अंगोला के अधिकारियो से पोप :'युवाओं की सोच या बुज़ुर्गों के सपनों को न दबाएँ'
वाटिकन न्यूज
अंगोला, शनिवार, 18 अप्रैल 2026 (रेई) : संत पापा लियो 14वें अफ्रीका की प्रेरितिक यात्रा के तीसरे पड़ाव पर अंगोला पहुँचे हैं। उन्होंने अंगोला में अपने कार्यक्रमों की शुरूआत लुवांडा स्थित राष्ट्रपति भवन में वहाँ के सरकारी अधिकारियों, नागर समाज के प्रतिनिधियों और राजनयिकों से मुलाकात करते हुए की। इस मुलाकात में करीब 400 अधिकारी उपस्थित थे।
राष्ट्रपति जोआओ लौरेंको और वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित करते हुए, पोप ने निमंत्रण के लिए शुक्रिया अदा करते हुए कहा, “मेरे लिए यहाँ आपके बीच होना बड़ी खुशी की बात है। राष्ट्रपति महोदय मैं अंगोला यात्रा हेतु आपके निमंत्रण और आपके स्वागत के सुन्दर शब्दों के लिए कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।”
उन्होंने कहा, “मैं एक तीर्थयात्री के रूप में आपके बीच आया हूँ, इस भूमि पर ईश्वर की उपस्थिति का निशान ढूँढ़ने के लिए जो उन्हें बहुत प्यारी है।
आगे बढ़ने से पहले, मैं बेंगुएला प्रांत में आई भारी बारिश और बाढ़ के शिकार लोगों के लिए अपनी प्रार्थनाओं का भरोसा देना चाहता हूँ, और उन परिवारों के प्रति अपना सामीप्य व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने अपने घर खो दिए हैं। मैं यह भी जानता हूँ कि आप, अंगोला के लोग, प्रभावित लोगों के साथ एक बड़ी एकजुटता की श्रृखला में जुड़े हुए हैं।
अंगोला के लोगों की खुशी
मैं शांति से उत्पन्न भावना के द्वारा आपसे मिलना चाहता हूँ और यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि आपके लोगों के पास ऐसे खजाने हैं जिन्हें खरीदा या छीना नहीं जा सकता। खास तौर पर, आपके अंदर एक ऐसी खुशी है जिसे सबसे बुरे हालात भी खत्म नहीं कर पाए हैं। यह खुशी, जो दुःख, गुस्से, निराशा और हार से अनजान नहीं है जो उन लोगों में बनी रहती है और लगातार उत्पन्न होती है जिन्होंने अपने दिल और दिमाग को दौलत के लालच से दूर रखा है। आप अच्छी तरह जानते हैं कि अक्सर लोग आपकी जमीन को देने के लिए, या, ज्यादातर, लेने के लिए देखते रहे हैं – और देखते रहेंगे। इस फायदे के चक्कर को तोड़ना जरूरी है, जो सच्चाई और यहाँ तक कि जीवन को भी सिर्फ वस्तु बना देता है।
संत पापा ने कहा, “पूरी दुनिया के लिए अफ्रीका आनन्द और उम्मीद का भंडार है जो ऐसे सदगुण हैं जिन्हें मैं “राजनीतिक” कहने में संकोच नहीं करूँगा, क्योंकि उसके युवा और गरीब लोग अब भी स्वप्न देख रहे हैं और उम्मीद करते हैं।
जीवन मुलाकातों में ही विकसित होता है
जो पहले से है, वे उससे खुश नहीं हैं; वे ऊपर उठने की कोशिश करते हैं, बड़ी जिम्मेदारियों के लिए खुद को तैयार करते हैं, और अपना भविष्य बनाने में सक्रिय हिस्सा लेते हैं। सचमुच, लोगों की समझदारी को किसी भी विचारधारा को दबाया नहीं जा सकता, और इंसान के दिल में जो अनंत की चाहत है, वह किसी भी राजनीतिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम से बढ़कर गहरे सामाजिक बदलाव का सिद्धांत है। मैं यहाँ आपके बीच हूँ, उन बेहतरीन ताकतों की सेवा में जो लोगों और समुदायों को जिंदा रखती हैं, जिनमें से अंगोला एक धनी और जीवित मोजाईक है। मैं उन सभी को सुनना और हिम्मत देना चाहता हूँ जिन्होंने पहले ही अच्छाई, न्याय, शांति, सहिष्णुता और मेल-मिलाप के रास्ते चुन लिए हैं। साथ ही, लाखों अच्छे इरादों वाले पुरुषों और महिलाओं के साथ, जो इस देश के सबसे बड़े खजाने हैं, मैं उन लोगों के मन-परिवर्तन के लिए भी प्रार्थना करता हूँ जो उलटे रास्ते चुनते और इसके मेलजोल एवं भाईचारे में रुकावट डालते हैं।
सार्वजनिक भलाई को पहला स्थान दें
संत पापा ने कहा, “प्रिय मित्रो, मैंने उन भौतिक संपदाओं का जिक्र किया है जिन पर ताकतवर लोग अपना दावा करते हैं, यहाँ तक कि आपके अपने देश में भी। इस ज्यादती के तर्क से कितनी तकलीफें, कितनी मौतें, कितनी सामाजिक और पर्यावरण संबंधी आपदाएँ आती हैं! हम देखते हैं कि यह विकास के एक ऐसे मॉडल को बनाए रखता है जो भेदभाव करता और बाहर रखता है, जबकि अभी भी खुद को एकमात्र सही विकल्प के तौर पर थोपने का दावा करता है। संत पॉल छटवें ने, युवा पीढ़ी की चिंताओं को अच्छी तरह समझते हुए, साठ साल पहले ही “एक मुनाफावाली, सुखवादी और भौतिकवादी सभ्यता के बूढ़े और निश्चित रूप से पुराने पड़ चुके पहलू की निंदा की थी जो अभी भी खुद को भविष्य का रास्ता दिखाने की कोशिश कर रही है।” उन्होंने कहा, “अपनी बहुत ज्यादा जरूरतों में भी, इस भ्रम के खिलाफ कई युवाओं की सहज प्रतिक्रिया खास अहमियत रखती है। यह पीढ़ी किसी और चीज का इंतजार कर रही है।” आप गवाह हैं - उस पुरानी प्रज्ञा की वजह से जो आपके विचारों और समझ को आकार देती है - कि सृष्टि विविधता की समृद्धि में सामंजस्य है। आपके लोगों को बार-बार दुःख उठाना पड़ा है, जब कुछ लोगों के घमंड की वजह से यह सामंजस्य टूटा है। वे न सिर्फ चीजों के शोषण के निशान झेल रहे हैं, बल्कि दूसरों पर अपनी सोच थोपने के निशान हैं। अफ्रीका को तुरंत उन हालात और झगड़ों एवं दुश्मनी के माहौल से उबरने की जरूरत है जो कई देशों के सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने को तोड़ रहे हैं, गरीबी और अलग-थलग करने को बढ़ावा दे रहे हैं। सिर्फ मिलने-जुलने से ही जीवन फलता-फूलता है। बातचीत पहला कदम है। इसका मतलब यह नहीं है कि असहमति हो सकती है, जो झगड़े में बदल सकती है।
झगड़े से निपटने का सबसे अच्छा तरीका
मेरे माननीय पूर्वाधिकारी, पोप फ्राँसिस ने इस संबंध में एक अविस्मरणीय चिंतन दिया है, ““जब झगड़ा होता है, तो कुछ लोग बस उसे देखते हैं और ऐसे चले जाते हैं जैसे कुछ हुआ ही न हो; वे उससे अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाते हैं। दूसरे लोग उसे इस तरह अपना लेते हैं कि वे उसके गुलाम बन जाते हैं; वे अपना संतुलन खो देते, संस्थाओं पर अपनी उलझन और नाखुशी थोप देते और इस तरह एकता को नामुमकिन बना देते हैं। लेकिन एक तीसरा रास्ता भी है, जो झगड़े से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है। यह झगड़े का सीधा सामना करने, उसे सुलझाने और एक नई प्रक्रिया की कड़ी बनाने की इच्छा है। ‘शांति निर्माता धन्य हैं!’ (मती. 5:9)” (प्रेरितिक प्रबोधन इवंजेली गौदियुम, 227)। अंगोला बड़ी तरक्की कर सकता है, अगर देश के अधिकारी इसकी समृद्धि की बहुविध प्रकृति पर विश्वास करें। असहमति से न डरें; युवाओं के विचारों या बुजुर्गों के सपनों को न दबाएँ; और झगड़ों को नए रास्ते में बदलकर उन्हें संतुलित करने जानें। हर फायदे से पहले आम भलाई को रखें, कभी भी अपने हिस्से को समग्र से भ्रमित न करें। तब इतिहास आपको सही साबित करेगा, भले ही जल्द कुछ लोग आपका विरोध करने लगें।
समाज की खुशी और उम्मीद
मैंने आपके युवा समाज की खुशी और उम्मीद के बारे में बात की है। हालांकि इन्हें अक्सर सिर्फ निजी, व्यक्तिगत भावनाएँ माना जाता है, लेकिन सच तो यह है कि ये गहरी और सशक्त करनेवाली ताकत हैं – जो हर तरह से हार मानने और खुद में बंद होने के झुकाव का विरोध करती हैं। शरीर और आत्मा दोनों से तानाशाह और अत्याचारी आत्मा को शांत और लालसा को फीका करना चाहते हैं; वे ऐसे लोगों को पसंद करते जो जड़ता से ग्रस्त हों, शांत हों और सत्ता के आगे झुके हों। क्योंकि दुःख में, हम सचमुच अपने डर और कल्पना की कट्टरता में होते हैं; हम मीडिया के बहरा कर देनेवाले शोर, सोने की चमक, पहचान की झूठी बातों में शरण लेते हैं। नाराजगी, बेबसी और जड़ों से उखड़ने का एहसास हमें एक साथ लाने के बजाय बांटता है। इससे जनता से दूरी, दूसरों की बदकिस्मती के लिए नफरत और हर प्रकार के भाईचारे को नकारने का माहौल फैलता है। इस तरह का अनबन उन रिश्तों को खत्म कर देता है जो हर इंसान खुद से, दूसरों से और वास्तविकता से बनाए रखता है। जैसा कि पोप फ्रांसिस ने भी कहा है: “लोगों पर हावी होने और उन पर कंट्रोल पाने का सबसे बुरा तरीका है निराशा और हताशी फैलाना, भले ही इसके लिए कुछ मूल्यों को बचाने की आड़ का सहारा लिया जाए। आज, कई देशों में बढ़ा-चढ़ाकर बोलना, कट्टरता और ध्रुवीकरण राजनीतिक हथियार बन गए हैं।” (विश्वपत्र फ्रतेल्ली तूत्ती, 15)
सच्ची खुशी हमें अकेलेपन से आजाद करती है — ऐसी खुशी जिसे विश्वास सही मायने में पवित्र आत्मा का वरदान मानता है। जैसा कि संत पौलुस ने लिखा है: “आत्मा का फल है प्यार, खुशी, शांति...” (गलातियों 5:22)। सचमुच, खुशी जीवन को गहरा करती और समुदाय बनाती है: हर इंसान अपने रिश्तों की काबिलियत का इस्तेमाल करके, आम भलाई में अपना योगदान देकर, बढ़ती मुलाकातों के समुदाय में एक अनोखे और काबिल इंसान के तौर पर पहचान पाकर खुश होता है जो आत्मा को बड़ा करता हैं। खुशी जानती है कि ठहराव और मुश्किलों की सबसे अंधेरी जगहों में भी रास्ता कैसे बनाना है। इसलिए प्यारे दोस्तों, आइए हम अपने दिलों की जाँच करें, क्योंकि खुशी के बिना कोई नयापन नहीं है; अंदर की शांति के बिना कोई मुक्ति नहीं है; मुलाकात के बिना कोई राजनीति नहीं है; दूसरे के बिना कोई इंसाफ नहीं है।
अंगोला की काथलिक कलीसिया
आप सब मिलकर अंगोला को उम्मीद की परियोजना बना सकते हैं। काथलिक कलीसिया, जिसकी देश की सेवा के लिए आप बहुत इज्जत करते हैं, आटे में खमीर बनना चाहती है और साथ मिलकर रहने का एक सही मॉडल बनाना चाहती है, कि अमीर लोगों की हर प्रकार की गुलामी से आजाद कर सके, जिनके पास बहुत सारा पैसा है लेकिन नकली खुशियाँ हैं। सिर्फ हम सब मिलकर ही इन शानदार लोगों की क्षमता को बढ़ा सकते हैं, यहाँ तक कि शहरों के बाहरी इलाकों और दूर-दराज के गाँवों में भी, जहाँ जीवन खुशबहाल है और लोगों का भविष्य तैयार हो रहा है। आइए हम सब मिलकर मानव विकास में आनेवाली रुकावटों को दूर करें, उन लोगों के साथ मिलकर काम करें और उम्मीद करें, जिन्हें दुनिया ने छोड़ दिया है लेकिन ईश्वर ने चुना है। क्योंकि इस तरह हमारी उम्मीद जगी है: “कारीगरों ने जिस पत्थर को निकाल दिया था, वह कोने का पत्थर बन गया है।” (भजन 118:22), येसु मसीह ही, मानव और इतिहास की परिपूर्णता हैं।
ईश्वर अंगोला को आशीर्वाद दें!
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