संत पापा-मैड्रिड में अतिसंवेदशीलों से भेंट
वाटिकन सिटी
संत पापा लियो 14वें ने स्पेन की अपनी प्रेरितिक यात्रा के पहले पड़ाव पर सामाजिक परियोजना, “ सेदिया 24 होरास” के कर्मियों और लाभार्थियों से भेंट की।
संत पापा उन्हें संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाइयों एव बहनों यहाँ मैड्रिड की अपनी यात्रा शुरू करते हुए मुझे आपार खुशी का अनुभव हो रहा है। धर्माध्यक्षय ने जिस भांति कहा कि जो कोई मैड्रिड में है वह मैड्रिड से है। अतः मैं भी यहाँ मैड्रिडवासी की तरह हूँ। आप सभों के स्वागत के लिए धन्यवाद जो मुझे इस बृहृद शानदार परिवार का अंग बनाता है, जैसे कि सभी परिवारों में हम प्रेम के चमत्कार को पाते हैं।
संत पापा लियो ने कहा कि यह विशेषकर इस घर की सच्चाई है, जहाँ कोई भी अकेला नहीं रहता है। यहाँ हर व्यक्ति की खुशी और उदासी सभों की खुशी और उदासी बनती है। एक दूसरे को सुनते हुए, हम चुनौतियों का सामना एक साथ करते हैं, जटिल परिस्थितियों को नजरअदांज किये बिना और कभी-कभी करूणा और न्याय की माँगों को अनदेखा किये बिना, “वार्ता के परिवेश में उन लोगों के संग जो मानवता और दुनिया की विशेष चिंता करते हैं, हम निवास करते हैं।” इस भांति सेदिया सुसमाचार में निहित येसु ख्रीस्त के मार्ग का अनुसार करता है, ईश्वर का पुत्र जो मानव बना केवल हमें बीमारियों से चंगाई प्रदान नहीं करते- बल्कि हमें अपना बनने के लिए- सिवाय पाप के- वे हमारी तरह कमजोरी में जीवन जीते और हममें से हरएक के दुःखों का अंग बनते हैं, यह घोषित करते हुए, “जैसे तुमने इसे सबसे छोटों में से किसी एक के लिए किया जो मेरे परिवार के सदस्य हैं, तुमने मेरे लिए किया।” (मत्ती.25.40)।
इस अर्थ में हम गीतों के बोल को समझ सकते हैं जिसे हमने अभी सुना है, “हर सपने में मैंने तुझे खोजा, और कुछ व्यर्थ नहीं गया।” वे हमारे लिए साक्ष्यों और हमारे कार्यों को सुन्दर ढ़ंग से संक्षेपित करते हैं जिसे हम रोज दिन अपने जीवन में पूरा करते हैं।
एक सपना एक खुला द्वार
वास्तव में, एक सपना और एक छोटा खुले द्वार के लिए धन्यवाद- अपने में छोटा लेकिन करूणा में बृहृद है, जैसे की धर्माध्यक्ष ने कहा- नियूरका ने आरेस और अतेनिया को जीवन दिया है, उनका मातृत्वमय प्रेम, बपतिस्मा की कृपा और खुशी भरे एक भविष्य की प्रतिज्ञा है।
एक सपना और उसी छोटे से दरवाज़े की वजह से, खादरी ने महामारी की अंधेरी सुरंग और अनिश्चितताओं से भरे सफ़र को पार किया। उन लोगों की मदद से, जिन्होंने यह प्रकट किया कि वे उसकी परवाह करते हैं और उस पर विश्वास करते हैं, उनकी मदद से उसे एक नौकरी मिली और उससे भी बढ़कर, न केवल आगे बढ़ने की चाह बल्कि दूसरों को मदद करने की भी चाह, जैसे दूसरों ने उसकी मदद की है।
संत पापा लियो ने आलीसिया और दूसरे स्वयंसेवियों को, आशा की परियोजना हेतु कृतज्ञता के भाव प्रकट किये जिसके द्वारा बहुत से नारियों को एक नये जीवन की शुरूआत हेतु मदद मिली जिसके फलस्वरुप उन्होंने पुनः अपनेे लिए सम्मान, स्वंतत्रता, आशा और मानवीय जीवन के पवित्र मूल्यों को स्थापित पाया।
प्रतीकों में संदेश
उन्होंने कहा कि जिन प्रतीकों को आप ने मुझे दिया है वे हरएक के संदेश हैं। फीता जिनमें बच्चों के नाम अंकित हैं दुनिया में जन्म की खुशी को व्यक्त करता है। निवास स्थल की अनुमति हमें प्रयास और उससे भी बढ़कर निष्ठा, ईमानदारी और स्वागत किये के बारे में कहती है। जूता, जो हमें मूस्सा का होरेब पर्वत में ईश्वर से मिलन की याद दिलाती है, हमें उस पवित्र भूमि के बारे में कहती है जिसमें हम मानव जीवन के लिए सम्मान की जरूरत को पाते हैं।
संत पापा ने दर्द की अनुभूतियों को साझा करने हेतु सभों के प्रति कृतज्ञता के भाव प्रकट किये जो ज्योति से भरे हैं और जो दर्पणों की तरह ईश्वर के प्रेम को प्रतिबिंबित करते हैं।
साक्ष्य क्षितिज की खिड़की
उन्होंने कहा कि आप का साक्ष्य विस्तृत क्षितिज हेतु एक खुली खिड़की खोलती है, जो नियूरका जैसी असंख्या माताओं, आरेस और अतेनिया जैसे युवक और युवातियों, खादरी और आलीसिया जैसी स्वयंसेवियों से भरी है- यहाँ बहुत से लोगों हैं जो हमारे भाई-बहनों की कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ इतनी सारी हैं कि संत योहन कहते हैं, “यदि एक-एक कर उनका वर्णन किया जाये तो मैं समझता हूँ कि जो पुस्तकें लिखी जातीं वे संसार भर में भी नहीं समा पातीं। सुसमाचार से यह तुलना अपने में जबदस्ती नहीं है, जिन कार्यों को येसु के किया, जिसकी चर्चा सुसमाचार लेखक करते हैं, वे घटनाएँ अब भी जारी हैं।
बेतलेहम का मार्ग हमें स्वर्ग की ओर ले चलता है, धर्माध्यक्ष के इन वचनों को उदृधृत करते हुए संत पापा लियो ने कहा कि मैंड्रिड भी ख्रीस्त जयंती के दृश्यों को जन्म पर्व के दौरान सजाने के लिए प्रसिद्ध है। उनकी सुन्दरता, यद्यपि उससे भी बड़ी और गहरे आश्चर्य की झलक है, जो हमें आज यहाँ देखने को मिलती है। दीये, स्वर और संगीत जो हमारे हृदयों का स्पर्श करते और ख्रीस्त जयंती के दौरान हमारी आँखों में आंसू लाते हैं, उन्हें हम अपने अंदर, अपने में और हमारे संग साल भर वहन करते हैं। आज वे पुनः इस जगह अपने में सजीव और चमकदार हो गये हैं, यह सरल और स्वागत करने वाला ख्रीस्त जयंती दृश्य, जिसे ईश्वर की सहायता से, जिसे आप रोज दिन- या दिन-रात येसु के लिए तैयार करते हैं, जो उन लोगों में उपस्थिति रहते हैं जो मदद की खोज करते हुए आपके द्वार आते हैं।
वे शब्द जिसे येसु ने अपने शिष्यों से कहा इस प्रेरितिक यात्रा की विषयवस्तु स्वरूप चुने गये हैं- “अपनी चारों ओर देखो” (यो.4.35)।
जरूरतमंदों के प्रति हमारा उत्तरदायित्व
इन शब्दों के द्वारा हम खेतों पर चिंतन करने हेतु आमंत्रित किये जाते हैं, जो अब पक गये हैं, कटनी की प्रतीक्षा में हैं, और वे हमें इस बात की याद दिलाते हैं कि करूणा में इतनी देर नहीं होती है। यदि पके हुए गेहूँ की फलस को काटा नहीं जाता तो फसल नष्ट हो जाती है। यह जरुरतमंद लोगों के लिए हमारे उत्तरदायित्वों को व्यक्त करता है। यह एक उत्तरदायित्व है जो हमारे हर मिलन को पवित्र, अद्वितीय और प्रेम में अपरिहार्य कृपा का क्षण बनाता है, जिसे हम न खोये या आगे न ढ़केलें। ईश्वर का प्रेम हमें अपने भाई-बहनों की ओर बढ़ने को प्रेरित करता है, और प्रेम तथा सेवा में जिस भांति हम तीव्रता में प्रत्युत्तर देते हैं वह हमारे विश्वास का साक्ष्य प्रस्तुत करता है।
गरीबों की अवहेलना न करें
संत पापा ने कहा कि यदि हम इसके बारे में ध्यान से सोचें, वास्तव में, “ख्रीस्तीय भी, विभिन्न परिस्थितियों में दुनियावी सोच या राजनीतिक और अर्थव्यवस्था के आदर्शों का शिकार हो गये हैं जो हमें घटनाओं को सामान्य और गलत नाजरिये से देखने को अग्रसर करते हैं। सच्चाई यह है कि कुछ लोग करूणा के कार्यों को अपने से दूर या उनकी अवहेलना करते हैं मानो वे कुछेक लोगों के जुनून हों और कलीसिया की प्रेरितिक ज्वलंत हृदय का अंग नहीं। यह हमें सुसमाचार को पुनः पढ़ने के लिए विश्वस्त करता है जिससे हम दुनियावी ज्ञान से स्थानांतरित होने की जोखिम में न पड़ें। यदि हम कलीसियाई जीवन के अंदर रहने की चाह रखते जिसके फल सुसमाचार से हर समय और हर पल उत्पन्न होते हैं तो हम गरीबों की अवहेलना नहीं कर सकते हैं।
अच्छाई में स्वतंत्रता और मजबूती
संत पापा ने कहा कि येसु का शब्द हमारे लिए निमंत्रण है जो हमारे हृदयों को दूसरों की जरुरत से संवेदनशील होने का आहृवान करता है, (स्तो.112.1-9) वे हमारे अंदर अच्छाई करने की चाह को सजीव बनाये रखते हैं जिसे ईश्वर ने हमारी मानवता में स्थापित किया है और वह विश्वास हमें स्वतंत्र और मजबूत बनाता है। संत पापा फ्रांसिस ने इस संदर्भ में कहा, “जीवन के रहस्य और समाज की चुनौतियों के सामने विश्वास करने वाले अपने लिए एक जोश, एक जुनून, एक सपना, एक चाह को पाते हैं जो उन्हें अपने को व्यक्तिगत रुप में समर्पित करने को प्रेरित करता है” (प्रवचन मारसेल, 23 सितम्बर 2023)। वे हमें “निराश, ठंढे हृदय, शांत जीवन से आदी होने के खतरे से सतर्क करते हैं जो उदासीनता और अभेद्य होने से बंद होने का खतरा लाती है।” एक सजीव हृदय अपने में गर्म और धड़कने वाला होता है और यह जीवन प्रदान करता है। एक ठंढा हृदय गतिहीन है, जहाँ रक्त का प्रवाह नहीं होता और जो मृत्यु की ओर अग्रसर करता है।
दान के भाव
संत पापा ने कहा कि मैं ईश्वर के अंतिम निमंत्रण की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा- यह हमें दुःख सहने वालों की आंखों में झांककर देखना और उनकी सहायता करना है। उससे भी बढ़कर अपने भाई-बहनों से मिलन जो पिता के आलिंगन में संयुक्त हैं। संत पापा फ्रांसिस ने इस बिन्दु पर बहुत अधिक जोर दिया। उन्होंने कहा, “जब तुम दान देते हो, क्या तुम भिक्षु की आँखों में देखते होॽ क्या तुम उसके हाथ का स्पर्श करते होॽ” इस भांति वे कहते हैं कि “दान देना हितकारी कार्य मात्र नहीं है। व्यक्ति जो दान देता है वह अपने लिए अधिक कृपा को प्राप्त करता है, क्योंकि वह अपने को ईश्वर की निगाहों में दृश्मान बनाता है”। वे जो सही अर्थ में प्रेम करते हैं वे दान देने से अधिक करते हैं- वे सुनते, अपने को उनके संग संयुक्त करते, वे समझने की कोशिश करते और कठिन परिस्थितियों और कारणों का समाधान करने का प्रयास करते हैं। वे अपने को केवल भौतिक चीजों तक ही सीमित नहीं करते बल्कि आध्यात्मिक चीजों की चिंता करते हैं, वे व्यक्तियों के सामग्र विकास हेतु कार्य करते हैं।” (संत पापा फ्रांसिस, संदेश 7वाँ विश्व दरिद्रता दिवस, 13 जून 2023)
अपने संबोधन के अंत में संत पापा लियो ने माता मरियम की ओर निगाहें फेरने का आग्रह किया जो प्रेम से काना के विवाह में निवेदन करती हैं, “हम उनमें येसु ख्रीस्त के कदमों का अनुसरण करें, जो अंत तक क्रूस के नीचे खड़ी रही।”
उन्होंने कहा कि मैं आप सभों के सारे कार्यों को उनके चरणों में समर्पित करता हूँ जिनको यह पवित्र भूमि समर्पित है, उनका वैश्विक मातृत्व विश्वास की पुकार को सजीव बनाये। उन्हें हम कहें, “हमें अपने को सदैव माता, करूणा के स्रोत, क्षमा का स्थल, आशा का आलिंगन और महिमा के द्वार की तरह देखने में मदद कर।”
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