आप्रवासियों के साथ बदतर' बर्ताव की सन्त पापा ने की निंदा
वाटिकन सिटी
वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 (रेई, रॉयटर्स): सन्त पापा लियो 14 वें ने गुरुवार को आप्रवासियों के साथ तमाम विश्व में होने वाले बर्ताव की निंदा करते हुए कहा कि प्रायः हिंसा या निर्धनता से बचने के लिए आने वाले आप्रवासियों और शरणार्थियों को "घर के पालतू जानवरों से भी बदतर" माना जाता है।
अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की कड़ी आप्रवास नीतियों के आलोचक रहे सन्त पापा लियो 14 वें ने अपनी अफ्रीकी यात्रा के बाद रोम वापसी यात्रा के दौरान एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए आप्रवासियों के साथ मानवीय व्यवहार की मांग की।
आप्रवासी भी इन्सान हैं
स्पेन की पत्रकार एवा फरनानडेज़ ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए सवाल किया था कि अफ्रीका के कई युवा यूरोप को सपनों का महाद्वीप मानकर वहाँ जीवन यापन के सपने देखते हैं, किन्तु इनमें से अधिकांश को निराशा ही हासिल होती है। इसके जवाब में सन्त पापा ने बिना किसी देश विशेष का नाम लिये कहा कि हमें यह समझना होगा कि आप्रवासी भी इन्सान हैं। उन्होंने कहाः "वे इंसान हैं और हमें इंसानों के साथ इंसानियत से पेश आना चाहिए और उनके साथ घर के पालतू जानवरों या जानवरों से भी बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए।"
सन्त पापा ने प्रश्न कियाः उत्तरी गोलार्द्ध दक्षिणी गोलार्द्ध की मदद के लिए क्या कर रहा है? उन देशों की मदद के लिए जहाँ आज के युवा अपना भविष्य नहीं ढूंढ पा रहे हैं और इसलिए उत्तर की दिशा में जाने का सपना देख रहे हैं? हर कोई उत्तर की ओर जाना चाहता है लेकिन प्रायः उत्तर के पास उन्हें मौके देने का कोई जवाब नहीं होता। बहुत से लोग परेशान हैं… और इसी वजह से मानव तस्करी होती है जो आप्रवास का ही एक हिस्सा बन गया है।
सीमा नियमन और व्यवस्था
सन्त पापा ने कहाः व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि किसी भी देश को अपनी सीमा के नियमन का पूरा अधिकार है। मैं यह नहीं कह रहा कि हर किसी को बिना किसी व्यवस्था के आने दिया जाए, कभी-कभी ऐसा करने से मेज़बान देशों में उन देशों से भी अधिक गलत हालात बन जाते हैं जिन्हें वे पीछे छोड़ आए हैं। फिर भी, मैं खुद से पूछता हूँ: हम अमीर देशों में गरीब देशों के हालात बदलने के लिए क्या कर रहे हैं? हम सरकारी मदद और बड़ी-बड़ी अमीर तथा मल्टीनेशनल कंपनियों के निवेश के ज़रिए उन जैसे देशों के हालात बदलने की कोशिश क्यों नहीं कर सकते जहाँ हम इस यात्रा पर गए थे?
केवल मुनाफ़ा न देखें
सन्त पापा ने कहा कि अफ्रीका को प्रायः कई लोग खनिज पदार्थों के खनन और दूसरे देशों के लाभ के लिए अपनी दौलत के उपयोग की जगह के तौर पर देखते हैं। सम्भवतः तमाम विश्व में हमें इन अफ्रीकी देशों में अधिक न्याय, समानता और विकास को बढ़ावा देने के लिए और अधिक काम करना चाहिए ताकि लोगों को स्पेन जैसे दूसरे देशों में जाने की ज़रूरत न पड़े।
मानव प्रतिष्ठा का सम्मान करें
उन्होंने स्मरण दिलाया कि आप्रवासी भी इंसान हैं, भले ही वे किसी भी हालात में क्यों न हों इसलिये हमें इंसानों के साथ इंसानियत से पेश आना चाहिए, उनके साथ जानवरों से भी बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए जैसा कि अक्सर होता है। यह एक बहुत बड़ी चुनौती है: कोई देश कह सकता है कि वह एक तय संख्या से ज़्यादा लोगों को नहीं रख सकता लेकिन जब लोग आते हैं तो वे इंसान होते हैं और इन्सान होने के नाते सम्मान और मानव प्रतिष्ठा के हकदार होते हैं।
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