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संत पापा लियो 14वें संत पापा लियो 14वें   (ANSA)

संत पापा लियोः येसु हमारे जीवन के सब कुछ हैं

संत पापा लियो ने “दाई किंडम कम” को अपना संदेश पेषित करते हुए सुसमाचार का साक्ष्य देने को प्रोत्साहित किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने “दाई किंडम कम” अंतरधार्मिक वार्ता प्रार्थना, क्रार्यकम को अपना विडियो संदेश  प्रेषित करते हुए अपना आध्यात्मिक समीप्य प्रदान किया।

संत पापा ने अपने संदेश में कहा कि हर साल, आगमन के समय में ख्रीस्तीय ईश्वर के इन वचनों को घोषित करते हैं, “आओ, मुक्तिदाता”। इसके साथ ही हम नबी इसायस की भविष्यवाणी एम्मानुएल के जन्म को घोषित करते हैं जिसका अर्थ है ईश्वर सदैव हमारे संग हैं। इस पूरी अवधि में कैरोल के गीतों में हम इस बात को निरंतर घोषित करते हैं, “आओ, ईश्वर हमारे संग” जो हमारे जीवन में उनकी उपस्थिति की तमन्ना को व्यक्त करती है। हम इस बात की आशा गहराई से करते हैं कि वे हमें पापों, हमारी मूर्खता और सभी प्रकार के हानिकार चीजों से बचायें। हम उन चीजों से चंगाई की आशा करते हैं जिनसे हम चोटिल हैं जिनसे विश्व घायल और टूटी है। इस बात को जानते हुए भी ईश्वर सर्वशक्तिमान और सर्वोत्त्कृष्ट हैं, हम उन्हें सचमुच में अपने निकट रहने का साहसपूर्ण निवेदन करते हैं- दूर नहीं बल्कि अपने निकट। नबी के संग हम इस बात को घोषित करने की चाह रखते हैं, “ओह, यदि तू आकाश फाड़ कर उतरे, तेरे आगमन पर पर्वत काँप उठें।

ईश्वर की निकटता

संत पापा ने कहा कि यह सच है कि हम कई बार ठोकर खाते और कई बार ईश्वर को भूल जाते हैं, अपने हृदय की गहराई में यह जानते हैं कि सिर्फ वे हमारी जीवन की गहरी चाहतों को और हमारी आंतरिक बेचैनियों को सांत्वना से भर देते हैं। इस अति सुन्दर अभिव्यक्ति को हम संत अगुस्टीन के वचनों में पाते हैं, “तुने हमें अपने लिए गढ़ा है हे ईश्वर, और हमारे हृदय अपने में तक तब बेचैन हैं जब तक वे तुझ में आराम न करें।” येसु में, ईश्वर को हम सचमुच निकट पाते हैं। उन्होंने अपने को शरीर में व्यक्त किया, और पवित्र आत्मा के माध्यम अब वे हमारे बीच में हैं।

येसु की उपस्थिति सदैव हमारे संग

संत पापा ने कहा कि पास्का के इन सप्ताहों में अब “अल्लेलूया” मुख्य रूप से हमारे गान हैं, जैसे कि हम मृतकों में से पुनर्जीवित येसु की महिमा और कृतज्ञता के भाव अर्पित करते हैं। वे अब भी हमारे बीच ईश्वर हैं। वहीं हम सुसमाचारों के माध्यम इस बात से वाकिफ होते हैं कि वे जो उनके अति निकट रहें पुनरूत्थान उपरांत, हमेशा उन्हें नहीं पहचाना। यहाँ तक की मरियम मगदलेना ने भी शुरू में पुनर्जीवित येसु को एक माली समझा। यद्यपि उन्हें तुरंत नहीं पहचाना गया, वे सचमुछ में वहाँ उपस्थित थे। और येसु आज भी उपस्थित है, क्योंकि जब वे अपने पिता के पास लौटे उन्हें हमें अनाथ नहीं छोड़ा (यो. 14.18)।

येसु हमारे सब कुछ

संत पापा लियो ने कहा, प्रिय मित्रो, ख्रीस्त हमारे लिए सब कुछ हैं। उनमें हम जीवन की पूर्णत और उसके अर्थ को पाते हैं। हम इस अनुभूति के बारे में चुपचाप नहीं रह सकते हैं। हमें इसे साहस में घोषित करने की जरुरत है (मत्ती.10.27) क्योंकि यह सचमुच में सुसमाचार है जिसे हमें साझा करने की जरुरत है। ईश्वर हमारे संग हैं, और हमारी मुलाकात उनसे हुई है और हम उन्हें दूसरों को बतलाते हेतु बुलाये गये हैं। इन दिनों “तेरा राज्य आवे” में ऐसा करने हेतु हमारे लिए एक उचित समय है, हम दूसरों के लिए प्रार्थना करें, उनकी भेंट मुक्तिदायी ईश्वर के प्रेम से हो जो येसु में व्यक्त किया गया है।

ख्रीस्त का साक्ष्य

प्रिय भाइयो एवं बहनों, अपने संबोधन का अंत पास्का जागरण में दिये गये अपने प्रवचन से करते हुए कहा, “उस मिलन का जिसका साक्ष्य हम देना चाहते हैं- अपने विश्वास के वचनों और करूणा के कार्य से- हम अपने जीवन में अल्लेलूया का “गान” करते हुए ऐसा करते हैं, जिसे हम अपने ओंठो से घोषित करते हैं।” नारियाँ जिस भांति शीघ्रता में चेलों के पास गयीं, वैसे ही हमें बाहर निकलने की चाहत होनी चाहिए...जिससे हम येसु ख्रीस्त के सुसमाचार को घोषित कर सकें कि वे मृतकों में से जी उठें हैं, उनके संग जी उठते हुए हम भी उनकी शक्ति द्वारा एक नयी शांतिमय और एकता भरी दुनिया को, असंख्य लोगों जीवन प्रदान कर सकते हैं, क्योंकि यद्यपि बहुत से ख्रीस्तीय हैं, लेकिन ख्रीस्त एक हैं।

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14 मई 2026, 15:53