देवदूत प्रार्थना में पोप : येसु का प्रेम हमारे अंदर प्रेम उत्पन्न करता है
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, सोमवार, 11 मई 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में रविवार 10 मई को संत पापा लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।
आज के सुसमाचार पाठ में हमने उन शब्दों को सुना जिन्हें येसु ने अंतिम व्यारी के दौरान शिष्यों से कहे थे। जब उन्होंने रोटी और दाखरस को अपने प्यार की जीवित अभिव्यक्ति में बदल दी, ख्रीस्त करते हैं: "यदि तुम मुझे प्यार करोगे तो मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे।" (यो. 14:15)
पोप लियो ने कहा, "यह बात हमें इस गलतफहमी से मुक्त करती है कि हमसे प्यार इसलिए किया जाता है क्योंकि हम आज्ञाओं का पालन करते हैं, मानो कि हमारा धर्मी होना ईश्वर के प्यार के लिए जरूरी शर्त हो।" इसके बदले, उन्होंने कहा, "ईश्वर का प्यार हमारे धर्मी होने की शर्त है।"
येसु का प्रेम ही हमारे अंदर प्रेम उत्पन्न करता है
हम ईश्वर की इच्छा अनुसार उनकी आज्ञाओं का पालन, तभी वास्तव में करते हैं, जब हम हमारे लिए उनके प्यार को पहचानते हैं, जैसा ख्रीस्त दुनिया को दिखाते हैं। इस तरह येसु के शब्द एक निमंत्रण है कि हम उनसे संबंध जोड़ें, न कि भेद छिपाना या संदेहस्पद चेतावनी देना।
यही कारण है कि प्रभु हमें एक-दूसरे से वैसा ही प्यार करने की आज्ञा देते हैं जैसा उन्होंने हमसे किया है (यो.13:34): यह येसु का प्यार है जो हमारे अंदर प्यार को बढ़ाता है। मसीह खुद सच्चे प्यार के पैमाने हैं, सच्चे प्यार के सिद्धांत हैं: वह प्यार जो हमेशा सच्चा, पवित्र और बिना किसी शर्त के होता है। वह प्यार जो न तो "लेकिन" जानता है और न ही "शायद", वह प्यार जो बिना कुछ चाहे देता है, वह प्यार जो बदले में कुछ लिए बिना जीवन देता है। क्योंकि ईश्वर ने हमसे पहले प्यार किया है, हम भी प्यार कर सकते हैं और जब हम सचमुच ईश्वर से प्यार करते हैं, एक दूसरे से भी सचमुच प्यार कर सके हैं। यह खुद जीवन है : जिस प्रकार केवल वे ही जी सकते हैं जिन्हें जीवन मिला है, वैसे ही सिर्फ वे ही प्यार कर सकते हैं जिन्हें प्यार मिला है। इसलिए प्रभु की आज्ञाएँ जीवन जीने का एक तरीका है जो हमें झूठे प्यार से चंगा करते हैं। एक आध्यात्मिक जीवनशैली है जो मुक्ति का रास्ता है।
प्रभु हमारे साथ रहने का वादा करते हैं
येसु हमसे प्यार करते हैं वे हमें जीवन की परीक्षाओं में अकेला नहीं छोड़ते; वे हमें सहायक, यानी मध्यस्थ, “सच्चाई की आत्मा” (यो. 14:17) की प्रतिज्ञा करते हैं। यह एक ऐसा वरदान है जिसे “दुनिया तब तक ग्रहण नहीं कर सकती” , जब तक कि वह बुराई में रहती है, गरीबों पर जुल्म करती है, दुर्बलों को अलग करती और बेगुनाह लोगों को मारती है। दूसरी ओर, जो लोग सभी के लिए येसु के प्यार का प्रत्युत्तर देते हैं, वे पवित्र आत्मा में एक ऐसा साथी पाएंगे जो कभी कमजोर नहीं होता। येसु कहते हैं, “तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और तुम में रहेगा।” इसलिए हम ईश्वर की गवाही दे सकते हैं, जो हमेशा और हर जगह प्यार है। प्यार मानव के दिमाग का विचार नहीं है, बल्कि दिव्य जीवन की सच्चाई है, जिसके जरिए सभी चीजें कुछ नहीं से बनाई गईं और मौत से बचाई गईं।
येसु ने बेटे होने की पहचान साझा की
संत पापा ने कहा, हमें सच्चा और अमर प्यार देकर, येसु हमारे साथ प्यारे बेटे के रूप में अपनी पहचान साझा करते हैं: “मैं पिता में हूँ, और तुम मुझ में हो, और मैं तुम में हूँ।” (20)। जीवन का यह सब कुछ शामिल करने वाला मिलन आरोप लगानेवाले को गलत साबित करता है – सहायक के दुश्मन को, जो हमारे बचानेवाले का विरोध करता है। वास्तव में, जहाँ पवित्र आत्मा सच्चाई की ताकत है, वहीं आरोप लगाने वाला “झूठ का पिता” है (यो. 8:44), जो मानव को ईश्वर के खिलाफ और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहता है। येसु, जो हमें बुराई से बचाकर और कलीसिया में भाई-बहनों के रूप में एक करके करते हैं, यह उनके काम के बिल्कुल उल्टा है।
तब उन्होंने माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, "प्यारे मित्रो, इस वरदान के लिए कृतज्ञता से भरकर, आइए, हम अपने आपको दिव्य प्रेम की माता, कुँवारी मरियम की मध्यस्थता को सिपूर्द करें।
इतना कहकर संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।
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