त वही हैं जो शरीर के लिए आत्मा है।” यह हमारे जीवन जीने का तरीका है- येसु के शिष्यगण सदैव वर्तमान समय के लोग हैं, वे अतीत के गुलाम कभी नहीं हैं। हम येसु ख्रीस्त में स्वतंत्र हैं। हम प्रेम के प्रति कृतज्ञ हैं, हम ज़बरदस्ती और धोखा से मुक्त हैं। हम क्षणभंगुर चीजों से स्वतंत्र हैं क्योंकि हम सत्य के शिष्य, भविष्य के लिए खुले हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि मृत्यु हमारी प्रतीक्षा नहीं करती है। इसके विपरीत, इतिहास की पूरिपूर्णत अनंत जीवन में होती है, जिसे ईश्वर हम सभों के लिए तैयार करते हैं। इस परिदृश्य में, आप युवागण समाज को एक नई दिशा में लेने के लिए बुलाये जाते हैं, आप जो जीवन घर, महाविद्यालय और कार्यस्थल में जीते हैं, अपने प्रति दिन के संबंधों द्वारा आप मुख्य रुप से जीवन में परिवर्तन लाने की मुख्य कड़ी बनते हैं। संत पापा ने कहा कि आप को जोश से भरा देख, जो विश्वास से आता है, मेरी आशा बृहृद है कि आप दुनिया में ख्रीस्त का साक्ष्य देने के योग्य होंगे, जिसमें डिजिटल दुनिया भी शामिल है-आप सुसमाचार के गुणों और सुन्दरता को प्रसारित कर सकेंगे।

संत पापा लियो का युवाओं को संदेश

नमक और ज्योति बनें

संत पापा ने कहा कि अतः मैं आप सभों को निमंत्रण देता हूँ, कि आप पृथ्वी के लिए नमक और दुनिया की ज्योति बनें। (मत्ती.5.13) ऐसा होने के लिए आप को आज की दुनिया को समझने और विवेक में जीने की आवश्यकता है, जिससे आप इसे सुसमाचार के साक्ष्यों से बदल सकें। एक युवा ख्रीस्तीय, वास्तव में, खुशी और परीक्षा जीवन की दोनों परिस्थितियों में ज्योति का स्रोत है, जो एक व्यक्ति के रुप में जीवन के अंदर से निकलने वाली सच्ची खुशी को प्रकट करता है, धन की ओर देखे बिना, खुशी या शक्ति हासिल की चाह रखे बिना। हमारी स्वतंत्रता ऐसी है, जिसका उद्यम हमारे लिए विश्वास है। इसमें हम ज्योति और समाज के लिए स्वाद लाने की योग्यता को पाते हैं जिसका अनुभव हर मानव करता है। वहीं दूसरी ओर, जब जीवन में स्वाद खत्म हो जाता है मानो यह हमसे छीन लिया गया हो, तो हम इसे अपना होने का अनुभव नहीं करते हैं। उदासीनता के खालीपन और अनुपालन की स्थिति में, युद्ध और झूठ की हिंसा के सामने, आपको एक नई मानवता की चिंगारी बनना होगा।

युवाओं की भक्ति
युवाओं की भक्ति

मानवीय बनें

संत पापा ने कहा कि यह विशेष प्रेरिताई मैं आप को सौंपता हूँ, आप मानवीय बनें। हाँ, आप मानवीय हों- रक्त और मांस के नर और नारियाँ। न केवल देखने में बल्कि विश्वासनीय चेहरे। लोग न्याय की चाह रखते हैं क्योंकि वे इसके भूखे हैं। लोगों ईमानदारी और सत्यनिष्ठ जीवन की चाह रखते हैं क्योंकि वे खुशी से दूसरों के लिए वह करते हैं जिसे वे दूसरों के द्वारा अपने लिए किये जाने की चाह रखते हैं। आप येसु की तरह मानवीय बनें, एक श्रेष्ठ व्यक्ति, जो मृतकों में से जी उठकर हमारे संग जीवन साझा करते हैं। इस प्रेरिताई को करने में, आप प्रेरितों की ओर देखें, प्रथम ख्रीस्तीयों की ओर जिन्होंने गैर-ख्रीस्तीयों की दुनिया में जीवनयापन किया। उनके उदाहरणों का अनुसरण करते हुए, आप भौतिक और आध्यात्मिक गरीबी के हमारे समय में सुसमाचार के प्रेरित बनें, इस चेतना में हमारा विश्वास जीवन का एक मार्ग है जिसे करूणा में जीने की आवश्यकता है (गलि.5.6)। यह, प्रिय युवाओं, वह गुण है जो इतिहास को पूरी तरह परिवर्तित करेगा।

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07 जून 2026, 13:24