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बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा लियो 14वें बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा लियो 14वें 

संत पापा लियोः कलीसिया की प्रेरिताई- सच्चाई की घोषणा

संत पापा लियो 14वें ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह की धर्मशिक्षा माला में कलीसिया की प्रेरिताई- ख्रीस्त के आगमन, हमारे स्वर्गीय निवास के बारे में चिंतन किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें अपने बुधावरीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रागँण में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात और सुस्वागतम्।

आज हम वाटिकन द्वितीय महासभा कलीसिया के धर्मसिद्धांत अध्याय सात पर चिंतन करेंगे जो ईश्वर के द्वितीय आगमन के आयाम पर प्रकाश डालता है। वास्तव में, कलीसिया पृथ्वी पर अपनी यात्रा करते हुए सदैव अपने अंतिम लक्ष्य की ओर निगाहें फेरती है, जो हमारा स्वर्गीय निवास है। यह एक महत्वपूर्ण आयाम है जिसे यद्यपि हम बहुत बार नजरअदांज या कम आंकते हैं, क्योंकि हम उन बातों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं जो हमारी आँखों के सामने उपस्थित है और जिसे हम ठोस रुप में अपने ख्रीस्तीय समुदाय से संबंधित पाते हैं।

ईश प्रजा- तीर्थयात्री कलीसिया

संत पापा ने कहा कि कलीसिया ईश प्रजा है जो इतिहास में यात्रा करती है जिसके सभी कार्यों का उद्देश्य ईश्वर के राज्य से है। येसु ने इस कलीसिया की शुरूआत मुख्य रूप से ईश्वर के प्रेम, न्याय और शांति की घोषणा करते हुए की। इसलिए, हम समुदाय और ख्रीस्त में मुक्ति के आयाम पर विचार करने और अपनी आंखों को अंतिम क्षितिज की ओर उन्मुख करने हेतु बुलाये जाते हैं, जहाँ हम अपने जीवन की सारी चीजों का निष्पादन और मूल्यांकन उसी दृष्टिकोण से करते हैं।

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन

कलीसिया ईश्वर के राज्य की स्थापना हेतु स्थापित

कलीसिया ईश्वर के राज्य की स्थापना करते हुए इस दुनिया के इतिहास में जीवनयापना करती है। वह सबों के लिए प्रतिज्ञा की इन बातों को सदैव घोषित करती है, वह इसकी पूर्णत को संस्कारों के अनुष्ठान में प्राप्त करती है, मुख्य रुप में यूखारीस्तीय बलिदान में- यह उसके तथ्य को कार्यान्वित करती और प्रेम तथा सेवा के संबंध में उनका अनुभव करती है। इससे भी बढ़कर, वह इस बात को जानती है कि वह एक स्थल और माध्यम है जहाँ ख्रीस्त से “घनिष्टता” का अनुभव किया जा सकता है, वहीं वह इस बात को स्वीकारती है कि उसके दृश्मान सीमाओं से परे मुक्ति ईश्वर के द्वारा पवित्र आत्मा को ग्रहण करने में प्राप्त होती है।

आमदर्शन समारोह में  विश्वासियों  और तीर्थयात्रीगण
आमदर्शन समारोह में विश्वासियों और तीर्थयात्रीगण

कलीसिया मुक्ति का एक संस्कार

इस संदर्भ में, संत पापा लियो ने कहा कि धर्मसिद्धांत लुमेन जेन्सियुम एक महत्वपूर्ण बात कहता है, कलीसिया अपने में, “वैश्विक मुक्ति का संस्कार है” (एल जी 48) अर्थात यह उस सम्पूर्ण जीवन और शांति की निशानी और साधन है जिसे ईश्वर ने हमें प्रदान किया है। इसका अर्थ यह है कि वह अपने को ईश्वर के परिपूर्ण राज्य से चिन्हित नहीं करती है बल्कि यह उसकी बीज और शुरूआत है, क्योंकि मानवता और ब्रह्मांड को इसकी परिपूर्णत केवल अंत में प्राप्त होगी। ख्रीस्त में विश्वास करने वाले, इसलिए पृथ्वी के इतिहास में चलते हैं, बिना हताश या निराश हुए, वे अपने जीवन को उस मिली प्रतिज्ञा में जीते हैं जो सारी चीजों को नवीन बना देंगे। (प्रका. 21.5)। इसलिए, कलीसिया अपनी प्रेरिताई को “पहले ही” येसु ख्रीस्त में ईश्वर के राज्य, और “अब तक नहीं”, प्रतिज्ञा और पहले ही पूर्णतः स्वरूप अनुभव करती है। आशा की एक निर्देशिका स्वरूप जो हमारा मार्ग प्रशस्त करती है, वह स्पष्ट रूप में अपनी प्रेरिताई की जिम्मेदारी वहन करती है जहाँ वह हर उस चीज़ का परित्याग करती जो ज़िंदगी को कमजोर और उसके विकास को रोकती है, तथा वह गरीबों, परित्यक्त, हिंसा और युद्ध के शिकार लोगों का पक्ष लेती और उनके संग चलती है जो शारीरीक और आत्मिक रुप में दुःख के शिकार हैं।

संत पापा की धर्मशिक्षा
संत पापा की धर्मशिक्षा   (ANSA)

कलीसिया की प्रेरिताई

संत पापा लियो ने कहा कि ईश्वरीय राज्य की निशानी और संस्कार के रूप में, कलीसिया पृथ्वी पर तीर्थयात्री की भांति है, जो अंतिम लक्ष्य की ओर अभिमुख, सुसमाचार के आधार पर इतिहास के आयाम को पढ़ती और उसे परिभाषित करती है, वह बुराई के हर रूप का परित्याग करती और वचन तथा कार्य से मुक्ति की घोषणा करती है जिसे ख्रीस्त मानवता में न्याय, प्रेम और शांति के राज्य स्वरूप स्थापित करने की  चाह रखते हैं। कलीसिया इस भांति अपने को घोषित नहीं करती है, बल्कि इसके विपरीत, वह अपने में व्याप्त हर चीज में ख्रीस्त की मुक्ति को दर्शाती है।

परिवर्तन हेतु बुलावा

इस परिदृश्य में, कलीसिया को विनम्रता से अपने संस्थानों की मानवीय कमज़ोरी और क्षणभंगुरता को स्वीकारने हेतु आहृवान किया जाता है, जो ईश्वरीय राज्य की सेवा में संलग्न होने के बावजूद, इस दुनिया की क्षणभंगुर छवि को धारण करते हैं। कोई भी कलीसियाई संस्थान अपने में सर्वोपरि नहीं हो सकती है, क्योंकि वे इतिहास और समय के संग अस्तित्व में होते हैं, वे अपने में निरंतर परिवर्तन हेतु बुलाये जाते हैं, अपनी संरचना और स्वरूप में नवीनता लाने हेतु, अपने संबंधों को नवीन बनाने के लिए कही जाती है जिससे वे अपनी प्रेरिताई को पूरा कर सकें।

संत पापा लियो का आशीर्वाद
संत पापा लियो का आशीर्वाद

विश्वासियों का संबंध

संत पापा लियो ने कहा कि ईश्वरीय राज्य की क्षितिज में, हमें उन ख्रीस्तीयों के बीच उस संबंध को समझने की आवश्यकता है जो अपनी प्रेरिताई को वर्तमान में पूरा करते हैं, और वे जिन्होंने पृथ्वी पर अपने जीवन को पहले ही पूरा कर लिया है और वे अब शुद्धिकरण या धन्य की स्थिति में हैं। वास्तव में, लुमेन जेन्सियुम, इस बात को सुदृढ़ता करता है कि सब ख्रीस्तीय एक कलीसिया का निर्माण करते हैं, अतः वे एकता में आध्यात्मिक चीजों को साझा करते हैं जो ख्रीस्त में स्थापित सब विश्वासियों में बना रहता है, एक फ्रतेरना सोल्लीचीतूदो- पृथ्वी और स्वर्गीय कलीसिया के बीच का संबंध जिसे हम संतों की संगति में अनुभव करते हैं विशेष रुप से धर्मविधि में। मृतकों के लिए प्रार्थना करते हुए और उनके मार्ग का अनुसरण करते हुए जिन्होंने येसु के शिष्यों स्वरूप जीवनयापना किया, हम भी अपनी यात्रा में बने रहते और ईश्वर की आराधना में मजबूत होते हैं- एक आत्मा में चिन्हित और एक धर्मविधि में संयुक्त, हमसे पहले चले गये लोगों के संग विश्वास में हम, अति पवित्र तृत्वमय ईश्वर की महिमा करते हैं।

संत पापा की धर्मशिक्षा माला

हम कलीसिया के आचार्यों के प्रति कृतज्ञता के भाव व्यक्त करते हैं जो हमें ख्रीस्तीय होने के अति सुन्दर और महत्वपूर्ण बात की याद दिलाते हैं, हम इसे अपने जीवन में पोषित करने की कोशिश करें।

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06 मई 2026, 14:45