संत पापा लियो बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा लियो बुधवारीय आमदर्शन समारोह में  (ANSA)

संत पापा लियोः ईश्वर की निकटता धर्मविधि में

संत पापा लियो ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह की धर्मशिक्षा माला में वाटिकन द्वितीय के धर्मसिद्धांत स्क्रोस्तुंम कोन्सेलियुम पर चिंतन करते हुए धार्मिक अनुष्ठान, चिन्ह और प्रतीक पर प्रकाश डाला।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात और सुस्वागतम।

अपने बुधवारीय धर्मशिक्षा में जिस भांति हम द्वितीय वाटिकन महासभा के धर्मसिद्धांत सक्रोस्तुंम कोन्सेलियुम पर चिंतन कर रहे हैं, हम पवित्र धर्मविधि के मूलभूत बातों जैसे कि धार्मिक अनुष्ठान, चिन्ह और प्रतीक पर चिंतन करेंगे।

संत पापा ने कहा कि वाटिकन द्वितीय महा धर्मसभा धर्मविधि के मूल्यवान तथ्यों पर कार्य करते हुए हमें इस बात की सच्चाई को पुनः खोजने में मदद किया है जो प्राचीन कलीसिया की चेतना और धर्माचार्यों की शिक्षा में पहले से व्याप्त था। ख्रीस्तीय धर्मविधि का अनुष्ठान संस्कारीय रहस्यों का वाह्य आवरण, समारोहों का मनमाना संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि कलीसिया का मनन-चिंतन है जिसके माध्यम दिव्य उपहार हमारे लिए पहुंचते हैं। इसी कारण विशेष से धर्मसभा हमें मिस्टेरियुम फिदेई, विश्वास के रहस्य को समझने का आहृवान करती है जो हमारे लिए धर्मविधि के धार्मिक अनुष्ठानों और प्रार्थनाओं में पूरी होती है।

संत पापा लियो आमदर्शन समारोह में
संत पापा लियो आमदर्शन समारोह में   (ANSA)

धार्मिक अनुष्ठान में हमारी सहभागिता

धार्मिक अनुष्ठान हमारे लिए धर्मविधि को आकार प्रदान करती है, जिसके द्वारा, वे हमारे जीवन में आध्यात्मिक संवेदना उत्पन्न करते हैं जो हमारे लिए येसु ख्रीस्त के द्वारा ईश्वर की उपस्थिति का रसास्वादन करने में मदद करते हैं। स्वभाविक रुप सें, यह हमारे लिए तब होता है यदि हम धर्मविधि के संबंध में अपरिचित या मूकदर्शक बने  नहीं रहते, लेकिन उनमें पूरी तरह से शरीर, मन और हृदय से अपने को शामिल करते हैं- जैसे कि हम उसे ईश्वर की आज्ञा में पाते हैं। इस भांति पवित्र धार्मिक अनुष्ठान के द्वारा हम ईश्वर के वचनों को सुनने,कृतज्ञता के भाव और आराधना में, भ्रातृत्वमय आदान-प्रदान और कलीसिया की एकता में बने रहने हेतु अपने को तैयार करते हैं। हम इस बात को पाते हैं कि हम विभिन्न चेहरों के एक समूह हैं, जो एक ही विश्वास में पिरोये गये हैं।

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद   (@VATICAN MEDIA)

मुफ्त का तर्क  

धर्मविधि की रीति हमें बेहतर रूप में परिभाषित अभिव्यक्तियों और प्रार्थना की कड़ी में जोड़ती है जो कभी-कभी हमें व्यक्तिगत रूप में सहज लगने के बदले अटपटा लगता है। इसका तर्क यद्यपि कार्य की कठोर रुपरेखा में स्वंतत्रता का अवरोध करना नहीं है। इसके विपरीत, इसके भव्य सुर की सरलता में, धार्मिक अनुष्ठान हमारे लिए कठोर क्रिया कलापों को परिभाषित करते और हमें उन बातों की ओर अग्रसर करते हैं जो जरूरी है। इस भांति हम कार्य के एक दूसरे आयाम की खोज करते हैं जो उत्पादकता के हिसाब तथा समय और स्थल के अनुभव से नहीं चलता है। धार्मिक अनुष्ठान में हम मुफ्त में मिलने वाले तर्क का अनुभव करते हैं, हम एक ठहराव को पाते जो हमारे हृदय का निर्माण फिर से करता है, हम इस बात का अनुभव करते हैं कि हम दिव्य कृपा से पोषित किये जाते हैं, हम एक ताल में जीना सीखते हैं जिसमें पवित्र आत्मा निवास करते हैं।

चिन्ह और प्रतीक

संत पापा लियो ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान का व्याकरण हमारे लिए चिन्हों और प्रतीकों के ताने-बाने से बुना गया है जो धर्मविधि का भाग है। इसमें जैसे कि धर्मसभा हमें कहती है, “व्यक्ति का पवित्रिकरण इन्द्रियों द्वारा अनुभव किये जाने वाले संकेतों के अनुरूप होता है और इन संकेतों का प्रभाव को हम मेल खाने वाले चिन्हों में पाते हैं...काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा इन चिन्हों के महत्व के बारे में, याद दिलाते हुए कहती है कि “उनका अर्थ सृष्टि में उनकी रचना और मानव की संस्कृति पर आधारित है, जो विशेषकर प्राचीन विधान की घटनाओं से परिभाषित है और जो पूर्णरूपेण येसु ख्रीस्त और उनके कार्यों में प्रकट होता है।” पानी की निशानी, सृष्टि के शुरू से लेकर जलप्रलय तक, लाल समुद्र से पार होकर यर्दन तक, और फिर येसु ख्रीस्त की बगल से प्रवाहित होने वाले जल तक जो हमारे लिए येसु के मृत्यु और पनुरूत्थान में संस्कारीय रुप में डूबोये जाने की निशानी है।

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद   (@VATICAN MEDIA)

चिन्ह और प्रतीक हमारे लिए दो शब्द हैं जिसका उपयोग सदैव एक-दूसरे के लिए होता है। वास्तव में, एक चिन्ह हमारे लिए प्रतीक है जब वह अपने में न केवल एक विचार बल्कि संपूर्ण प्राणली के अर्थ और मूल्यों की ओर हमारा ध्यान इंगित करता है। इस भांति उदाहरण के लिए जब हम सभों पर पवित्र जल छिड़का जाता है, तो यह हमें बपतिस्मा में प्राप्त उपहार और येसु ख्रीस्त में हमारे समर्पित नये जीवन की सचेतन को जागृति करता है। दूसरे निशानियों को हम मुख्यतः व्यवहारिक रूप से प्रकृतिक पाते हैं- जो सबसे पहले और सबसे जरुरी काम होते हैं- कुछ साधारण और सामान्य निशानी जैसे की घुटनी टेकना और शांति अभिवादन देना, या अधिक मांग करने वाले, जैसे हर संस्कार के कार्यों को हम पाते हैं। इन सारी चीजों से बढ़कर निशानियों को हम एक अद्वितीय प्रदर्शनकारी और परिवर्तनकारी आयाम स्वरुप पाते हैं, जिनका संबंध भौतिक चीजों से हैं जिनके द्वारा वे बने हैं और जिनका उनके संग संपर्क होता है, यह जुड़े होने के भाव उत्पन्न करते हैं, यह उनके मन और दिल का स्पर्श करता और उन्हें कलीसिया में सच्चे संबंधों की ओर उन्मुख करता है।

संत पापा- आमदर्शन समारोह में

समारोह की सुन्दरता की देखरेख करें

संत पापा लियो ने कहा कि प्रेरितिक प्रबोधन देसीदेरियो देसिदेराभी में संत पापा फ्रांसिस रोमानो गुर्आदिनी की बातों के उदृधृत करते हैं, “धर्मविधि का प्रथम प्रशिक्षण कार्य- मानव को चाहिए की वह पुनः एक बार प्रतीकों के योग्य बने।” हमें अपने को धर्मविधि के अनुष्ठानों से शिक्षित होने की जरुरत है, हमें कोमलता में अपने समारोहों की सुन्दरता की देखरेख करने की जरुरत है बिना मनमानी के, हमें एक वास्तविक रहस्यवाद हेतु समर्पित होने की आवश्यकता है। एक सजीव और धार्मिक धर्मविधि, जिसका अनुष्ठान सही रहस्यमय धर्मशिक्षा के माध्यम होता है, यह हरएक में ईश्वर से मिलन हेतु एक सुन्दर स्रोत बनता है, जिसे हम देहधारण के तर्क में पाते हैं, यह सिर्फ तब हो सकता है जब व्यक्ति अपने को हृदय, आत्मा और शरीर से शामिल करता है।  

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03 जून 2026, 14:08