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इटली के तूरिन में पुस्तक मेला 14 मई से 18 मई तक इटली के तूरिन में पुस्तक मेला 14 मई से 18 मई तक  (ANSA)

संत पापा लियोः साहित्य भ्रातृत्व और शाति का एक विद्यालय बनें

संत पापा लियो 14वें ने तुरिन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला हेतु अपना संदेश प्रेषित किया, जो इस सप्ताह उत्तरी इटली में आयोजित हो रहा है।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने तूरिन में अयोजित हो रहे अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला हेतु अपने संदेश में कहा कि साहित्य मानव सम्मान, शांति और भ्रातृत्व को बढ़ावा देते हुए युद्ध और उदासीनता की परिस्थिति में, बच्चों के लिए दुनिया में आशा उत्पन्न करे।

संत पापा ने कहा ने इटली के तूरिन में 14 से 18 मई को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला हेतु अपने तार संदेश प्रेषित करते हुए कहा, “हमें साहित्य की जरुरत है जो हर मानवीय सम्मान को, विशेष रूप से अति संवेदनशीलों को पहचान प्रदान करते हुए, भातृत्व और शांति का एक विद्यालय बनती हो।”

संत पापा लियो की ओर से भेजे गये तार संदेश में वाटिकन राज्य के सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलीनी ने तूरिन के महाधर्माध्यक्ष, कार्डिनल रॉबर्टो रेपोले के अलावे इस पुस्तक मेले में भाग ले रहे सभी प्रतिभागियों को संबोधित किया।  इसे गुरुवार की सुबह पुस्तक मेले के उद्घाटन समारोह में संचालक ने पढ़कर सुनाया। 

संत पापा लियो ने कहा कि “ऐसे समय में जब युद्ध की भयावहता और उदासीनता की ठंड घुटन उत्पन्न करती है,  बच्चे, जो  दुनिया को नई नज़रों से देखने की स्वाभाविक योग्यता रखते हैं, समाज में आशा का दीप प्रवज्वलित करते हैं।”

दिमाग का पोषण

संत पापा ने अपने संदेश में आशा व्यक्त की कि “यह आयोजन वार्ता और सहमति को बढ़ावा देने की संस्कृति के बारे में नई जागरूकता उत्पन्न करेगा।”

अपने तार संदेश में संत पापा लियो ने उन बातों को पुनः घोषित किया जो इस महीने के शुरू में वाटिकन प्रकाशान गृह के प्रतिनिधियों को संबोधित किए गये थे, जो अपनी स्थापना की शताब्दी सालगिरह पर तूरिन के समारोह में हिस्सा ले रहे हैं।

इस मौके पर, संत पापा ने ज़ोर देते हुए कहा कि “पढ़ने से दिमाग पोषित होता है, इसके द्वारा चेतना और अच्छी आलोचनात्मक समझ विकसित करने में मदद मिलती है, यह हमें कट्टरपंथ और विचारधारा के लघुपन से बचाती है।” उन्होंने “सबों से किताबें पढ़ने का भी आग्रह किया, ताकि बंद दिमाग का इलाज हो, जो कठोर रवैये और असलियत को कम समझने वाले विचारों में प्रकट होता है।”

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14 मई 2026, 16:22