खोज

संत पापा का कनारिया के स्टेडियम में मिस्सा बलिदान संत पापा का कनारिया के स्टेडियम में मिस्सा बलिदान  (@Vatican Media)

संत पापा लियोः हम प्रेम में हृदय की धड़कन को सुनें

संत पापा लियो ने स्पेन की अपने प्रेरितिक यात्रा के छटवें दिन कनारिया के स्टेडियम में पवित्र हृदय के महोत्सव का मिस्सा बलिदान अर्पित किया और येसु के प्रेम पर प्रकाश डाला।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने स्पेन की अपनी प्रेरितिक यात्रा के छटवें दिन ग्रान कनारिया स्टेडियम में येसु ख्रीस्त के पवित्र हृदय के महापर्व का यूखारीस्तीय बलिदान अर्पित किया।

प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा कि मिलन और एक-दूसरे के संग वार्ता भरे इस दिन के उपरांत इस यूखारीस्तीय बलिदान का अनुष्ठान करते हुए सर्वप्रथम मैं ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के भाव व्यक्त करता हूँ जिन्होंने हर रोज हमारे लिए अच्छी चीजें की हैं, मैं यहाँ के हर समर्पित व्यक्ति और दुःख का सामना करने वालों को उन्हें अर्पित करता हूँ। उन्होंने कहा कि मैं इस मिस्सा बलिदान के दौरान उन लोगों के लिए प्रार्थना करने का आहृवना करता हूँ जिन्हेंने समुद्र में अपने जीवन को खो दिया है।

इस संध्या बेला में, येसु के पवित्र हृदय की धर्मविधि में प्रवेश करने के पूर्व, जो पूरे स्पेन को समर्पित हैं, हम सबों को इस वेदी के पास, रोटी और दाखरस के संग लाते हैं। इस क्षण हम प्रभु से विनय करें कि मुक्तिदाता की करूणा और दया हम सभों के अंदर, सारी मानवता में कायम रहे।

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद   (@Vatican Media)

ईश्वर का चुनाव

संत पापा लियो ने प्रथम पाठ पर चिंतन करते हुए कहा कि ईश्वर इस्रराएल को अपने शर्तहीन प्रेम की याद दिलाते हैं। उन्होंने उन्हें इसलिए नहीं चुना कि वे एक विशेष जाति, उपहार या योग्यता के थे, बल्कि वे ऐसा अपने प्रेम के कारण करते हैं, वे उन्हें सदैव अपना प्रेम प्रदर्शित करते हैं, यहाँ तक की उन परिस्थितियों में भी, जब वे अपने हृदय की कठोरता के कारण उनके प्रेम का प्रत्युत्तर नहीं देते हैं।

हमारी बुलाहट प्रेम में, प्रेम हेतु

यह ईश्वर का प्रेम है जहाँ प्रेम करने की हमारी बुलाहट जुड़ी है। यह तोलमोल का प्रेम नहीं है, न ही सिर्फ मनोभावना रूपी प्रेम, भलाई तक ही सीमित रहने वाला प्रेम नहीं बल्कि यह वह प्रेम है जो हमें पूरी तरह अपने में सम्माहित करता है- यह हमारे हृदय के लिए अग्नि, दिमाग के लिए ज्योति, शांति, स्वतंत्रता की ओर एक अदम्य आवेग है, वहीं यह हृदय के लिए पीड़ादायक है, जो दूसरे के संग हृदय की एकता में धड़कता है और पूरे व्यक्ति को अपने में आलिंगन करता है। क्योंकि मानव में प्रेम करना कुदरती है, यह उसके अस्तित्व की पूर्णता के लिए शर्त है।

विश्वासियों का अभिवादन
विश्वासियों का अभिवादन   (@Vatican Media)

अतः, प्रेम हमारे लिए मुक्तिदता की मानवता और परम पवित्र हृदय की मनोभावनाओं में व्यक्त होता है जो गलतफहमी और परित्याग, डर, दुःख और मानवीय विरोध के बावजूद भी बदलता नहीं बल्कि वफ़ादार रहता है।

प्रेम का उत्तर प्रेम

संत पापा ने कहा कि यह ईश्वर का चेहरा है, जो सदैव हमें प्रेम करते हैं, जो सदैव हमारी भलाई और पूर्ण खुशी की चाह रखते हैं-जिससे हम जीवन के मार्ग को पहचान सकें- दूसरों के संग नये रूप में जीने और संबंध स्थापित करना सीख सकें, निर्णयों को परखने का एक अलग तरीका और नवीन रूप में प्रेरित करने वाली एकता स्थापित कर सकें। इस संदर्भ में संत पापा फ्रांसिस, ख्रीस्त की करूणा का जिक्र करते हुए कहते हैं, “ख्रीस्त के हृदय के प्रेम का सर्वोत्म उत्तर देना हमारे लिए अपने भाई-बहनों को प्रेम करना है।” इसके साथ ही वे कहते हैं, “प्रेम के बदले में प्रेम करने से बड़ा और कुछ नहीं है।” “प्रेम के बदले प्रेम।” यह एक अद्वितीय आदान-प्रदान है जिसके द्वारा सुसमाचार हमें अपने को आकर्षित होने, ईश्वर के अनंत प्रेम को उदारता में बदलने का निमंत्रण है जिसके द्वारा हम उनकी सेवा हर दिन करते हैं, उन भाई-बहनों में जिन्हें वे हमारे मार्ग में लाते हैं- विशेष कर अति जरूरत की स्थिति में, सुरक्षाहीन को, वे जो बदले में कुछ नहीं दे सकते, देना का आहृवान करता है, विशेष कर जैसे कि इस द्वीप में- स्वागत, साझा और निस्वार्थ भावना से देने में होता है।

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद   (@Vatican Media)

संत पापा लियो ने कहा कि ख्रीस्त का उदार हृदय, यद्यपि वहाँ नहीं रूकता है। यह उससे भी आगे जाता है, अपने को हरएक की सेवा में समर्पित करता है न सिर्फ जीवित रखने के लिए, बल्कि विश्वास पुख्ता करने और जीवन के मार्ग में आगे बढ़ें हेतु, जिससे उनकी अद्वितीयता सभों की भलाई के लिए हो। इस संदर्भ में संत पापा बेन्दिक्त 16वें ने लिखा कि करूणा, “जिसका साक्ष्य येसु ने अपने दुनियावी जीवन में दिया... अपने में हर व्यक्ति और पूरी मानवता के असली विकास के पीछे मुख्य प्रेरणा शक्ति है” (कारितास इन वेरिताते 1)।

ईश्वर की चाह, जीवन देना है

संत पापा ने कहा कि दूसरे पाठ में, संत योहन हमें याद दिलाते हैं कि “ईश्वर ने अपने पुत्र को दुनिया में भेजा जिससे हम उनमें जीवन प्राप्त करें।” (1यो.4.9) हम उनके वचनों को येसु ख्रीस्त में ध्वनित होता पाते हैं जिन्होंने कहा कि मैं दुनिया में आया जिससे तुम जीवन प्राप्त करो और सम्पूर्ण जीवन। (यो.10.10) और कोढ़ग्रस्त व्यक्ति जिसकी चंगाई उन्होंने की थी कहा, “उठो, अपनी चरपाई उठाओ और चलो।” (मर.2:9) इन शब्दों में, ममतामयी करूणा में, हम दुःख सहने वालों के लिए निमंत्रण को पाते हैं, वहीं घायलों को तैयार करना और हिम्मत देना ताकि वे उठ खड़े हों और एक बार फिर स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन की राह पर चल सकें।

चढ़ावे की धर्मविधि में विश्वासी
चढ़ावे की धर्मविधि में विश्वासी   (AFP or licensors)

संत पापा ने कहा, वास्तव में, हमारी करूणा के कार्य सिर्फ भौतिक साहयता न हो, लेकिन यह मानव का सम्पूर्ण विकास करे- आध्यात्मिक, बौद्धिक और शारीरिक- और उसे समुदाय में सम्मानजनक स्थापित करे। केवल ऐसा करने का द्वारा हमारा मिलन, मुश्किल और दुःख परस्थितियों में, मानव के बेहतर भविष्य हेतु जीवन में आशा के बीज बोने का अवसर होता है।

नम्रता की कमी

संत पापा ने कहा लेकिन मैं यहाँ रूकना चाहूँगा, ईशवचन के प्रकाश में जिसे हमने सुना है, हम येसु के हृदय की नम्रता के गुण पर चिंतन करें। येसु का हृदय अपने में नम्र है और इसी कारण उसकी धकड़न पंडितों और ज्ञानियों के द्वारा नहीं सुनी जाती है, अर्थात वे जो अपने में आत्म-निर्भर हैं, सारी चीजों को जानते हैं, जिन्हें न तो ईश्वर की जरुरत है और न ही दूसरों की। एक दिखावटी, हर जगह मौजूद और बेचैन "मैं" में वे अपने में शांति की कमी को पाते हैं, वे अपने अंदर और अपने भाई-बहनों में प्यार के छिपे हुए, धड़कते दिल को सुनने में असफल होते हैं।  

[ Video Embed: संत पापा लियोः कनारिया में मिस्सा बलिदान]  

संत पापा ने कहा कि हमारी समृद्ध हमें दूसरों की जरूरतों के संबंध में अंधा बना देती है और हमें यह सोचने में अग्रसर करती है कि हमारी खुशी और परिपूर्णत, दूसरों के बदले, हमारे ऊपर निर्भर करता है। येसु वहीं दूसरी ओर ठीक इसके विपरीत शिक्षा देते हैं, वे हमें जीवन की सच्ची खुशी का अनुभव करने,जो प्रेम में निर्भर करता है, हमें अपने घमंड से नीचे उतरने की मांग करता है जो हमें विभाजित करता और हमें नम्रता में देखना की मांग करता है जो हमें एकता में पिरोता है।

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद   (AFP or licensors)

प्रेम में शांति 

संत अगुस्टीन कहते हैं, “जहाँ प्रेम है, वहाँ शांति है, और जहाँ नम्रता है वहाँ प्रेम है।” यह वास्तव में सच है। वहाँ जहाँ सच्ची नम्रता है, वहाँ प्रेम है, और जहाँ प्रेम है वहाँ शांति है, क्योंकि हम सिर्फ सच्ची नम्रता में यह जानते हैं कि हम कौन हैं, इसलिए हम दूसरों को प्रेम करें, दूसरों से मिलें, अपने को दूसरों के लिए दें, और सही रूप में एक दूसरे को क्षमा प्रदान करें।

संत पापा ने कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों, जैसे हम पवित्र हृदय की आराधना करते हैं,एक हृदय जो सदैव धधकती आग और कांटों के मुकुट से प्रस्तुत किया जाता है जैसे की संत मग्ररेट मेरी अलकोके ने अपने दिव्य दर्शन में देखा। आइए हम इस बात की याद करें कि हम दुनिया में येसु की जीवित उपस्थिति हैं। अतः हम एक दूसरे को देखें- आज केवल नहीं बल्कि सदैव – सम्मान और विश्वास में, हम दूसरों की चिंता करें, आइए हम कलीसिया की भलाई के लिए, येसु मसीह के कष्टों में जो कमी है, उसे करूणा के माध्यम से अपने जीवन में पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करें। उनके हृदय से प्रज्वलित होकर, आइए हम उनकी दया और उनकी शांति के वाहक बनें, ताकि दुनिया में युद्ध बंद हों और हमारे चारों ओर प्रेम में मेल-मिलाप वाली एक नई मानवता का उदय हो सके।

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here.

11 जून 2026, 22:42