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अफ्रीका यात्रा का अन्तिम पड़ाव इक्वेटोरियल गिनी

सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा लियो 14 वें ने मंगलवार को अंगोला से विदा ले इक्वेटोरियल गिनी के मलाबो की दो घण्टों वाली हवाई यात्रा तय की।

वाटिकन सिटी

इक्वेटोरियल गिनी, मंगलवार, 21 अफ्रैल, 2026 (रेई, रॉयटर्स): सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा लियो 14 वें ने मंगलवार को अंगोला से विदा ले इक्वेटोरियल गिनी के मलाबो की दो घण्टों वाली हवाई यात्रा तय की।

इक्वेटोरियल गिनी

भूमध्य रेखा के ठीक उत्तर में, गिनी की खाड़ी के गर्म, ज्वालामुखी से भरे पानी में, बायोको द्वीप  है, जिसकी अधिकांश सतह पहाड़ों और उष्णकटीबन्ध जगलों से ढकी हुई है, लेकिन यह द्वीप  इक्वेटोरियल गिनी के सर्वाधिक प्राचीन शहर मलाबो और इस वर्ष के जनवरी माह तक इसकी राजधानी मालाबो का भी घर है।

तार सन्देश

मंगलवार को लुआन्डा से मलाबो की हवाई यात्रा के दौरान कॉन्गो गणतंत्र, गाबोन एवं कैमरून से गुज़रते हुए सन्त पापा लियो 14 वें ने अंगोला सहित उक्त सभी राष्ट्रों के राष्ट्रपतियों के नाम अलग-अलग तार सन्देश प्रेषित कर उनके देशों में सुख एवं समृद्धि की मंगलकामना की। उन्होंने प्रार्थना की कि इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रशासनाधिकारियों एवं लोगों को विवेक, प्रज्ञा और समृद्धि का दिव्य आशीर्वाद मिले।    

मलाबो में सन्त पापा लियो सर्वप्रथम देश के राष्ट्रपति थेओदोर ओबियांग न्यूगेमा मबासागो से मुलाकात कर देश के अन्य वरिष्ठ प्रशासन एवं नागर अधिकारियों तथा राजनयिक कोर से मुलाकात कर रहे हैं। मबासागो 1979 से सत्ता में हैं तथा विश्व के सबसे लम्बे समय तक पद पर रहनेवाले राष्ट्रपति बन गये हैं।

इक्वेटोरियल गिनी की सरकार पर कई बार मानवाधिकारों के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं जिनसे सरकार अनवरत इनकार करती रही है।

तेल सम्पदा, अमीरी और ग़रीबी

सन् 1982 में सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय ने इक्वेटोरियल गिनी की प्रेरितिक यात्रा की थी, जब से अब तक, 1990 के दशक के बीच में बड़े तेल भंडार की खोज के बाद से, बहुत कुछ बदल चुका है। प्रति व्यक्ति के हिसाब से इक्वेटोरियल गिनी अफ्रीका के सबसे अमीर देशों में से एक बन गया है। यह नई दौलत मालाबो के बहुत शानदार, मॉडर्न एयरपोर्ट पर पहुँचते ही नज़र आ जाती है, राजकीय विश्वविद्यालय के नए लियो 14 वें कैंपस में भी इसे देखा जा सकता है, जिसका नाम हाल ही में सन्त पापा लियो की प्रेरितिक यात्रा के सम्मान में बदला गया है।

चार दशकों पूर्व सम्पन्न सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय की यात्रा के बाद से हालांकि देश अमीर कहलाने लगा है तथापि आम जनता के लिये कुछ खास परिवर्तन देखने को नहीं मिले हैं। इसका कारण यह है कि इक्वेटोरियल गिनी की तेल संपदा बहुत असमान रूप से वितरित है और इसलिए गरीबी व्यापक रूप से फैली हुई है – देश संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास सूचकांक में 193 में से 133वें स्थान पर है।

देश का विश्वास

मालाबो महाधर्मप्रान्त के प्रतिधर्माध्यक्ष जोस न्डोंगो कहते हैं, “हमारे सामने यहाँ कई मुद्दे हैं, लेकिन सन्त पापा लियो की यात्रा हमें कुछ साहस, कुछ शक्ति देगी ताकि हम जैसे ख्रीस्तीय हैं वैसे ही अपने विश्वास में सुदृढ़ बने रहें।”

इक्वेटोरियल गिनी की कुल आबादी लगभग दो करोड़ है जिनमें लगभग 89 से 90 प्रतिशत लोग ख्रीस्तीय धर्मानुयायी हैं। शेष इस्लाम धर्मानुयायी तथा जीववादी लोग हैं।

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21 अप्रैल 2026, 11:21