संत पापा लियो देवदूत प्रार्थना में संत पापा लियो देवदूत प्रार्थना में  (ANSA)

संत पापा लियोः तृत्वमय ईश्वर हमारा निवास

संत पापा लियो 14वें ने पवित्र तृत्वमय ईश्वर महापर्व के अवसर पर, देवदूत प्रार्थना के पूर्व दिये गये अपने संदेश में त्रियेक ईश्वर के रहस्य पर चिंतन किया और कहा कि हमारा निवास उनमेंं है।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने पवित्र तृत्वमय ईश्वर महापर्व के अवसर पर तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के संग देवदूत प्रार्थना का पाठ किया।

संत पापा ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात और शुभ रविवार।

हमने विगत रविवार पेन्तेकोस्त के समारोह से पास्का अवधि की समाप्ति की। आज, हम तृत्वमय ईश्वर के रहस्य का समारोह मनाते हैं जो हमें अपने जीवन यात्रा पर चिंतन करने का एक अवसर देता है। हम ईश्वरीय जीवन से शुरू करते हैं जो हमें येसु ख्रीस्त में दिया गया है। यह जीवन हमारा गतिशील, अविखंडनीय और विश्वास में एकता का एक स्वरूप है जो हमें आकर्षित करता है। वास्तव में, हमारे हृदयों में पवित्र आत्मा उड़ेला गया है जो पिता और पुत्र को एकता में रखते हैं। इस भांति, कलीसिया हमारे लिए एकता का एक संस्कार बनती है, एक स्थल जहाँ हम स्वर्ग और पृथ्वी के मिलन का पूर्वाभाव, एक मिलन स्थल, प्रेम और जीवन के रुप में अनुभव करते हैं।

निकोदेमुस की उत्सुकता

संत पापा लियो ने कहा कि आज का सुसमाचार हमारा परिचय निकोदेमुस से करता है, एक महत्वपूर्ण व्यक्ति, जो उस रहस्यमय गुरू को बेहतर रूप से पहचाने को उत्सुक हैं और जो उन्हें सवाल करते हैं, निकोदेमुस उसे रात में मिलने जाते हैं जिससे उन्हें कोई भी न देखे। प्रभु येसु उनका स्वागत करते और उनकी गंभीरता भरे खोज का उत्तर देते हैं। येसु निकोदेमुस को यह सुझाव देते हुए आश्चर्यचकित करते हैं कि एक व्यस्क के लिए पुनर्जन्म लेना संभव है और वे उन्हें इस बात का अनुभव करने हेतु अग्रसर करते हैं कि वे ईश्वर के जीवन से अपने जीवन को परिवर्तित कर सकते हैं। जब येसु पवित्र आत्मा की चर्चा करते हैं, निकोदेमुस का आतंरिक जीवन सत्य से ज्योर्तिमय हो जाता है-वही सच्चाई से आज पूरी कलीसिया में मनाये जाने वाला समारोह गूंजित होता है, “ईश्वर ने दुनिया को इतना प्रेम किया कि अपने एकलौटे पुत्र को दे दिया, जिससे जो कोई उसमें विश्वास करे उसका सर्वनाश न हो लेकिन अनंत जीवन को प्राप्त करे।” और पुनः “ईश्वर ने अपने पुत्र को दुनिया में इसलिए नहीं भेजा कि वह उसे दोषी करार दे लेकिन इसलिए भेजा है कि दुनिया उसके द्वारा मुक्ति प्रप्त करें।”

एकता, शांति और मिलन

प्रिय भाइयो और बहनों, ईश्वर के रहस्य- पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा में हम निवास करते हैं, जैसे कि निकोदेमुस ने येसु की उपस्थिति में शांति का अनुभव किया। ईश्वर का जीवन अपने में शानदार और आकर्षित करने वाला है, यह हमारे हृदयों को शांति प्रदान करता है, जिसे हम बहुधा अशांत पाते हैं, और यह हमें अपने भाई-बहनों के संग पवित्र आत्मा की खुशी में मिलन हेतु मदद करता है। तृतवमय ईश्वर हमें हर चीज को और हरएक को प्रेम करने में मदद करता हैः हम अपने में इस बात को पाते हैं हर प्राणी एकता में, संबंध और मिलन में बने रहने के लिए बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर, हम इस तथ्य को समझते हैं कि विभाजन, अलगाव और विभिन्नता की उपेक्षा विध्वंस, उदासी और दुनिया में उजाड़ लाती है।

तृत्वमय ईश्वर का प्रभाव

संत पापा लियो ने कहा कि निकोदेमुस सदूकियों के दल का एक सदस्य था, इस्रराएल के महापुरोहितों की सभा एक अंग। जब वह सदूकियों के बीच में येसु के संबंध में तिरस्कार भरी बातें सुनता है तो वह सभों से इस बात हेतु निवेदन करता है कि दोषारोपण करने के पूर्व वे हरएक की बातों को सुनें। उन्होंने येसु ख्रीस्त् में पवित्र आत्मा से मिलने वाली एकता को प्राप्त किया था, जो उन्हें हृदय को नई सच्चाई और सच्ची नवीनता हेतु खोलता है। जो कोई आत्मा का स्वागत नहीं करता वह जल्द ही पुराना हो जाता है, वह उदासी, अकेलेपन का अनुभव करता और उसका हृदय आनंदहीन रहता है। इसके बदले में, प्रिय भाइयो और बहनों, आज हमारे लिए वह महोत्सव है। ईश्वर का महोत्सव हमारा त्योहार भी है। इसी कारण, कुरूथियों के नाम अपने पत्र में यह लिखते हुए कहते हैं- आनंदित हों, पूर्णतः को प्राप्त करें, एक दूसरे को प्रोत्साहन दें, शांति में निवास करें और ईश्वर का प्रेम और शांति आप के साथ बनी रहे।” (2 कुरू. 13:11)

संत पापा लियो 14वें देवदूत प्रार्थना में

और अब, देवदूत प्रार्थना के संग, हम अपने को कुंवारी मरियम की ओर उन्मुख करते हैं, उन्होंने दिव्य इच्छा को “हाँ” कहा, उनकी तरह पवित्र तृत्वमय ईश्वर के प्रेम के प्रति हमारा “हाँ” भी फलहित हो।

इतना कहने के बाद संत पापा लियो ने सभों के संग देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

इतना कहने के बाद संत पापा लियो ने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के संग देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, इस मई के महीने में पूरी कलीसिया की ओर से शांति हेतु एक विशेष अपील की आवाज उठी है, खासकर रोजरी प्रार्थना के माध्यम से, जो कड़ी के रुप में युद्ध से पीड़ितों को कुंवारी मरियम के हाथों सुपुर्द करना है। दिव्य विवेक उन अधिकारियों की अंतर आत्मा को प्रज्वलित करे जिससे वे न्यायपूर्ण शांति स्थापना हेतु कार्य कर सकें।

संत पापा ने कहा कि आज इटली 25वाँ “राहत दिवस” मानती है। मैं कृतज्ञ भरे हृदय से उन लोगों को अपना सामीप्य और प्रोत्साहन प्रदान करता हूँ जो बीमारों के निकट रहते और उनकी देख-रेख करते हैं।

इसके उपरांत संत पापा ने रोम के तीर्थायात्रियों के अलावे विश्व के विभन्न देशों से आये हुए विश्वासियों का अभिवादन किया और सभों के रविवारीय मंगल कामनाएं अर्पित की।

 

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31 मई 2026, 17:59