संत पापा लियोः क्रूस का आलिंगन और यूखारीस्तीय आध्यात्मिकता पोषित करें
वाटिकन सिटी
संत पापा लियो 14वें ने स्पेन की अपनी प्रेरितिक यात्रा के छटवें दिन लास पालमास दे ग्रान कनारिया के संत अन्ना महागिरजाघऱ में धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, उपयाजकों, धर्मसंधियों और गुरूकुलों के विद्यार्थियों और प्रेरिताई कार्य में संलग्न लोगों के संग भेंट की।
संत पापा ने उन्हें अपने संबोधन में कहा कि आप के संग यह मिलन मुझे खुशी से भर देता है। आप के गर्मजोशी स्वागत, उपस्थिति और साक्ष्य हेतु धन्यवाद, जो सजीव कलीसिया को प्रकट करती है, जिनके हृदय में वर्तमान समय के लोगों की खुशियाँ और आशाएं, दुःख और पीड़ा ध्वनित होती रही है विशेष कर उन लोग में जो गरीब या दुःख के शिकार हैं।
पिता और भाई, ख्रीस्तीय और धर्माध्यक्ष
इस द्वीप में मैं विश्वास में एक पिता और भाई के रुप में आता हूँ, “आप के संग मैं एक ख्रीस्तीय और आप के लिए मैं एक धर्माध्यक्ष हूँ। हममें से हर किसी ने ख्रीस्त के शरीर का निर्माण करने हेतु विभिन्न प्रकार के उपहारों और प्रेरिताई को पाया है जैसे कि हमने एफेसियों के नाम पत्र में सुना। और यह ईश्वर का बुलावा है जो पुनः आज हमारे हृदयों में गूंजता और हमें अपनी बुलाहट और प्रेरिताई में सुदृढ़ करता है- जिससे हम मिलकर ख्रीस्त में कलीसिया का निर्माण कर सकें, जो उसकी नींव हैं, जो हमें अच्छाई का निर्माण, विभिन्नताओं में हमारी एकता और एक साथ मिलकर सभों के लिए कार्य करना को प्रेरित करते हैं।
संत पापा लियो ने कहा कि मैं ख्रीस्तीय जीवन के दो मनोभावों पर चिंतन करना चाहूँगा जिसे हमें अपने में याद रखने की जरुरत है जिससे हम प्रेम की सभ्यता के निर्माण में “विवेकी शिल्पकार” बन सकें।
एक कमी का एहसास
संत पापा ने कहा कि चाहे आप कनारी के निवास हों या कानरिया द्वीप को आप ने अपना निवास स्थल बनाया है, आप को अटलांटिक से घिरे देशों में तीर्थ यात्रा पर निकले ईश्वर के लोगों की तरह हर दिन समुद्र की शानदार मौजूदगी का आनंद लेने का अवसर मिलता है। कहा जाता है कि एक द्वीपवासी की आंखों में, समुद्र का दृश्य- जो घर और मातृभूमि की यादें ताजा करता है- यह बात सदैव हमारे जेहन में रहती है और जब हम उससे दूर होते हैं, जब हम "अंतर्देशीय" होते हैं, तो इसकी कमी बहुत खलती है। इस अनुभूति की विशालता हमें एक स्वास्थ्य विषाद से भर देती है क्योंकि खुला आसमान और समुद्र की विस्तृत क्षितिज हमारे लिए अंतहीन सीमा लाती है। हम इसमें एक संदेवनशील हृदय को भी पाते हैं जो जाने वालों को आंसुओं के विदा करता और आने वालों को खुले हाथों से स्वागत को तैयार रहता है। इस मनोभाव में, हम समुद्र को कभी-कभी दूरी और जुदाई, चुनौती और आगे की यात्रा के अर्थ स्वरूप पाते हैं।
जीवन की दुविधा में क्रूस सहारा
संत पापा ने कहा कि इस संदर्भ में संत अगुस्टीन हमें कहते हैं, “यदि कोई अपनी मातृभूमि को दूर से देखता, लेकिन बीच में समुद्र खड़ा होता, तो वह जानता है कि कहाँ जाये लेकिन वह यह नहीं जानता की किस रास्ते से होकर जाया जाये।” हमारे साथ भी ऐसा ही है, हम अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने की चाह रखते हैं, लेकिन समुद्र की दुनिया हमारे मार्ग में खड़ी होती है। मार्ग दिखाने के लिए जिन पर हम आधारित रहते हैं वे हमारे बीच आते हैं। और उन्होंने क्या कियाॽ उन्होंने एक वृक्ष लाया जिसके द्वारा समुद्र पार किया जा सके। कोई भी इस दुनिया के समुद्र को पार नहीं कर सकता है यदि वह ख्रीस्त के क्रूस को न ढ़ोये। येसु ख्रीस्त के क्रूस का आलिंगन करना- यह हमारे लिए पहला मनोभाव है जो हमें जीवन के समुद्र में आगे बढ़ने और अपनी मंजिल, स्वर्गीय निवास तक पहुंचने में मदद करता है।
क्रूस का आलिंगन
प्रिय भाइयो एवं बहनों, संतों ने ईश्वर की चाह रखी, और जीवन में तूफानों की घड़ी, उन्होंने येसु को अपनी नाव में अपने पास लाया, उन्होंने उन पर विश्वास किया, क्रूस का आलिंगन किया और इस भांति अनिश्चितता और भय के लहर को शांत किया। इसका उदाहरण हम इस धरती के पूज्यनीय अंतोनी विचेन्ते गोन्जलेज, एक धर्मप्रांतीय पुरोहित को पाते हैं, जो कनारी द्वीप के भले चरवाहे स्वरुप जाने जाते हैं। दिव्य कृपा से परिवर्तित उनका जीवन हमें येसु के क्रूस को अपने में धारण करते हुए उनका अनुसरण करने को प्रोत्साहित करता है, जिससे हम अपने प्रतिज्ञा लक्ष्य तक पहुँच सकें।
कृतज्ञता के भाव
संत पापा ने कहा कि इस भांति हमारी पहली दिशा निर्देशिका ख्रीस्त के क्रूस को वहन करना है। आप इसे अपने प्रतिदिन के जीवन में करें, उदाहरण के लिए भले समारियों की भांति आप दूसरे भाई-बहनों के क्रूस ढ़ोने में मदद करें जो अपने जीवन को तकलीफों में पाते हैं। संत पापा ने कहा कि मैं आप की करूणा और दया के उदारता पूर्ण कार्यो के लिए धन्यवाद देता हूँ।
यूखारीस्तीय आध्यात्मिकता
संत पापा ने यूख्रारीस्तीय आध्यात्मिकता पोषित करने को दूसरी निर्देशका के रुप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह इस खूबसूरत महागिरजाघर की पुरानी परंपरा से जुड़ी है: स्वर्गारोहण के मौके पर पवित्र संस्कार के आगे फूलों की पंखुड़ियां बरसाना, जो उन आध्यात्मिक और स्वर्गीय तोहफों की निशानी है जिसे प्रभु स्वर्ग आरोहित होते समय देते हैं। भक्ति का यह तरीका, जिसे कई पीढ़ियों ने अपनाया है, इसका अर्थ- हमारी तीर्थयात्रा में मसीह से मिलना है; वे ख्रीस्तीय जीवन के केंद्र हैं, जिनके सामने हम आराधना में घुटने टेकते हैं, जिनके चारों ओर जमा होते हुए हम एक शरीर बनते हैं, जिनमें हम अपने को “जीवित, पवित्र और ईश्वर को स्वीकार्य” बलि (रोमियों 12:1) के रूप में अर्पित करते हैं।
संत पापा ने कहा कि धर्मसभा हमें बतलाती है,“यूखारीस्तीय में सहभागी होते हुए जो ख्रीस्तीय जीवन का शीर्ष है, हम ईश्वर को दिव्य भेंट के संग स्वयं को अर्पित करते हैं..वैसे ही इसके द्वारा ईश प्रजा स्वरूप हम एकता में बने रहते हैं।” (लुमेन जेन्सियुम.11) अतः यूखारीस्तीय आध्यात्मिकता पोषित करने का अर्थ हमारे लिए “प्रेम में कलीसियाई एकता की आध्यात्मिकता” की गहराई में प्रवेश करना है। आइए हम अपने जीवन को येसु की चाह का प्रत्युत्तर बनाये,“जिससे वे सभी एक हों...जिससे दुनिया उनमें विश्वास करे।” (यो.17.21)
ख्रीस्तीय एकता
संत पापा ने कहा कि इस एकता की अध्यात्मिकता की एक ठोस अभिव्यक्ति ख्रीस्तीय एकता है क्योंकि येसु के संग एकता हमारे लिए उनके संग एकता में रहना है जिन्हें वे अपने को देते हैं। यही कारण है, उन्होंने कहा कि आप हर किसी के संग उस प्रेम को साझा करें जिसे आप ने येसु में पाया है। (1. यो. 4.19) एक प्रेम जो अपने में अतिथ्य, सुनने, निकटता और अति संवेदनशीलों की देख-रेख करने में पोषित होता है, “क्योंकि मैं भूखा था और तुमने मुझे खिलाया, मैं प्यासा था और तुमने मुझे पिलाया, मैं परदेशी था और तुमने मुझको अपने यहाँ ठहराया, मैं नंगा था और तुमने मुझे पहनाया, मैं बीमार था और तुम मुझ से भेंट करने आये, मैं बंदी था और तुम मुझसे मिलने आये।” (मत्ती.25.35-36)।
कनारी कलीसिया के प्रिय तीर्थयात्रियों, संत पापा ने कहा कि आप के पहले गये हुए बहुत सारे नर और नारियों के पवित्र पद चिन्हों का अनुसरण करते हुए- जिन्होंने अपने जीवन को क्रूसित येसु के लिए और उनकी वेदी में समर्पित किया- मैं आप को प्रोत्साहित करता हूँ कि आप उनमें गहराई से बने रहें जिससे आप इतिहास के इस नये समय में साहस के साथ आगे बढ़ सकें। मुश्किलों की घड़ी में आप अपनी निगाहें ऊपर उठायें और पवित्र आत्मा से विश्वास, आशा और करूणा की एकता में बनने रहने की कृपा मांगें- वे गुण जो आकाश में तीन तारों की भांति हमारे आध्यात्मिक जीवन में चमकते तथा हमें ईश्वर की ओर निर्देशित करते हैं।
कुंवारी मरियम, भोर का तारा, हमारी यात्रा में, हमें “गहाई में जाने को” मदद करें, और इस भांति हमें सुरक्षित अंतिम लक्ष्य अपने बेटे येसु खीस्त से मिलन हेतु पहुंचने में मदद करें।
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