संत पापा लियो 14वें सपियंजा महाविद्ययालय में संत पापा लियो 14वें सपियंजा महाविद्ययालय में 

संत पापा लियो- शांति के शिल्पकार बनें

संत पापा लियो ने रोम के सपियंसा महाविद्यालय की भेंट करते हुए वहाँ के विद्यार्थियों और शिक्षण कार्य में संलग्न सदस्यों को अपने संबोधन में शांति के शिल्पकार बनने का आहृवान किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने गुरूवार की प्रातः रोम के सपियंसा महाविद्यालय की भेंट करते हुए वहाँ के विद्यार्धियों और शिक्षण कार्य में संलग्न सदस्यों से भेंट की।

संत पापा लियो ने महाविद्यालय के रेक्टर, सिविल अधिकारी, प्रध्यापकों, शोद्धकर्ताओं, तकनीकी प्रबंधकों और विद्याथियों को संबोधित करते हुए उन्हें शांति के शिल्पकार बनने का आहृवान किया। 

संत पापा ने कहा कि मैंने सपियंसा – रोम के महाविद्यालय समुदाय से मिले निमंत्रण को खुशी से स्वीकार किया। आपका महाविद्यालय विभिन्न विषयों का एक बेहतरीन क्रेन्द स्वरुप जाना जाता है और साथ ही, यह शिक्षा के श्रेत्र में अपनी निष्ठा के लिए भी विख्यातहै, जिसमें अल्प आर्थिक मद छात्र, दिव्यांग, कैदी और युद्ध क्षेत्रों से भागे हुए लोग शामिल हैं। उदाहरण के लिए, मैं इस बात की तारीफ़ करता हूँ कि रोम धर्माप्रांत और सपियंसा ने इस सहमति पर हस्ताक्षर किये हैं कि गाज़ा पट्टी लोगों के लिए यूनिवर्सिटी में मानवीय आधार पर अध्ययन हेतु प्रवेश के द्वार खुले रखें जायेंगे। इसलिए यह मेरे लिए जरूरी था, कि ऱोम के धर्माध्यक्ष स्वरूप मैं आप से मिलूं। एक प्रेरित के हृदय से मैं यहाँ के विद्यर्थियों से मिलने और शिक्षण कार्य में संलग्न सदस्यों से बातें करने की चाह रखता था।

सच्चाई की चाह

महाविद्यालय शहर की सड़कें, जहाँ से मैं यहाँ तक पैदल आया,  रोज़ाना बहुत सारे युवा विद्यार्थी गुज़रते हैं,  जिन में विभिन्न भावनाएँ होती हैं। मैं कल्पना करता हूँ कि आप कभी-कभी बेफ़िक्र, अपनी युवास्था में आनंदित होते हैं, जो भयानक अन्याय से भरी इस  दुनिया में आपको यह महसूस कराती है कि भविष्य संवारना अभी बाकी है और जिसे कोई भी आप से छीन नहीं सकता है। इसलिए, आप जो पढ़ाई करते, इन वर्षो में जो दोस्ती करते हैं, और विभन्न विचारकों से मिलते हैं, वे इस बात की प्रतिज्ञा हैं कि हमारे आस-पास की सच्चाई से पहले, वे कौन-सी बातें हैं जो हमें बेहतर होने को मदद कर सकती हैं। जब सच्चाई की चाहत शोध  बन जाती है, तो पढ़ाई में हमारी हिम्मत एक नई दुनिया की उम्मीद का साक्ष्य बनती है।

संत पापा लियो का अभिवादन
संत पापा लियो का अभिवादन   (ANSA)

जुनून कम न हो

आप जानते हैं कि मैं आध्यात्मिक रूप से संत अगुस्टीन से जुड़ा हुआ हूँ, जो एक बेचैन नौजवान थे: उन्होंने भी बड़ी गलतियाँ कीं, लेकिन सुंदरता और ज्ञान के लिए उनका जुनून कम नहीं हुआ। इस संदर्भ में मुझे आप के द्वारा बहुत से सवाल मिले- ज़ाहिर है,  उन सब का जवाब देना मुमकिन नहीं है, लेकिन मैं उन्हें अपने जेहन में रखता हूँ, और आशा करता हूँ कि हर किसी को इससे संबंधित और अधिक वार्ता करने का अवसर मिले। यही कारण है कि हम महाविद्यालय में पुरोहितों के अस्तित्व को पाते हैं, जहाँ विश्वास में आपके सावलों की उत्पत्ति होती है।

संत पापा लियो ने कहा कि चिंता का एक दुखद पहलू भी है: हम यह सच्चाई को नकार नहीं सकते हैं कि  बहुत से युवा लोग संघर्ष कर रहे हैं। हर कोई मुश्किल समय से गुज़र रहा है; हालाँकि, कुछेक को ऐसा लगता है कि यह कभी खत्म नहीं होगा। आज, यह उम्मीदों के ब्लैकमेल और कार्य करने की क्षमता पर ज़्यादा निर्भर करता है। यह एक बिगड़े हुए सिस्टम से प्रसारित झूठ ​​है, जो लोगों को सिर्फ़ नंबरों में बदलता, प्रतियोगिता को बढ़ाता और हमें चिंता के भंवर में छोड़ देता है। बहुत से युवाओं को यही आध्यात्मिक बेचैनी सताती है जहाँ हम यह सोचते हैं कि हमारे पास जो कुछ भी है, उसका योग नहीं है, न ही पृथ्वी पर  शांतिमय तरीके से हसिल की गई कोई वस्तु ही हमारी है। हम एक इच्छा हैं, कोई एल्गोरिदम नहीं। हमारी यह विशेषता मुझे आप से दो सवालों को साझा करने को प्रेरित करती है।

संत पापा लियो का आशीर्वाद
संत पापा लियो का आशीर्वाद

तुम कौन हो?

आप युवाओं से, यह बेचैनी पूछती है: "तुम कौन होॽ" वास्तव में, हम जैसे हैं, वैसे ही रहने की चाह रखते हैं जो नर और नारी स्वरूप ज़िंदगी की विशेष निष्ठा है। "आप कौन हैं?" यह वह सवाल है जो हम एक-दूसरे से पूछते हैं; वह सवाल जिसे हम चुपचाप ईश्वर से पूछते हैं; इस सवाल का जवाब सिर्फ़ हम ही दे सकते हैं, फिर भी इसका जवाब हम कभी अकेले नहीं दे सकते हैं। हम अपने में सीमित हैं, वहीं हमारी भाषा है, हमारी संस्कृति है: इसी कारण यह बहुत ज़रूरी है कि हमारे यूनिवर्सिटी के वर्ष बेहतर मिलनों के समय बनें।

इसलिए, हममें से जो बड़े हैं, नाराज जवानी सवाल करती है, "तुम किस तरह की दुनिया छोड़कर जा रहे होंॽ" एक ऐसी दुनिया जो युद्धों और युद्ध की बातों से बुरी तरह नष्ट हो गई है। यह तर्क की बुराई है, जो राजनैतिक भूमि के हर सामाजिक रिश्ते में फैल गई है। इसलिए, दुश्मन बनाने वाली सरल सोच को ठीक करना होगा, खासकर यूनिवर्सिटी में, मुश्किलों पर ध्यान देकर और स्मृति को समझदारी से उपयोग करते हुए। खासकर, बीसवीं सदी की दुखद घटना को नहीं भूलना चाहिए। मेरे पूर्ववर्ती अधिकारियों की बातें "अब और युद्ध नहीं" का नारा, जो इटली के संविधान में युद्ध को नकारने संग मेल खाती है, हमें युवाओं के दिलों में न्याय की भावना के साथ एक आध्यात्मिक जुड़ाव से संयुक्त करता है,  कि हम खुद को विचारधाराओं और देश की सीमाओं में न बांधें।

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन   (ANSA)

कृत्रिम बुद्धिमत्ता- विकास और उपयोग पर नजर

संत पापा ने कहा, उदाहरण के लिए, पिछले साल, दुनिया भर में और खासकर यूरोप में, सैन्य खर्च में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी हुई है। हमें "सुरक्षा" के संबंध में ऐसा दोबारा हथियार जमा नहीं करना चाहिए जो तनाव और असुरक्षा को बढ़ावा देता है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश, कूटनीति में भरोसे को कम करता है, और ऐसे अमीर लोगों को अमीर बनाता है जिन्हें आम भलाई की कोई परवाह नहीं है। हमें सैन्य और सामाजिक  दोनों क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और उसके उपयोग पर भी नज़र रखनी चाहिए, ताकि यह मानवीय फैसलों को ज़िम्मेदारी से न हटाए और झगड़ों की दुखद घटना को और न बढ़ाए। यूक्रेन, गाज़ा और फ़िलिस्तीनी इलाकों, लेबनान और ईरान में जो हो रहा है, वह युद्ध और नई तकनीकी में अमानवीय विकास को व्यक्त करता है जो तबाही के चक्र में है। इसके विपरीत हम अपने को पढ़ाई, शोध और निवेश की  दिशा में जाने दें: उन्हें ज़िंदगी हेतु एक बड़ा "हाँ" बनने दें! मासूम ज़िंदगी, युवा ज़िंदगी, शांति और न्याय की मांग करने वाले लोगों की ज़िंदगी के लिए हाँ!

दूसरी साझा निष्ठा हमारे लिए पर्यावरण से जुड़ा है। जैसा कि संत पापा फ्रांसिस ने हमें अपने विश्व पत्र लौदातो सी में बताया, "इस संदर्भ में हम जलवायु में परिवर्तन को देखते हैं जो वैज्ञानिक रूप में प्रमाणित हमारे लिए एक चिंताजनक विषय है। एक दशक से ज़्यादा समय बीत चुका है, और नेक इरादों और उस दिशा में कोशिशों के बावजूद, हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं।

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन   (ANSA)

युवा हार न मानें

इस संदर्भ में,  मैं आप सभी युवाओं को विशेष रुप से प्रोत्साहित करता हूँ, कि आप हार न मानें, बल्कि अपनी चिंता को भविष्यवाणी में बदलें। विश्वासी, जानते हैं कि इतिहास बेबस होकर मौत के हाथों में नहीं पड़ता, बल्कि हमेशा सुरक्षित रहता है, एक ऐसे ईश्वर द्वारा जो कुछ नहीं से जीवन प्रदान करते हैं, जो बिना लिये देते, बिना खाए बांटते हैं। आज, एक अधिकार और उपभोक्तावादी सोच का खत्म होना ही एक नई सच्चाई का रास्ता खोलता है हम जिसे उभरता पाते हैं: न्याय का अध्ययन करें, उसे बढ़ाएं और उसकी रक्षा करें। मेरे और हमारे कई भाइयों और बहनों के साथ, सच्ची शांति के शिल्पकार बनें: एक ऐसी शांति जो हथियार न डाले, जो विनम्र और दृढ़ रहे, जो लोगों के बीच मेल-जोल और धरती की सुरक्षा हेतु कार्य करें।

संत पापा लियो ने कहा कि आज आपकी समझदारी और हिम्मत की ज़रूरत है। असल में, आप उन लोगों की मदद कर सकते हैं जो आपसे पहले आए, ताकि वे एक असल क्षितिज फिर से बना सकें, ताकि हम जिस स्थिति में हैं, एक तीव्रता में उसी स्थिति पर ही न रुक जाएं। हमें परिभाषित करने से कार्य करने की ओर बढ़ना होगा: जिस समाज में बच्चे बहुत कम हैं, वह इस पर बहुत कम ध्यान देता है, आप इस बात के साक्षी हैं कि मानवता एक भविष्य के निर्माण में सक्षम है, जब हम इसे अपने विवेक में तैयार करते हैं।

संत पापा  स्मृति चिन्ह के संग
संत पापा स्मृति चिन्ह के संग   (ANSA)

आपका महाविद्यालय, जिसका नाम ईश्वर जैसा है, पढ़ाई और अनुभवों की प्रयोगशाला सदृश है, जिसमें सदियों से विवेकपूर्ण विचार का विकास हुआ है।  खास तौर पर, आप प्राध्यपक युवाओं के मन और दिल से अच्छा संबंध स्थापित कर सकते हैं। यह निश्चित रुप में एक मुश्किल ज़िम्मेदारी है, लेकिन रोमांचक भी है। अपने विद्यार्थियों पर विश्वास करना बहुत ज़रूरी है। इसलिए, खुद से अक्सर पूछें: क्या मुझे उन पर भरोसा हैॽ

शिक्षण प्रेमपूर्ण कार्य

संत पापा ने कहा कि शिक्षण एक तरह का प्रेमपूर्ण कार्य है, ठीक वैसे ही जैसे समुद्र में किसी प्रवासी को, सड़क पर किसी गरीब  को, या किसी परेशान आत्मा को बचाना। यह हमेशा मानव के जीवन से प्रेम करना है, उसकी योग्यता को समझना, ताकि सिर्फ़ ज्ञान पर निर्भर हुए बिना, युवाओं के दिलों से बातें की जा सके। अतः शिक्षण, जीवन के मूल्यों से साक्ष्य देना है: यह सच्चाई की चिंता करना है, उन चीज़ों का स्वागत करना, जिन्हें हम अभी तक नहीं समझते हैं, यह सत्य को  घोषित करना है।, ऐसे शोध या व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का क्या लाभ  जो स्वयं अपनी चेतना, न्याय की भावना और उन चीज़ों के लिए सम्मान पैदा करने में नाकाम रहता है जिन्हें नियंत्रण में नहीं किया जा सकताॽ असल में, ज्ञान सिर्फ़ व्यावसायिक लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं है, बल्कि यह समझने में भी मदद करता है कि कौन क्या है। कक्षा, इंटर्नशिप, शहर से बातचीत, थीसिस और डॉक्टरेट के ज़रिए, हर विद्यार्थी हमेशा नयी प्रेराणा पा सकता है, पढ़ाई और ज़ीवन, चीजों और लक्ष्यों में व्यवस्था ला सकते हैं।

संत पापा ने कहा, प्रियों, मैं रोज़ाना के कार्य हेतु आप को प्रोत्साहन देता हूँ, लेकिन मेरा यह आना रोम की कलीसिया और आपके मशहूर यूनिवर्सिटी के बीच एक नए शिक्षण के संयोजन की निशानी है, जो कलीसिया के अंदर उत्पन्न और विकासित हुई है। मैं आप सभी को भरोसा दिलाता हूँ कि मैं आपको अपनी प्रार्थना में याद करूँगा, और इसके साथ ही मैं पूरे सपिएंज़ा समुदाय के ऊपर हृदय से ईश्वरीय आशीष की कामना करता हूँ।  

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14 मई 2026, 16:27