संत पापा फ्रांसिस की कब्र पर संत पापा लियो संत पापा फ्रांसिस की कब्र पर संत पापा लियो  (ANSA)

संत पापा लियोः संत पापा फ्रांसिस की यादें सजीव हैं

अफ्रीकी देशों की प्रेरितिक यात्रा कर रहे संत पापा लियो 14वें ने अपने पूर्ववर्ती वैश्विक काथलिक कलीसिया के धर्मगुरू, संत पेत्रुस के अधिकारी दिवांगत संत पापा फ्रांसिस की प्रथम पुण्य तिथि के अवसर पर कार्डिनल जोवन्नी बपतिस्ता रे, के नाम एक संदेश प्रेषित किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा फ्रांसिस की प्रथम पुण्य तिथि के अवसर पर संत पापा लियो ने कार्डिनल जोवन्नी बपतिस्ता रे, कार्डिनलमंडल के अध्यक्ष, के नाम अपने संदेश प्रेषित कर दिवंगत कलीसियाई वैश्विक परमाधिकारी को अपनी श्रंद्धजलि अर्पित की।

संत पापा लियो 14वें में संदेश में लिखा, संत पापा फ्रांसिस की मृत्यु की प्रथम सालगिरह पर, उनकी यादें कलीसिया और पूरी दुनिया में सजीव हैं। “अफ्रीका की अपनी प्रेरितिक यात्रा में रोम से दूर, मैं उन लोगों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ता हूँ जो मेरे पूर्वर्ती संत के लिए ख्रीस्तीयाग अर्पित करने हेतु उनके कब्र मरिया मेजर के महागिरजाघर में इकट्ठा होंगे।”

संत पापा लियो ने लिखा, “मैं कार्डिनलों, धर्माध्यक्षों, पुरोहितों और लोकधार्मियों के साथ, उन तीर्थयात्रियों का स्नेहिल स्वागत करता हूँ जो अपना प्रेम और आभार व्यक्त करने हेतु जामा हो रहे हैं।”

मृत्यु दीवार नहीं

मृत्यु कोई दीवार नहीं है, बल्कि एक द्वार है जो उस दया की ओर खुलता है जिसका घोषणा संत पापा फ्रांसिस ने कई बार की थी। प्रभु ने उन्हें विगत साल 21 अप्रैल को पास्का महोत्सव के सोमवार को अपने पास बुलाया लिया। उन्होंने पृथ्वी की अपनी यात्रा को जी उठे मसीह को गले लगाकर, उस "सुसमाचार की खुशी" में पूरी की, जो उनके प्रेरितिक प्रबोधनों में से एक विशेष है।

अपने संदेश में संत पापा लियो ने लिखा कि वे एक बड़े बदलाव के समय में संत पेत्रुस और वैश्विक कलीसिया की अगुवाई की, जो आज भी जारी है। एक ऐसा बदलाव जिसके बारे में उन्हें पूरी तरह पता था। “उन्होंने अपने जीवन के द्वारा हम सभी को एक साहसपूर्ण साक्ष्य दिया, जो कलीसिया के लिए एक बड़ी विरासत है।”

निष्ठावान सेवक

संत पापा ने कहा कि उन्होंने अपनी शिक्षा को एक प्रेरितिक शिष्य की भांति जीया जैसे वे उसे प्रेम में घोषित करते थे। वे अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक ईश्वर के निष्ठामय सेवक बने रहे जिसे उन्होंने अपने बपतिस्मा और धर्माध्यक्षीय प्रेरिताई के अभियंजन में प्राप्त किया था। एक प्रेरित के रुप में उन्होंने ईश्वर के करूणामय सुसमाचार को “सब के लिए, सब के लिए, सब के लिए” घोषित किया जैसे कि वे बहुधा कहा करते थे। एक संवेदनशील सेवा की भांति उनके साक्ष्य ने असंख्य लोगों के हृदयों का स्पर्श किया, हम उनके प्रेरितिक यात्राओं के प्रति कृतज्ञता के भाव अर्पित करते हैं, विशेष कर उनकी अंतिम “यात्रा” जिसे उन्होंने अपनी बीमारी और मृत्युशाया की स्थिति में भी की।

अपने पूर्ववर्ती संत पापाओं के संग तालमेल बनाते हुए, उन्होंने द्वितीय वाटिकन महासभा की विरासत को अपनाया और “कलीसिया को प्रेरिताई हेतु खुला रहने, दुनिया की उम्मीद बनने और सुसमाचार प्रचार के माध्यम हर ज़िंदगी में खुशी लाने की अपील की।”

संत पापा फ्रांँसिस की विरासत 

हम आज भी उनके प्रबोधनों को सुन सकते हैं, जो अति सुन्दर शब्दों में घोषित उनके संदेश को हमारे लिए सहज और समझ के योग्य बनाता है- जिसमें हम  दया, शांति, भाईचारा, भेंड़ की खुशबू, फील्ड हॉस्पिटल के अलावे और भी अनेक बातों को पाते हैं। इनमें से हर बात हमें उस सुसमाचार की याद दिलाती है जिसे उन्होंने अपने जीवन में जीया, एक नई भाषा में जो हमेशा की तरह ख्रीस्त के सुसमचार को घोषित करती है।

संत पापा फ्रांसिस का अपने पूरे जीवन में मरियम के प्रति गहरी भक्ति थी। अपनी इस भक्ति में उन्होंने संत मरिया मेजर, जहाँ उनकी कब्र है, साथ ही दुनिया भर में कई मरियम पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्रा की। कलीसिया की माता,  कुंवारी मरियम, हमें भी हर परिस्थिति में अपने दिव्य पुत्र के अथक प्रेरित होने  और उनके करूणामय प्रेम का संदेशवाहक बनने में मदद करें। 

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21 अप्रैल 2026, 11:22