संत पापा लियो 14वें संत पापा लियो 14वें  (ANSA)

संत पापा लियोः विश्व की ज्योति बनने की बुलाहट

संत पापा लियो 14वें ने बोलेबियन ख्रीस्तीय महाविद्यालय की 60वीं सालगिरह पर उन्हें अपना संदेश देते हुए शिक्षा के सार पर प्रकाश डाला।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने “संन पॉबलो” बोलेबियन ख्रीस्तीय महाविद्यालय की 60वीं सालगिरह पर अपना संदेश प्रेषित किया।

संत पापा ने अपने संदेश में कहा कि इस काथलिक महाविद्यालय की साठवीं सालगिरह के अवसर पर, मैं उन सबों को शुभकामनाएं देना चाहता हूँ जो इस संस्था के अंग हैं। साठ साल की सालगिरह का जश्न हमें कलीसिया और समाज की सेवा के एक सफल मार्ग को पहचानने का अवसर देता है।

संस्थान का पहचान

उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की सबसे गहरी पहचान, सिर्फ़ तकनीकी प्रशिक्षण या केवल उपयोगी ज्ञान केन्द्र तक ही सीमित होकर न रहे। यह, सर्वप्रथम और सबसे ज़रूरी, "एक शिक्षण समुदाय है जो शोद्ध, शिक्षण और स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दी जाने वाली अलग-अलग सेवाओं के ज़रिए मानवीय सम्मान और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और विकास में पूरी तरह और बारीकी से योगदान देती है।”

मानवीय विकास को बढ़ावा

संत पापा ने अपने संदेश में कहा कि महाविद्यालय का अस्तित्व सम्पूर्ण मानवीय विकास को बढ़ावा देना है, क्योंकि सच्चे शिक्षण का उद्देश्य मानव के अंतिम लक्ष्य और उसके विभिन्न ईकाई की भलाई को प्रोत्साहित करना है जिसका वह सदस्य है। इस संरचना के अंतर्गत मानसिक और नैतिक योग्यता, ज़िम्मेदारी स्वतंत्रता और जनसामान्य की भलाई को बढ़ावा देना है जिससे व्यक्ति में सोचने-विचारने की योग्यता, खुली वार्ता के भाव और सही रूप में कार्य करने की योग्यता विकसित की जा सके।

आदर्श

संस्थान के आदर्श वाक्य- वेरितास इन कारिताते- प्रेम में निष्ठा के संबंध में संत पापा ने कहा कि यह अभिव्यक्ति महाविद्यालय की प्रेरिताई को संक्षेपित करती है जो विश्वास की आधारशिला में निहित है। ख्रीस्तीय परंपरा के अनुरूप, सच्चाई अपने में सिर्फ एक बैद्धिक या अमूर्त विचार नहीं है बल्कि यह अपने को येसु ख्रीस्त के संग स्थापित करना है, जो अपने को विशेषरूप से “सत्य” (यो.14.6) स्वरुप प्रकट करते हैं, जो सम्पूर्ण रूप में अपनी मानवता को और अपनी बुलाहट को हमारे लिए स्पष्ट करते हैं।

सत्य की पहचान

संत पापा ने कहा कि इस संदर्भ में, सत्य, जिसकी खोज बैद्धिक सख्ती और वैज्ञानिक ईमानदारी में की जाती है, वह अपने को प्रेम के क्षितिज में व्यक्त करता है, क्योंकि सच बोलना, एक ख्रीस्तीय के लिए, प्रेम का कार्य है जो मानव को बेहतर बनाता, उसे चंगाई प्रदान करता है, और उसे पूर्णता की ओर ले जाता है। सत्य की पहचान करना एक व्यक्तिगत चेहरे और एक संबंध स्थापित करने वाले पहलू को व्यक्त करता है, जो ज्ञान को हावी होने, अलगाव या सिर्फ़ उपयोग किये जाने से बचाता है, इसके बदले यह हमें न्याय और हर मानव खासकर सबसे कमज़ोर लोगों की सम्मानजनक सेवा हेतु अग्रसर करता है। 

संस्थान की बुलाहट

इस तरह, वेरितास इन कारिताते, एक शिक्षण संस्थान के बुलाहट को व्यक्त करती है जो ज्ञान और जीवन, बुद्धिमत्ता और नैतिकता, विश्वास और तर्क, शैक्षणिक श्रेष्टता और सामाजिक ज़िम्मेदारी को जोड़ने की चाह है। शोध, शिक्षण, व्यवासायिक प्रशिक्षण को हम सेवाओं की तरह देख सकते हैं, जो स्वयं के लिए नहीं, बल्कि एक अधिक मानवीय समाज, अपने से परे जाने वाले समाज के निर्माण की ओर हमें अग्रसर करता है, जहाँ ज्ञान हमेशा मानव की सेवा हेतु होता है।

संत पापा लियो ने कहा कि स्थापना के साठ साल पूरे होने का जश्न, बोलेबियन काथलिक महाविद्यालय के रुप संस्थान को कृतज्ञता में अपने प्रेरिताई को देखने का आहृवान करता है जिससे हम उसे निष्ठाम में पूरा कर सकें। ज्ञान के बँटवारे, सापेक्षावद और ज्ञान के शोषण के सांस्कृतिक संदर्भ में, वेरितास इन कारिताते संस्थान के लिए आत्मापरख का एक मापदंड बनता है जो आप को “विश्व में ज्योति” बनने का निमंत्रण देता है। (मत्ती. 5.14)

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14 मई 2026, 16:09