पोम्पेई के त्रापानी भवन में लोकोपकारी कार्यकर्त्ताओं के प्रतिनिधियों के साथ, 08.05.2026 पोम्पेई के त्रापानी भवन में लोकोपकारी कार्यकर्त्ताओं के प्रतिनिधियों के साथ, 08.05.2026 

पोम्पेई पुण्यस्थल के लोकोपकारी कार्यकर्त्ताओं से सन्त पापा लियो

सन्त पापा लियो 14 वें ने पोम्पेई के त्रापानी भवन में शुक्रवार को मरियम स्थल से जुड़े लोकोपकारी कार्यकर्त्ताओं को सम्बोधित कर ज़रूरतमन्दों के प्रति उनके नेक कार्यों के लिये हार्दिक आभार व्यक्त किया। इनमें धर्मसमाजी और धर्मसंघी पुरोहितों एवं धर्मबहनों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों के प्रतिनिधि शामिल थे।

वाटिकन सिटी

पोम्पेई, शुक्रवार, 8 मई 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा लियो 14 वें ने पोम्पेई के त्रापानी भवन में शुक्रवार को मरियम स्थल से जुड़े लोकोपकारी कार्यकर्त्ताओं को सम्बोधित कर ज़रूरतमन्दों के प्रति उनके नेक कार्यों के लिये हार्दिक आभार व्यक्त किया। इनमें धर्मसमाजी और धर्मसंघी पुरोहितों एवं धर्मबहनों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों के प्रतिनिधि शामिल थे।

अभिवादन

उदारता के कार्यों में संलग्न प्रतिनिधियों का अभिवादन कर सन्त पापा ने कहा कि वे उनसे मिलकर अत्यन्त प्रसन्न थे। उन्होंने पोम्पेई के महाधर्माध्यक्ष तोमासो कापुतो द्वारा उनके स्वागत में कहे शब्दों के लिये आभार व्यक्त किया और कहा कि सन्त बारतोलो के पदचिन्हों पर अपनी पोम्पेई यात्रा की शुरुआत करना उनके लिये सौभाग्य की बात थी, जिन्हें उन्होंने विगत वर्ष 19 अक्टूबर को सन्त घोषित कर कलीसिया में वेदी का सम्मान प्रदान किया था।

सन्त पापा ने स्मरण कराया कि सन्त बारतोलो पोम्पेई घाटी को “प्रेम की एक ऐसी जगह बताते थे जो दिल को खुश कर देती है”, “विश्वास और उदारता के विजय का स्थल” जिन्हें उन्होंने: “एक ही उड़ान में जुड़े हुए दो पंख” निरूपित किया था।  

सन्त पापा ने कहाः "यह वास्तविकता अभी भी बहुत जीवित और स्पष्ट है। यहाँ, इस मरियम तीर्थ पर प्रतिदिन के कार्यों में प्रभु येसु ख्रीस्त के फिर से जी उठने की ताकत महसूस की जा सकती है, जो प्रेमपूर्वक सुसमाचार के उत्तम जीवन के लिए दिलों को फिर से ज़िंदा करती है। यहाँ, उन्होंने कहा, "उदारता का मंदिर" और "विश्वास का मंदिर" एक-दूसरे को समर्थन देते हैं।"

उदार कार्यों की प्रशंसा  

सन्त पापा ने पोम्पेई तीर्थस्थल द्वारा संचालित कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहाः "प्रार्थना स्वागत-सत्कार, प्रशिक्षण एवं शिक्षा केन्दों, परिवार-घरों तथा सन्त पापा फ्राँसिस के नाम पर बने सूप किचन में इतने सारे लोगों के स्वागत, प्रेम, सेवा और दिल खोलकर काम करने को प्रेरित करती है तथा प्रेम उन लोगों के अंगों में जो दुख झेलते हैं और उससे भी अधिक उनकी आत्माओं में ऐसे चमत्कार करता है जो हर कोशिश और उम्मीद से कहीं अधिक बढ़कर होते हैं।"

सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि जब सन्त बार्थोलो पहली बार पोम्पेई पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहां बहुत गरीबी थी, मलेरिया फैला था तथा डाकुओं का आतंक था। फिर भी, उन्होंने हर किसी में येसु मसीह का चेहरा देखा: युवाओं और वयोवृद्धों में, और खासकर, अनाथों और कैदियों के बच्चों में जिन्हें उन्होंने अपनी कोमलता से ईश्वर के दिल की धड़कन महसूस कराई।

विश्वास और कृपा का स्थल

सन्त पापा ने याद किया कि जो लोग बार्थोलो से कहते थे कि उनके युवाओं की नियति भी उनके  माता-पिता जैसी होती है तो उनका जवाब था कि प्रेम सबसे मुश्किल बच्चों को भी अच्छा करने के लिए प्रेरित कर सकता है और हर कोशिश में केवल उदारता ही विजय को सुनिश्चित कर सकती है। सन्त पापा ने कहा कि वे सही थे और अपने विश्वास एवं लगन से उन्होंने इस स्थल को ख्रीस्तीय जीवन एवं मरियम भक्ति का एक विश्वविख्यात स्थल बना दिया।

सन्त पापा ने कहा कि इन सब नेक कार्यों का आधार थी प्रार्थना और विशेष रूप से रोज़री माला विनती, जिसे इस पवित्र जगह और शहर की नींव में एक निशान के तौर पर रखा गया है, यह वह छिपा हुआ इंजन है जो बाकी सब कुछ मुमकिन बनाता है। अस्तु, उन्होंने कहाः "मैं आप सभी से गुज़ारिश करता हूँ कि इस प्राचीन और खूबसूरत भक्ति को हमेशा जीवित रखें और इसका प्रसार करें, जिसके माध्यम से, मरियम की सीधी और माँ स्वरूप आँखों से येसु के जीवन के रहस्यों पर मनन-चिन्तन करते हैं। जैसा कि सन्त जॉन पौल द्वितीय अपने प्रेरितिक पत्र रोज़ारियुम विरजीनिस मरिये में लिखते हैं, "जो कुछ उन्होंने किया है वह हमारे दिलों में उतरता है और हमारे जीवन को रूपान्तरित कर देता है।"

प्रार्थना के स्त्री-पुरुष बनें

सन्त पापा ने सभी उपस्थित प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे प्रार्थना के स्त्री-पुरुष बनें ताकि ईश्वर से आनेवाले प्रकाश को प्रतिबिम्बित कर सकें। उन्होंने कहाः "इस तरह आप अपने कामों और अपनी बातों से, संत बार्थोलो द्वारा प्रज्वलित प्रेम की लौ को जलाएं रखेंगे। आप सेवा, सम्वाद और विश्वासमय जीवन में आज के इस शानदार युवावर्ग के लिये भरोसेमंद आदर्श और समझदार मार्गदर्शक बनेंगे।"

सन्त पापा ने कहा कि पोम्पेई का तीर्थ कृपा का स्थल है, जहाँ रोज़री विनती की माता और सन्त बार्थोलो, सभी आयु और परिस्थितियों के स्त्री पुरुषों को एकत्र कर, उस सार्वभैमिक प्रेम के एकमात्र स्रोत, ईश्वर, तक ले जाते जो विश्व में शांति और सद्भाव को प्रोत्साहन देते हैं।

सन्त पापा लियो ने सभी को आमंत्रित किया कि वे माँ मरियम से तथा सन्त बारथोलो से जुड़ें रहें  तथा इस विश्वास के साथ सम्पूर्ण मानवता को मरियम के संरक्षण के सिपुर्द करें कि उनकी कृपा से कोई भी चीज़ हमें अच्छा करने से नहीं रोक पाएगी तथा यहां और हर जगह शांति के भविष्य की हमारी उम्मीद पूरी होगी।

अन्त में, उदार कार्यों में संलग्न सभी लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए, सन्त पापा ने कहाः "आप जो करते हैं उसके लिए धन्यवाद! उदारता और भरोसे के साथ आगे बढ़ते रहें। मैं आपको प्रार्थना में अपनी याद का भरोसा दिलाता हूँ, मैं आप सबको स्वर्ग की रानी माँ मरियम और संत बार्थोलो के सिपुर्द करते हुए आपको अपने सारे हृदय से आशीर्वाद देता हूँ। पोम्पेई की पवित्र कुँवारी रोज़री माला की रानी, ​​हमारे लिए प्रार्थना करें! संत बार्थोलो, हमारे लिए प्रार्थना करें!"

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08 मई 2026, 11:17