ट्यूरिन का पुस्तक मेला , 15.05.2026 ट्यूरिन का पुस्तक मेला , 15.05.2026  (ANSA)

साहित्य 'भाईचारे और शांति का स्कूल' बने

ट्यूरिन शहर में इस सप्ताह 14 से 18 मई तक जारी अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले को एक तार सन्देश प्रेषित कर सन्त पापा लियो 14 वें ने इस तथ्य की पुनरावृत्ति की कि साहित्य को मानव सम्मान, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।

वाटिकन सिटी

वटिकन सिटी, शुक्रवार, 15 मई 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): इटली के ट्यूरिन शहर में इस सप्ताह 14 से 18 मई तक जारी अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले को एक तार सन्देश प्रेषित कर सन्त पापा लियो 14 वें ने इस तथ्य की पुनरावृत्ति की कि साहित्य को मानव सम्मान, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।

साहित्य भाईचारे की पाठशाला

सन्त पापा ने कहा कि इस समय विश्व को “ऐसे साहित्य की ज़रूरत है जो हर व्यक्ति की गरिमा को पहचानने में मदद करे, विशेष कर सबसे कमज़ोर व्यक्ति की और साथ ही ऐसे साहित्य की जो जो द्रुतगति से भाईचारे और शांति की पाठशाला बनता जाए।”

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने सन्त पापा लियो 14 वें की ओर से उक्त सन्देश ट्यूरिन के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल रॉबेर्तो रेपोले को भेजकर अन्तरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में भाग लेनेवालों का अभिवादन किया और उनके प्रति शुभकामनाएँ अर्पित कीं। यह सन्देश गुरुवार सुबह मेले के उद्घाटन के अवसर पर मेले के निर्देशक द्वारा प्रतिभागियों के समक्ष पढ़ा गया।

बच्चे समाज की आशा

लेखिका एल्सा मोरान्ते की पुस्तक से लिये गये इस वर्ष के पुस्तक मेले के शीर्षक 'द वर्ल्ड सेव्ड बाय किड्स' को सन्त पापा लियो ने "महत्वपूर्ण और समय के हिसाब से सही" निरूपित किया।

सन्त पापा ने इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि “ऐसे समय में जब युद्ध की भयावहता तथा बेपरवाही और उदासीनता की ठंड से घुटन महसूस हो रही है, बच्चे, दुनिया को नई नज़र से देखने की अपनी जन्मजात क्षमता से, समाज में आशा की रोशनी को प्रज्वलित करते हैं।”

सन्देश के अन्त में सन्त पापा ने उम्मीद जताई कि “यह पुस्तक मेला संवाद और सौहार्द को बढ़ावा देने में संस्कृति के महत्व के बारे में नई जागरूकता उत्पन्न करेगा।”

पठन कार्य का महत्व

ग़ौरतलब है कि ट्यूरिन के पुस्तक मेले के प्रतिभागियों को प्रेषित सन्त पापा के तार सन्देश के शब्द उस सन्देश में मेल खाते हैं जो उन्होंने इस महीने की शुरुआत में वाटिकन पब्लिशिंग हाउस के प्रतिनिधियों से कहे थे और जो अपनी स्थापना की सौवीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में ट्यूरिन पुस्तक मेले में भाग ले रहा है।

इस अवसर पर सन्त पापा लियो ने कहा थाः “पढ़ने से दिमाग को पोषण मिलता है, एक जागरूक और सुगठित आलोचनात्मक समझ विकसित करने में मदद मिलती है। साथ ही पठन कार्य  कट्टरपंथ और वैचारिक शॉर्टकट के खिलाफ हमारी सुरक्षा करता है।” उन्होंने “सभी से किताबें पढ़ने की अपील की ताकि संकीर्ण सोच का इलाज हो सके, जो कठोर रवैये और वास्तविकता के प्रति कमतर दृष्टिकोण में प्रकट होता है।”

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15 मई 2026, 10:22