पोप याद दिलाते हैं कि यूखरीस्तीय कृपा हमें बदलती और आशा के नायक बनाती है

पोप लियो 14वें ने मैड्रिड के केंद्र में, ख्रीस्त के पावनतम शरीर (कॉर्पुस क्रिस्ती) महापर्व की अगुवाई की, जिसमें 1.2 मिलियन से ज्यादा लोग शामिल हुए। उन्होंने स्पेन के लोगों को हिम्मत दी कि "वे यह सुनिश्चित करें कि जिस धार्मिकता ने सदियों से इस देश को बनाया और बताया है, वह कोई पुराना संग्रहालय न हो जिसे देखा जाए, बल्कि आस्था का एक स्कूल हो जिससे आज भी सीखा जा सके।"

वाटिकन न्यूज

मैड्रिड, रविवार, 7 जून 2026 (रेई) : स्पेन की प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन, 7 जून को ख्रीस्त के पावनतम शरीर एवं रक्त महापर्व के अवसर पर, पोप लियो 14वें ने मैड्रिड के सिबेल्स प्रांगण में समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

स्पेन के राजा फिलिप षष्टम, रानी लेतित्सिया और उनकी दोनों बेटियों के साथ साथ, ख्रीस्तीय विश्वासियों ने भारी संख्या में इस समारोही ख्रीस्तयाग में भाग लिया।

संत पापा ने अपने उपदेश में कहा, “जब मैं स्पेन की प्रेरितिक यात्रा शुरू कर रहा हूँ, मैं आनन्दित हृदय से ख्रीस्त के पावनतम शरीर के महापर्व पर इस समारोह का अनुष्ठान कर रहा हूँ।”

हम यूखरिस्त के चारों ओर एकत्रित हैं जो हमारे बीच ख्रीस्त की जीवित उपस्थिति का उपहार है। उन्होंने हमें  अपना जीवन अर्पित करना चाहा ताकि हम पिता से मिल सकें और उनके बच्चे बन सकें, वे जीवित रोटी के रूप में स्वर्ग से उतरे, जिससे कि हमें ईश्वर के जीवन से, मृत्यु से अधिक शक्तिशाली प्रेम से पोषित कर सकें।

ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर के महापर्व का जूलुस
ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर के महापर्व का जूलुस   (ANSA)

कॉर्पुस क्रिस्ती परंपराओं का जीवंत विश्वास

संत पापा ने कहा कि यूखरिस्तीय रोटी में प्रभु की उपस्थिति का यह एहसास स्पेन के लोगों के विश्वास और इतिहास में गहराई से जुड़ा है। स्पेन के कई दूसरे हिस्सों की तरह, मैड्रिड में ख्रीस्त के पावनतम शरीर का महापर्व, पूजन पद्धति कैलेंडर के अन्य पर्वों से बढ़कर है। यह विश्वास के दिल में लौटने का एक तरीका है ताकि हम ईश्वर के प्रति अपने प्यार और निष्ठा को फिर जगा सकें।

संत पापा याद करते हैं कि इस दिन होनेवाले पवित्र शोभायात्रा ने सदियों से स्पेन के लोगों की भक्ति, कला, संगीत, वास्तुकला और जीवन को आकार दिया है। आज भी, वे फूलों के कालीनों, सड़कों पर बनी वेदियों, मोंस्ट्रांस और भजनों और पवित्र मिस्सा के परिधानों की सुंदरता के माध्यम से इस देश की आध्यात्मिक भावनाओं को व्यक्त करते हैं। संत पापा ने माना कि यह कोई दिखावा, लोककथाओं का बचा हुआ हिस्सा या सुंदरता का प्रदर्शन मात्र नहीं है। “यह पुनर्जीवित प्रभु की उपस्थिति में विश्वास की अभिव्यक्ति है, जो जीवित हैं और हमारे बीच चलते हैं, जो जीवन की हमारी भूख मिटाने के लिए रोटी बन जाते हैं, और हमारे दिलों एवं इतिहास की उन जगहों पर भी आते हैं, जो अंधकार से घिरे हुए हैं।

स्पेन में पोप लियो 14वें का ख्रीस्तयाग
स्पेन में पोप लियो 14वें का ख्रीस्तयाग   (AFP or licensors)

हमें पोषित करते और साथ देते

“जिस प्रकार पवित्र यूखरिस्त में ख्रीस्त स्वयं हमारे लिए अपने आपको भोजन के रूप में दे देते हैं, पवित्र संस्कार की शोभायात्रा दिखाती है कि वे सिर्फ गिरजाघर में बंद नहीं हैं, बल्कि हमसे मिलने बाहर आते हैं। येसु सड़कों पर घूमते हैं, चौक पार करते हैं और हमारे आस-पड़ोस में आते हैं, हमारे दैनिक जीवन में आते हैं। वे एक ऐसे ईश्वर हैं जो हमारे करीब हैं, जो अपने लोगों के साथ चलते हैं, वे इतिहास के प्रभु हैं। वे दुर्बलों के लिए आराम हैं, परिवारों के लिए रोशनी हैं, बीमारों के लिए उम्मीद हैं और जो लोग दुःख झेल रहे हैं उनके लिए शांति हैं। मसीह जो पवित्र संस्कार में सड़कों से गुजरते हैं, गरीबों, दबे-कुचले लोगों, अकेले और परित्यक्त लोगों के साथ अपनी पहचान बनाते हैं।” संत पापा ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि स्पेन में कलीसिया ने लंबे समय से ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर के पर्व को उदार दान दिवस के साथ जोड़ दिया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शोभायात्रा पवित्र संस्कार को सिर्फ बाहर निकालना नहीं है लेकिन अपने आपको, अपने स्वार्थ और उदासीनता से एक आरामदायक स्थिति से, आत्म विश्वास से ऊपर उठाना है, ताकि हम मन-परिवर्तन के उनके निमंत्रण का प्रत्युत्तर दे सकें, अपना दृष्टिकोण बदल सकें, और उनकी उपस्थिति का स्वागत कर सकें जो हमें बदल देते और हमें एक नई दुनिया के निर्माता बनाते हैं।

धार्मिकता आज भी जीवित

यही कारण है कि ख्रीस्त के पावन शरीर (कॉर्पुस ख्रीस्ती) की शोभायात्रा की ऐतिहासिक याद सिर्फ पुरानी याद नहीं, बल्कि, आज के समय में, हमारे दैनिक जीवन में, हमारे रिश्तों में, समाज में और भविष्य के निर्माण में एक बुलावा है। इसी संदर्भ में हम पहले पाठ में “याद रखने” के निमंत्रण को समझ सकते हैं: “याद रखो कि तुम्हारा प्रभु ईश्वर तुम्हें इन चालीस सालों में मरूभूमि में लंबा रास्ता तय करके ले गया” (विधि विवरण 8:3); याद रखो कि जब तुम भूखे थे तो उन्होंने तुम्हें मन्ना खिलाया था। हमें इसे “याद” रखना चाहिए ताकि हम यह न भूलें कि प्रभु कौन है, ताकि हम दूसरी देवमूर्तियों पर भरोसा करने और ऐसी रोटी खाने के लालच में न पड़ें जो संतुष्ट नहीं कर सकती।

ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर का महापर्व
ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर का महापर्व   (ANSA)

संत पापा ने स्पेन के विश्वासियों से कहा, “आज और भविष्य में स्पेन का काम यही है: यह सुदृढ़ करना कि जिस धार्मिकता ने सदियों से इस देश को बनाया और बताया है, वह अतीत का संग्रहालय न रहे, जिसका दर्शन किया जाता है, बल्कि विश्वास का स्कूल हो जहाँ से आज भी कुछ सीखा जा सके: एक ऐसा स्कूल जो हमें ईश्वर और अपने पड़ोसी के सामने झुकना सिखाए, क्योंकि कोई भी ईश्वर के सामने झुककर अपने भाई को नीचा नहीं समझ सकता। एक ऐसा स्कूल जो हमें मुफ्त प्रेम की कीमत सिखाए जो एक उपहार बन जाता है, जिससे कि यह हमारे बीच बहे और सभी स्वार्थ की जंजीरों को तोड़ दे; एक ऐसा स्कूल जहाँ से हम सीख सकें कि ईश्वर एक सच्ची उपस्थिति हैं और हमें भी समाज की सच्चाइयों और चुनौतियों में उपस्थित रहने के लिए बुलाया गया है, पीछे हटकर नहीं, बल्कि खुद को आम भलाई के लिए समर्पित करते हुए।

न केवल पर्व बल्कि मौन में भी यूखरिस्त की आराधना

संत पापा ने संत मानुएल गोंजालेस की याद की, जो छोड़े गए संदुक के धर्माध्यक्ष थे। उन्होंने कहा, “उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि यूखरिस्त का सम्मान सिर्फ बड़े समारोहों या खास मौकों पर ही नहीं, बल्कि उन लोगों के मौन निष्ठा से भी किया जाना चाहिए जो प्रभु के साथ दीन और शांत संयुक्ति में रहते हैं जो दिन-ब-दिन बढ़ती जाती है।" उदाहरण के लिए संत जॉन ऑफ द क्रॉस। जो उनकी कविता में व्यक्त होता है: “क्योंकि मैं उस झरने को अच्छी तरह जानता हूँ जो बहता और दौड़ता है, हालाँकि रात हो चुकी है” (विश्वास के द्वारा ईश्वर को जानने में खुशी मनानेवाली आत्मा का गीत)। 1578 में कॉर्पुस क्रिस्ती के समय के आसपास, टोलेडो के कॉन्वेंट जेल में मुश्किल हालात में कैद रहते हुए, उन्होंने अपनी कोठरी के अंधेरे में प्रभु की छिपी उपस्थिति को पहचाना, एक ऐसी उपस्थिति जिससे एक रोशनी निकलती है जो कभी धूमिल नहीं पड़ती और एक ऐसा जीवन बहता है जो कभी कम नहीं होता। संत पापा ने कहा कि युखरिस्तीय येसु “वह शाश्वत झरना है जो छिपा हुआ है” - एक झरना जो बहता है और प्यास बुझाता है, लेकिन किसी को अंधा नहीं बनाता, बाहरी शक्ति के द्वारा खुद को नहीं थोपता, न ही खुद को शानदार तरीके से प्रस्तुत करता है।”

ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर के पर्व का जूलुस
ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर के पर्व का जूलुस   (ANSA)

यूखरिस्तीय झरने का जल पीयें

संत पापा ने स्पेन के सभी विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, आइए हम सच्चे प्यार के साथ उनके पास लौटें। हम उनसे मिलने के लिए खुद को खोलें, उन्हें अपने दिल की प्यास बुझाने दें, ताकि हम फिर से जीवन और इतिहास के रास्तों पर आगे बढ़ सकें, सभी लोगों तक यह स्वच्छ जलधारा, प्यार, शांति, न्याय और खुशी की धारा ला सकें। आइए हम इस यूखरिस्टिक झरने से नया पानी पिएं, जो हमें निजी भक्ति में नहीं बांधता, बल्कि हमें अपने भाइयों और बहनों, अपने परिवारों, गरीबों, दुखियों और उन लोगों को तरोताज़ा करने के लिए भेजता है जिन्होंने उम्मीद खो दी है। यूखरिस्तीय कृपा हमें बदल देती है और हमें इतिहास के बदलाव का हीरो बनाती है, हमें उन लोगों के लिए आशा की निशानी बनाती है जिनसे हम मिलते हैं।

संत पापा ने अंत में कहा, “यूखरिस्त में उपस्थित प्रभु येसु आपको तोड़ी, प्रदान की गई और अर्पित रोटी में बदल दें, ताकि आपके लिए, आपके परिवारों के लिए और आपके देश के लिए परिपूर्ण जीवन फले-फूले।

ख्रीस्तयाग के अंत में संत पापा ने पवित्र यूखरिस्त की शोभायात्रा का नेतृत्व किया एवं आशीष प्रदान की।

ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर के महापर्व का जूलुस
ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर के महापर्व का जूलुस   (ANSA)

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07 जून 2026, 15:33