पोप फ्राँसिस की स्मृति में
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 (जेस्विट वेबसाईट) : “प्रथम जेसुइट पोप, एक ऐसे इंसान जो आध्यात्मिक साधना से बने थे, जिनमें आत्मपरख, आंतरिक स्वतंत्रता और हर चीज में ईश्वर की खोजने करने की चाह थी।” पोप फ्राँसिस की पहली पुण्यतिथि को समर्पित जेस्विट धर्मसंघ की वेबसाईट के पृष्ट पर यही लिखा गया है।
13 मार्च 2013 को, कॉन्क्लेव ने संत इग्नासियुस लोयोला के एक बेटे को संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के होने के लिए चुना। यह प्रेरिताई न सिर्फ अपनी ऐतिहासिक शुरुआतों से, बल्कि संत इग्नासियुस की विशिष्ठता (करिज्म) से भी पहचानी जाती है जिसने इसे आकार दिया : आत्मपरख, आंतरिक स्वतंत्रता, और सभी चीजों में ईश्वर की खोजने की चाह के द्वारा।
अपने पूरे पोप कार्यकाल के दौरान, पोप फ्रांसिस ने दुनिया को बाहरी इलाकों की ओर ध्यान देने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कलीसिया को एक गढ़ की तरह नहीं, बल्कि एक खुले अस्पताल की तरह दर्शाया, जहाँ इंसानियत के जख्मों पर करुणा की मलहम पट्टी लगायी जाती है। यह सोच संत इग्नासियुस के उस आह्वान में छिपी है कि जहाँ सबसे ज्यादा जरूरत हो, वहाँ जाएँ।
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