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परमधर्मपीठीय कलीसियाई अकादमी के सदस्यों के साथ पोप लियो 14वें परमधर्मपीठीय कलीसियाई अकादमी के सदस्यों के साथ पोप लियो 14वें  (ANSA)

पोप : शांति, सत्य और न्याय की सेवा में परमधर्मपीठ की कूटनीति

परमधर्मपीठीय कलीसियाई अकादमी की स्थापना की 325वीं वर्षगाँठ के अवसर पर, उसका दौरा करते हुए पोप लियो 14वें ने परमधर्मपीठीय राजनयिक पुरोहित पर चिंतन किया, जो शांति के संदेशवाहक है और जिन्हें न केवल काथलिक कलीसिया बल्कि, समस्त मानव परिवार को बचाने के लिए बुलाया गया है।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 (रेई) : पोप लियो 14वें ने सोमवार 27 अप्रैल को रोम स्थित परमधर्मपीठीय अकादमी का दौरा किया जहाँ उन्होंने शांति, सत्य और न्याय की सेवा में विशेष बुलावे पर जोर दिया, जिसके लिए परमधर्मपीठीय राजनयिक पुरोहित बुलाये जाते हैं। यह मुलाकात संस्था की स्थापना की 325वीं सालगिरह के मौके पर हुई, जहाँ वे पोप चुने जाने से पहले भी जा चुके हैं, जब वे धर्माध्यक्षीय विभाग के प्रीफेक्ट थे।

ख्रीस्त में एकता

पोप लियो ने वर्षगाँठ के इस आनन्दमय अवसर पर “समर्पण और सेवा के इतिहास” के लिए अपना “गहरा आभार” व्यक्त किया। यह एक महत्पूर्ण इतिहास है, जिसे दुनियाभर के पुरोहितों ने मुमकिन बनाया है, जिन्होंने “मसीह में उस एकता को बनाने के लिए अपनी छोटी-छोटी कोशिशों से योगदान दिया है, जो अलग-अलग मूल के लोगों के बीच, मेल-जोल को वाटिकन के राजनयिक कोर की एक खास पहचान बनाती है।”

बदलाव की कोशिश

पोप लियो ने उन सुधारों पर चिंतन किया, जिन्होंने संस्था को “कानून, इतिहास, राजनीतिक शास्त्र और अर्थशास्त्र  की पढ़ाई की संरचना को नया करने के लिए आवश्यक स्वयतता प्रदान की, साथ ही अंतरराष्ट्रीय संबंध में इस्तेमाल होनेवाली भाषाओं की पढ़ाई को भी जगह दी।” इसके अलावा एक अन्य आवश्यक सुधार पर जोर दिया, लगातार बदलाव की कोशिश, जिसका मकसद है “सामीप्य, ध्यान से सुनना, गवाही, भाईचारा वाले नजरिये और बातचीत […] को विनम्रता और सज्जनता से जोड़ना।” पोप ने कहा, “ये सभी गुण आपकी पूरी पुरोहितीय सेवा में होने चाहिए।

इतिहास को आकार देनेवाले पुल

अकादमी के इतिहास को आकार देनेवाले संतों, धन्यों और संत पापाओं को याद करते हुए, पोप लियो ने परमधर्मपीठीय राजनयिक पुरोहितों की खास भूमिका पर जोर दिया, जिसे उन्होंने कहा, “पास्का की घोषणा के संदेशवाहक : ‘आपको शांति मिले!’” उन्होंने आगे कहा कि जब बातचीत और मेल-मिलाप की उम्मीदें कम होती दिख रही हों, तब भी सभी के लिए पुनर्जीवित मसीह के शब्दों को लाना जरूरी है: “मैं तुम्हें शांति देता हूँ, मैं तुम्हें अपनी शांति देता हूँ।”

उन्होंने कहा, “आपका मिशन आपको “पुल” और “माध्यम” बनने के लिए बुलाता है, ताकि स्वर्ग से आनेवाली कृपा इतिहास की तहों में अपना रास्ता बना सके।”

मसीह के प्यार की निशानी

संत पापा ने कहा, परमधर्मपीठीय राजनयिक का एक और काम है, सच्चाई को - जो स्वयं मसीह हैं - देशों की सभा में लाना, “इंसानियत के उस हिस्से के लिए उनके प्यार का चिन्ह बनना जो उनकी देखभाल में सौंपा गया है — पहले एक पुरोहित के रूप में, और उसके बाद एक राजनयिक के रूप में।” पोप लियो ने दोहराया, जैसा कि उन्होंने साल के शुरु में वाटिकन से मान्यता प्राप्त राजनयिक कोर को अपने भाषण में कहा था, कि शब्दों का वजन होता है और उन्हें एक बार फिर “सच्चाई को स्पष्ट और बिना किसी संदेह से बताना चाहिए,” ताकि “गलतफहमी के बिना सच्ची बातचीत” को बढ़ावा दिया जा सके, जो इस बात का गवाह बने कि उन्होंने शरीरधारण किया है।

न्याय को बढ़ावा देनेवाले

उसके बाद पोप ने पूरे मानव परिवार को शामिल करने के लिए अपना नजरिया बड़ा करने की सलाह दी, क्योंकि राजनयिक सेवा सिर्फ काथलिक समुदाय ही तक सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा, “यह आपको हर तरह के न्याय को बढ़ावा देनेवाले बनने के लिए प्रेरित करता है जो हर इंसान में छपी ईश्वर की छवि को पहचानने, उसे वापस लाने और उसकी रक्षा करने में मदद करता है।”

मानव प्रतिष्ठा के रखवाले

पोप ने आगे कहा, “तनाव से भरी दुनिया में, जहाँ जरूरतों और मांगों को पूरा करने के लिए लड़ाई ही एकमात्र तरीका लगता है, बातचीत, सुनने और मेलमिलाप के लिए खुद को प्रतिबद्ध करने की हमारी कोशिशें शायद काफी न लगें, या कभी-कभी तो बेकार भी।”

प्रोत्साहनात्मक दौरा

अपने अभिवादन में, परमधर्मपीठीय कलीसिया अकादमी के अध्यक्ष, महाधर्माध्यक्ष सल्वातोरे पेनाक्यो ने इस बात पर जोर दिया कि पोप का दौरा “परमधर्मपीठ की राजनयिक सेवा की तैयारी के रास्ते पर प्रोत्साहन बढ़ानेवाली है।” उन्होंने कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन को उनके पुरोहित अभिषेक की 46वीं सालगिरह पर अपनी शुभकामनाएँ भी दीं, जो 27 अप्रैल 1980 को अभिषिक्त हुए थे।

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28 अप्रैल 2026, 15:24