“तोदोस, तोदोस, तोदोस”
“दया पाकर, अब हम भी दयावान बनें।” ये सात शब्द एक पोप के दिल और एक पोप बनने की कहानी को दिखाते हैं। इनके साथ, उनकी इच्छा थी “मैं एक ऐसी कलीसिया चाहता हूँ जो गरीब हो और गरीबों के लिए हो!”
पोप फ्राँसिस के निधन के एक साल बाद, वाटिकन न्यूज़, वाटिकन रेडियो और लोस्सरवातोरे रोमानो ने “तोदोस, तोदोस, तोदोस” नाम की 27 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में उनके संत पापा बनने के कुछ सबसे खास पलों को दिखाया है।
यह हाशिये पर जीवनयापन करनेवाले लोगों के पोप का एक और खास उदाहरण है, जो हाशिये पर रहनेवालों के साथ उनकी करीबी और “टुकड़ों में” लड़ी जा रही दुनिया में शांति के लिए उनकी लगातार अपील को दिखाता है।
"तोदोस, तोदोस, तोदोस!", (हर कोई, हर कोई, हर कोई) जो इतालवी, स्पेनिश और अंग्रेजी में उपशीर्षक के साथ वाटिकन न्यूज के वेबसाईट पर उपलब्ध है, इस दृश्य कथा के मार्गदर्शक धागे के रूप में कार्य करता है, जो जॉर्ज मारियो बेर्गोग्लियो के पोप पद की पहचान करनेवाले प्रेरितिक दृष्टिकोण का एक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
अभिलेखीय फुटेज और तस्वीरों के जरिए, यह डॉक्यूमेंट्री एक ऐसी कलीसिया को दिखाती है जो “आगे बढ़ती है”, बातचीत करने और इतिहास के जख्मों के बीच उपस्थित रहने में सक्षम है।
करुणा की अहमियत से लेकर व्यक्तिगत मुलाकात करने तक, संत पेत्रुस की कुर्सी पर पोप फ्राँसिस के ये वर्ष एक ऐसी कलीसिया की यात्रा के रूप में सामने आये, जिन्होंने सुसमाचार को ठोस और सबकी समझ में आने लायक चिन्हों में बदलने की कोशिश की।
यह एक सामान्य याद से बढ़कर है, यह एक जीती-जागती याद है: एक नजरिया जो, उनके गुजरने के एक साल बाद, आज भी कलीसिया और दुनिया पर सवाल उठाता है।
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