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पोप : एक चरवाहे के रूप में, मैं युद्ध के पक्ष में नहीं हो सकता; बहुत से निर्दोष मारे गए हैं

अफ्रीकी देशों की लम्बी प्रेरितिक यात्रा के बाद रोम लौटते हुए पोप लियो 14वें ने विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए, उनके पाँच सवालों के उत्तर दिये। आप नीचे उनके सभी जवाबों को पढ़ सकते हैं।

वाटिकन न्यूज

संत पापा लियो 14वें - शुभ दिन, सभी को! आशा करता हूँ कि आप सब ठीक होंगे, अगली यात्रा के लिए भी तैयार होंगे, बैटरी पहले से चार्ज होगी! ठीक है। जब मैं यात्रा करता हूँ—मैं अपने लिए बात करता हूँ, लेकिन आज रोम के धर्माध्यक्ष, पोप के रूप में—यह सबसे बढ़कर एक प्रेरितिक यात्रा है, ईश्वर के लोगों को खोजने, उनके साथ जाने और उन्हें जानने की। बहुत बार फोकस राजनीति होता है: पोप इस या उस मुद्दे पर क्या कहते हैं? वे किसी एक देश की सरकार का न्याय क्यों नहीं करते? और निश्चित रूप से कहने के लिए बहुत सी बातें हैं: मैंने न्याय के बारे में बात की, और मुद्दे हैं भी... लेकिन यह पहला शब्द नहीं है। प्ररितिक यात्रा को सबसे पहले सुसमाचार की घोषणा करने, येसु ख्रीस्त के संदेश का प्रचार करने की इच्छा की अभिव्यक्ति के रूप में समझा जाना चाहिए। इसलिए यह लोगों की खुशी में, उनके विश्वास की गहराई में, लेकिन उनके दुःख में भी उनके करीब आने का एक तरीका है। वहाँ, हाँ, निश्चित रूप से अक्सर लोगों को अपने जीवन की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित करने के तरीके खोजने या टिप्पणी करने की जरूरत होती है। यह भी जरूरी है कि देश के नेताओं से बात की जाए ताकि शायद सोच में बदलाव आए, लोगों की भलाई के बारे में सोचने के लिए ज्यादा खुलापन आए, और देश के संसाधनों के बंटवारे जैसे मुद्दों पर सोचने का मौका मिले। हमारी बातचीत में, हमने हर चीज पर थोड़ी-बहुत बात की। लेकिन [मिशन] सबसे बढ़कर लोगों को इस जोश के साथ देखना, उनसे मिलना है। मैं पूरी यात्रा को लेकर बहुत खुश हूँ, लेकिन इक्वेटोरियल गिनी के लोगों के साथ रहना, उनके साथ रहना और उनके साथ चलना सच में एक आशीर्वाद रहा है... बारिश के बीच! वे उस दिन बारिश में भी खुश थे! लेकिन सबसे बढ़कर, एक विश्वव्यापी कलीसिया के रूप में अपने विश्वास में जो हम मनाते हैं, उसे बांटने के चिन्ह के साथ।

इग्नासियो इंग्रावो, (RAI Tg1)- धन्यवाद, संत पिता। यह सवाल हमारे इतालवी भाषी साथियों के लिए है। सबसे पहले, हमारे सवालों का जवाब देने की आपकी इच्छा के लिए धन्यवाद, इस यात्रा के लिए धन्यवाद, जो मुलाकातों, कहानियों और चेहरों से भरा हुआ है। कैमरून के बामेंडा में शांति सभा में, आपने एक ऐसी दुनिया के बारे में बताया जो उलट-पुलट हो गई है, जहाँ कुछ तानाशाह इस धरती को खत्म करने की धमकी दे रहे हैं। आपने कहा, "शांति को बनाया नहीं जाना चाहिए, इसे अपनाया जाना चाहिए।" तो, इसे शुरुआत मानते हुए, मैं आपसे पूछना चाहता हूँ: ईरान में लड़ाई खत्म करने के लिए बातचीत में गड़बड़ी है, जिसकी अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ रही है। तो, मैं आपसे सबसे पहले पूछूंगा: क्या आप ईरान में सरकार बदलने की सलाह देंगे, खासकर, यह देखते हुए कि हाल के महीनों में सिविल सोसाइटी और छात्र सड़कों पर उतर आए हैं? और परमाणु हथियार बनाने की होड़ को लेकर दुनिया भर में चिंता है। और सबसे बढ़कर, मैं आपसे पूछूंगा: आप अमरीका, ईरान और इस्राएल से बाहर निकलने और तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए क्या अपील करते हैं? और क्या NATO और यूरोप को इसमें और शामिल होना चाहिए?

संत पापा लियो 14वें - मैं यह कहते हुए शुरू करना चाहूँगा: हमें एक नया नजरिया, शांति की संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। अक्सर, जब हम ऐसी परिस्थिति देखते हैं, तो तुरंत उसका जवाब होता है: हमें हिंसा, जंग, हमला करके दखल देना होगा। हमने जो देखा है, उसमें कई बेगुनाह लोग मारे गए हैं। मैंने अभी-अभी एक चिट्ठी देखी, जिसको शायद आपने भी देखी होगी, उन बच्चों के कुछ परिवारों से, जो हमले के पहले ही दिन मारे गए थे। वे इस बारे में बात करते हैं कि उन्होंने अब अपने बेटे, बेटियों, बच्चों को खो दिया है जो मर चुके हैं। और मैं कहता हूँ: [सवाल यह नहीं है] कि यह राज बदलना है, यह राज बदलना नहीं है... सवाल यह है कि इतने सारे बेगुनाह लोगों की मौत के बिना हम जिन मूल्यों में विश्वास करते हैं, उन्हें कैसे बढ़ावा दें। ईरान का मुद्दा स्पष्ट रूप से बहुत मुश्किल है। वे जो बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं: एक दिन ईरान "हाँ" कहता है, अमरीका "नहीं" कहता है, और इसका उल्टा भी होता है, और हमें नहीं पता कि यह कहाँ जा रहा है। और यह गड़बड़वाली हालत बन गई है, जो दुनिया की अर्थव्यवस्था  के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन फिर ईरान में बेगुनाह लोगों की एक पूरी आबादी भी है जो इस जंग से परेशान है। चाहे यह सरकार बदलना हो या नहीं... यह साफ नहीं है कि ईरान पर इस्राएली और अमरीकी हमलों के शुरुआती दिनों के बाद अभी सरकार क्या कर रही है। बल्कि, मैं शांति बातचीत को जारी रखने के लिए बढ़ावा देना चाहूँगा: कि पार्टियाँ इसमें हिस्सा लें, कि वे कोशिश करें, कि वे शांति को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश करें। युद्ध के खतरे का सामना करते हुए [मैं कहता हूँ]: अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। यह बहुत जरूरी है कि बेगुनाहों की रक्षा की जाए, और कई जगहों पर ऐसा नहीं हुआ है। मैं अपने साथ एक मुस्लिम बच्चे की फोटो लाया हूँ, जो लेबनान की प्रेरितिक यात्रा के दौरान, वहाँ एक बैनर के साथ इंतजार कर रहा था जिस पर लिखा था: "स्वागतम् पोप लियो!", लेकिन, युद्ध के इस अंतिम चरण में मारा गया। बहुत सारे मानवीय परिस्थितियाँ होते हैं, और मुझे लगता है कि हममें इस तरह सोचने की काबिलियत होनी चाहिए। एक कलीसिया के तौर पर, मैं फिर कहता हूँ, एक चरवाहे के रूप में: मैं युद्ध के पक्ष में नहीं हो सकता, और मैं सभी को बढ़ावा देना चाहूँगा कि वे ऐसे जवाब ढूँढ़ने की कोशिश करें जो शांति की संस्कृति से आये, न कि नफरत और बँटवारे से।

एवा फर्नांडेज, रेडियो कोप - हमने अभी-अभी एक ऐसे महादेश पर कदम रखा, जहाँ बहुत से लोग घूमना चाहते हैं, यूरोप घूमने का सपना देखते हैं। आपकी अगली यात्रा स्पेन की होगी, जहाँ आप्रवासन का मुद्दा एक बड़ा मुद्दा होगा, खासकर कैनरी आइलैंड्स में। संत पापा आप जानते हैं कि स्पेन में आप्रवासन के मुद्दे पर बहुत बहस होती है और ध्रुवीकरण पर। यहाँ तक कि खुद काथलिक लोगों के बीच भी, इस पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं है। आप हम स्पेन के लोगों से, खासकर काथलिक लोगों से, पलायन के बारे में क्या कह सकते हैं? और अगर आप मुझे इजाजत दें, तो आपकी अगली यात्रा स्पेन की होगी। हम जानते हैं कि आप पेरू, शायद अर्जेंटीना और उरुग्वे दौरे के लिए उत्सुक हैं, लेकिन हमारा एक सवाल यह भी है: क्या आप ग्वादालुपे की माता मरियम महागिरजाघर जाने के लिए उत्सुक हैं?

संत पापा लियो 14वें - अप्रवासन का मुद्दा बहुत मुश्किल है और यह सिर्फ स्पेन, केवल यूरोप, अमरीका ही नहीं, कई देशों पर असर डालता है- यह एक वैश्विक मुद्दा है! इसलिए, मेरा जवाब एक सवाल से शुरू होता है: ग्लोबल नॉर्थ, ग्लोबल साउथ की मदद के लिए क्या कर रहा है, या उन देशों की मदद के लिए जहाँ आज के युवा अपना भविष्य नहीं ढूंढ पा रहे हैं और इसलिए, नॉर्थ जाने का सपना नहीं जी पा रहे हैं? हर कोई नॉर्थ जाना चाहता है, लेकिन अक्सर नॉर्थ के पास यह जवाब नहीं होता कि उन्हें मौके कैसे दिए जाएँ। बहुत से लोग परेशान होते हैं।

मानव तस्करी का मुद्दा भी प्रवासन का हिस्सा है। व्यक्तिगत रूप से, मेरा मानना ​​है कि एक देश को अपने बॉर्डर पर नियम बनाने का अधिकार है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि हर किसी को बिना किसी ऑर्डर के अंदर आना चाहिए, कभी-कभी वे जिन जगहों पर जाते हैं, वहाँ ऐसे हालात बना देते हैं जो उन जगहों से भी ज्यादा गलत होते हैं जिन्हें वे पीछे छोड़ आए हैं। लेकिन, यह कहने के बाद, मैं खुद से पूछता हूँ: हम सबसे अमीर देशों में, सबसे गरीब देशों के हालात बदलने के लिए क्या कर रहे हैं? हम कोशिश क्यों नहीं कर सकते—सरकारी मदद से और बड़ी, अमीर कंपनियों, बहुराष्ट्र कंपनियों से निवेश के द्वारा—जैसे देशों में हालात बदलने के लिए, जैसे हम इस यात्रा पर गए थे? बहुत से लोग अफ्रीका को खनिज निकालने, दूसरों की भलाई के लिए दूसरे देशों में अपनी दौलत ले जाने की जगह मानते हैं। शायद वैश्विक स्तर पर हमें इन अफ्रीकी देशों में ज्यादा न्याय, बराबरी और विकास को बढ़ावा देने के लिए और ज्यादा मेहनत करनी चाहिए, ताकि उन्हें दूसरे देशों, स्पेन वगैरह में जाने की जरूरत न पड़े। और दूसरी बात जो मैं कहना चाहता हूँ, वह यह है कि, किसी भी हाल में, वे मानव हैं, और हमें मानव के साथ मानवीय रूप से पेश आना चाहिए, न कि उनके साथ जानवरों से भी बुरा बर्ताव करना चाहिए, जैसा कि अक्सर होता है। एक बड़ी चुनौती है: कोई देश कह सकता है कि वह और लोगों को नहीं रख सकता, लेकिन जब वे आते हैं, तो वे इंसान होते हैं और अपनी प्रतिष्ठा के कारण से हर इंसान के लिए जरूरी प्रतिष्ठा के हकदार होते हैं।

और आने वाली यात्रा का क्या? मैं कई लैटिन अमेरिकी देशों में जाने के लिए बहुत उत्सुक हूँ। यह अभी पुष्ट नहीं हुआ है; देखते हैं। हम इंतज़ार करेंगे और देखेंगे।

आर्थर हर्लिन (पेरिस मैच) - संत पापा, मेरे सभी फ्रेंच साथियों की तरफ से इस शानदार दौरे के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। यह बहुत शानदार था। संत पापा, इस यात्रा के दौरान, आप दुनिया के सबसे ज़्यादा तानाशाह नेताओं से मिले, है ना? आप अपनी मौजूदगी से इन सरकारों को नैतिक अधिकार देने से कैसे रोक सकते हैं? क्या यह एक तरह से, मान लीजिए, ‘पोप-वाशिंग’ नहीं है?

संत पापा लियो 14वें - सवाल के लिए आपको धन्यवाद। ज़रूर, किसी भी राष्ट्र के प्रमुख के साथ परमाध्यक्ष की मौजूदगी का मतलब अलग-अलग तरीकों से निकाला जा सकता है। इसका मतलब निकाला जा सकता है और कुछ लोगों ने निकाला भी है, “ओह, संत पापा या कलीसिया कह रही है कि उनका ऐसे रहना ठीक है।” और दूसरे लोग इसे अलग तरह से कह सकते हैं

मैं अपनी शुरुआती बातों पर वापस जाना चाहूँगा, जिसमें मैंने अपने शुरुआती बयानों में कहा था कि मैं जो यात्रा करता हूँ, संत पापा जो करते हैं, उसका मुख्य उद्देश्य लोगों से मिलना है, और यह समझना कितना ज़रूरी है कि यह व्यवस्था कितना महत्वपूर्ण है, परमधर्मपीठ दुनिया भर के देशों के साथ राजनायिक रिश्ते बनाए रखने के लिए कभी-कभी बड़ी कुर्बानी देकर भी काम करता है। और कभी-कभी हमारे राजनायिक रिश्ते ऐसे देशों के साथ भी होते हैं जिनके नेता तानाशाह होते हैं।

हमारे पास उनसे राजनायिक स्तर पर, औपचारिक स्तर पर बात करने का अवसर है। हम हमेशा बड़ी-बड़ी घोषणाएं नहीं करते—आलोचना, न्याय या निंदा नहीं करते। लेकिन पर्दे के पीछे बहुत सारा काम होता है, न्याय को बढ़ावा देने के लिए, इंसानियत के कामों को बढ़ावा देने के लिए, कभी-कभी ऐसे हालात ढूंढने के लिए जहां राजनीतिक कैदी हो सकते हैं, और उन्हें आज़ाद कराने का रास्ता खोजने के लिए। भूख एवं बीमारी के हालात वगैरह..

तो परमधर्मपीठ निष्पक्षता बनाए रखकर और इतने सारे अलग-अलग देशों के साथ अपने सकारात्मक राजनायिक रिश्ते जारी रखने के तरीके ढूंढकर, हम असल में सुसमाचार को ठोस परिस्थितियों में लागू करने का तरीका ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं ताकि लोगों की ज़िंदगी बेहतर हो सके।

लोग बाकी बातों का मतलब अपनी मर्ज़ी से निकालेंगे, लेकिन मुझे लगता है कि हमारे लिए यह ज़रूरी है कि हम किसी भी देश के लोगों की मदद करने का सबसे अच्छा तरीका ढूंढें।

वेरेना स्तेफानिये शाल्टर (एआरी रूंडफ्रंक) - संत पापा, वैश्विक दक्षिण की आप की प्रथम प्रेरितिक यात्रा के लिए बधाइयाँ। हमने बहुत उत्साह और खुशी देखी, मैं सोच सकती हूँ कि यह आपको भी बहुत प्रभावित किया होगा। आप कार्डिनल रेइनहार्ड मार्क्स, म्यूनिख और फ्रेइज़िंग के महाधर्माध्यक्ष के निर्णय के बारे में क्या सोचते हैं, जो समलैंगिक दंपतियों को विवाह की अनुभूति प्रदान करते हैं, आप विभिन्न संस्कृतियों और ईशशास्त्रीय दृष्टिकोण से, विशेषकर अफ्रीका में, आप वैश्विक कलीसिया में उस विशेष मुद्दे पर कैसी एकता बनाये रखना चाहते हैंॽ

संत पापा लियो 14वें - सर्वप्रथम, मैं सोचता हूँ इस बात को समझना हमारे लिए बहुत जरूरी है कि कलीसिया की एकता या विभाजन को यौन से संबंधित मामलों के इर्दगिर्द नहीं घुमना चाहिए। हम यह सोचते हैं कि कलीसिया नौतिकता के बारे में बातें करती तो यह सिर्फ यौन संबंध से संयुक्त है। और वास्तव में, मैं विश्वास करता हूँ कि उसमें हम उससे और भी बहुत बड़े मुद्दों, अति महत्वपूर्ण बातों को पाते हैं, जैसे की न्याय, समानता, नर और नारियों की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, ये सारे बातें उस विशेष मुद्दे से पहले आते हैं। वाटिकन ने पहले ही जर्मनी के धर्माध्यक्षों के वार्ता कर ली है।

वाटिकन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम समलैंगिक दंपतियों को औपचारिक रूप से आशीर्वाद देने में सहमत नहीं हैं,  इस मामले में, समलैंगिक दंपत्ति, जैसा कि आपने पूछा, या दंपतियों की अनियमित स्थितियाँ, जो निर्धारित से परे हैं, यदि आप चाहें, तो आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं जैसे संत पापा फ्रांसिस ने कहा है कि सभों को आशीर्वाद प्राप्त है।

जब एक पुरोहित मिस्सा के अंत में एक आशीष देता है, जब संत पापा एक बड़े समारोह के अंत में आशीष प्रदान करते हैं जैसे कि आज हुआ, वह आशीर्वाद सभों के लिए है। संत फ्रांसिस की प्रसिद्ध अभिव्यक्ति “तूत्ती, तूत्ती, तूत्ती” कलीसिया के विश्वास की एक अभिव्यक्ति है कि सभी का स्वागत किया जाता है, सभी आमंत्रित हैं, सभी को येसु का अनुसरण करने हेतु निमंत्रण दिया जाता है, और सभी अपने जीवन में परिवर्तन लाने हेतु बुलाये जाते हैं। इससे परे आज, मैं सोचता हूँ कि यह मुद्दा अपने में एकता के बदले अधिक विभाजन उत्पन्न करेगा, और हमें चाहिए की हम येसु ख्रीस्त में अपनी एकता को स्थापित करने का प्रयासो की खोज करें, जिसकी शिक्षा येसु देते हैं। आपके सवाल का जवाब मेरी ओर से यही है।

एनेलिसे टैगार्ट (न्यूयमैक्स टी.वी.) - संत पापा, बहुत-बहुत धन्यवाद। आप ने इस प्रेरितिक यात्रा में कहा कि किस तरह लोग न्याय के भूखे और प्यासे हैं। इस सुबह यह खबर आई है कि ईरान ने अपने एक सदस्य को मौत की सजा दी, और यह उस समय होता है जब कहा गया है कि सरकार ने कई दूसरे लोगों को भी सरेआम फांसी पर लटकाया है, साथ ही अपने ही हज़ारों लोगों की हत्या की है। क्या आप इन कार्यों की निंदा करते हैं, और क्या आप ईरानी शासन को कोई संदेश देना चाहते हैंॽ

संत पापा लियो 14वें - सभी अन्याय पूर्ण कार्यों की निंदा करनी चाहिए। मैं लोगों को मौत की सजा देने की निंदा करता हूँ। मैं मृत्युदंड की निंदा करता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि मानवीय जीवन और सभी लोगों का सम्मान- गर्भ से लेकर प्राकृतिक मृत्यु तक, उनके जीवन का सम्मान और सुरक्षा करनी चाहिए। अतः जब एक शासन, जब एक देश यह निर्णय लेता है जो लोगों के जीवन को अन्यायपूर्ण ढ़ंग से खत्म कर देता, तब निश्चित रुप में हमें उसकी निंदा करने की जरूरत है।      

 

 

 

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24 अप्रैल 2026, 11:46