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संत पापा की कृतज्ञता के भाव, स्वयंसेवियों के लिए संत पापा की कृतज्ञता के भाव, स्वयंसेवियों के लिए  (@Vatican Media)

संत पापा लियोः हम ईश्वर के स्वार्थहीन खमीर बनें

संत पापा लियो 14वें ने स्पेन की अपनी प्रेरितिक यात्रा के चौथे दिन मैड्रिड में स्वयंसेवियों से भेंट की और उनके उदारता भरी सेवा के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए ईश्वरीय राज्य का खमीर बनने का संदेश दिया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने स्पेन की अपनी प्रेरितिक यात्रा के चौथे दिन मैड्रिड, एएफईएमए (IFEMA) के सभागार में स्वयंसेवियों के दलों से भेंट की और उन्हें हृदय से धन्यवाद कहा।

संत पापा ने सभों का अभिवादन करते हुए कहा कि यह मैड्रिड की प्रेरितिक यात्रा का अंतिम पड़ाव है, और मैं आप हरएक स्वयंसेवी के संग, बहुत से आज की सुबह यहाँ उपस्थित नहीं हो सके अत्यंत खुशी का अनुभव करता हूँ। आप एक विशेष “धन्यवाद” के हकदार हैं, क्योंकि आप ने अपनी सेवा और समय दिया है, इसे आप ने ईश्वर, कलीसिया और संत पापा के लिए प्रेम से प्रेरित होकर किया है। “मैं आप सभों का हृदय से धन्यवाद अदा करता हूँ।”

संत पापा ने दो वाक्ताओं का विशेष रूप से धन्यवाद अदा किया जिन्होंने अपने साक्ष्य साझा किये, उसके साथ ही उन लोगों को जिन्होंने वीडियो तैयार किया और जिन्होंने संगीत कार्यक्रम में भाग लिया।

आपकी उदारता महान

संत पापा ने कहा कि मैंने सुना कि आप ने शुरू से स्वयंसेवी कार्य के बुलावे का प्रत्युत्तर बड़े ही उत्साह में दिया, और आप की असल संख्या थोड़े समय में ही दुगुनी हो गई। आप में से कुछ लोगों ने अपने कार्यों से आवकाश लिया, वहीं दूसरों ने महीनों से अपने के समर्पित किया। आप में से हर किसी ने अपने को दिया है, अपना हृदय, अपने हाथ, विचारों, क्षमताओं और मुस्कानों को। इसके लिए ईश्वर आप सभों को अपनी कृपाओं से भर दे जिसे सिर्फ वे जानते हैं, कैसे।

संत पापा लियो स्वयंसेवियों के संग
संत पापा लियो स्वयंसेवियों के संग   (@Vatican Media)

संत पापा ने कहा कि मैं आप सभों के संग एक छोटा चिंतन साझा करना चाहूँगा जिसे इस रूप में संक्षेपित किया जा सकता है-  ख्रीस्तीय अपने में निस्वार्थ के खमीर को विश्वास के संग साझा करने हेतु बुलाये गये हैं।

हम खमीर बनें

उन्होंने कहा कि येसु ने ईश्वर के राज्य से संबंधित एक दृष्टांत में खमीर का उपोयग किया, जिसकी चर्चा सुसमाचार लेखक संत मत्ती करते हैं- “स्वर्ग का राज्य उस खमीर के सदृश है, जिसे लेकर एक स्त्री ने तीन पसेरी आटे में मिलाया और सारा आटा खमीर हो गया।”(मत्ती. 13.33) विगत कुछ दिनों के आप के अनुभव, जयंती वर्ष के भाई-बहनों के अनुभवों के समान रहे जिन्होंने स्वयंसेवियों के रूपमें अपने को दिया- जैसे की विगत साल का जयंती वर्ष- यह ईश्वरीय  राज्य के आने की तरह है विशेषकर एक खास विशेषता- स्वार्थहीनता के कारण।

स्वयंसेवियों का दल
स्वयंसेवियों का दल   (@Vatican Media)

स्वार्थहीनता का खमीर

संत पापा ने कहा कि स्वार्थहीनता अपने में एक खमीर की भांति है जो मानव के, नौतिक और आध्यात्मिक आयामों को एक समाज में विकसित करता है, और यह “ईश्वर के शहर” का एक विश्षिट गुण है। एक दुनिया जो अपने में एक स्वार्थ के तर्क से प्रभावित है, जहाँ “विकास” की शब्दवाली अपने में आर्थिक-वित्तीय अर्थ तक सीमित होकर रह जाती है, यह महत्वपूर्ण है कि हम सच्ची मानसिकता का विचार करें और उसके अनुरूप जीवनयापन करें जो हमें सामग्र मानवीय विकास की ओर अग्रसर करता है। इस मानसिकता को हम सुसमाचार में पाते हैं, जो हमें कहता है, “यदि तुम उन्हीं की भलाई करते हों, जो तुम्हारी भली करते हैं तो इस में तुम्हारावपुण्य क्या है? पापी भी ऐसा करते हैं। यदि तुम उन्हीं को उधार देते हो, जिन से वापस पाने की आशा करते हो, तो इसमें तुम्हारा पुण्य क्या है।?(लूका. 6.33-34)

संत पापा लियोः स्वयंसेवियों के प्रति कृतज्ञता

येसु के खमीर से- मानव की मुक्ति

संत पापा ने लियो ने कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, येसु ख्रीस्त दुनिया में स्वर्गीय राज्य की खमीर लेकर आयें। उन्होंने उसे हमारे बीमार मानवता के आटे में, अपने बलिदान के अनुरूप लोहू और पानी तथा पवित्र आत्मा की आग से मिलाया जिससे वे हमें अंदर से चंगाई प्रदान कर सकें। अपने मृत्यु और पुनरूत्थान के उपरांत, उन्होंने अपने शिष्यों को भेजा, उसी पवित्र आत्मा की शक्ति से, जिससे वे दुनिया में उनके प्रेम, न्याय और शांति के राज्य की निशानी और माध्यम बन सकें। यह हमारे लिए सुसमाचार की घोषणा में पूरी होती है, उससे भी बढ़कर एक जीवन के द्वारा जो सुसमाचार के अनुरूप हमें विचारने और व्यवहार करने में मदद करता है।

संत पापा लियो का आशीर्वाद
संत पापा लियो का आशीर्वाद   (ANSA)

संत पापा ने कहा कि इसकी एक विशेष निशानी उदारता है जिसे आप ने इन कुछ दिनों यहाँ मैड्रिड में व्यक्त किया है। इसके लिए आप को धन्यवाद। शायद सांख्यिकी इसे अभिव्यक्ति नहीं करती लेकिन हम सभी जानते हैं, इन दिनों में, शहर का विकास हुआ है, क्योंकि यह ईश्वर के राज्य के निकट आया है, आप सभों को धन्यवाद। “क्या यह हमारी योग्यता के परिणाम हैं? नहीं, ये सारी चीजें उनकी कृपा हैं। यह हमारे लिए रहस्य है-ईश्वर का प्रेम, जो सूर्य और तारों को गतिशील बनाते हैं,  वे उनके हृदयों को भी प्रभावित करते जिनकी भेंट उनसे हुई है”, येसु ख्रीस्त स्वयं इसे हमारे लिए कहते हैं, “लेने की अपेक्षा देना अधिक सुखद है”। (प्रेरित. 20.35)

संत पापा ने कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों, हम इस मार्ग में आइए निरंतर आगे बढ़ते जाये, नम्रता और दीनता में, बिना किसी उपधारणा के, लेकिन विश्वास में सुदृढ़ता और उदारता में सेवा भाव से। कुंवारी मरियम हमें सदैव और हर जगह स्वर्गीय खमीर होने की कृपा प्रदान करें। आप सभों को धन्यवाद, ऱोम में मिलते हैं।

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09 जून 2026, 11:43