सन्त पापा लियो 14 वें कैमरून में सन्त पापा लियो 14 वें कैमरून में   (ANSA)

धरती को तबाह करने वाले 'अत्याचारियों' की आलोचना

कैमरून के बामेन्दा में गुरुवार को सन्त पापा लियो 14 वें ने उन “अत्याचारियों” की कड़ी आलोचना की जो युद्ध और शोषण से धरती को तबाह कर रहे हैं। अफ्रीका में अलगाववादी संघर्ष के केन्द्र बामेन्दा में उन्होंने शांति का संदेश दिया।

वाटिकन सिटी

बामेन्दा, कैमरून, 17 अप्रैल, 2026 (रेई, एपी): कैमरून के बामेन्दा में गुरुवार को सन्त पापा लियो 14 वें ने उन “अत्याचारियों” की कड़ी आलोचना की जो युद्ध और शोषण से धरती को तबाह कर रहे हैं। अफ्रीका में अलगाववादी संघर्ष के केन्द्र बामेन्दा में उन्होंने शांति का संदेश दिया।

जनसमुदाय में आनन्द

कैमरून के अशांत उत्तर-पश्चिमी इलाके का शहर बामेन्दा वही शहर है जो अफ्रीका के सर्वाधिक भुला दिये गये संकटों में से एक का केन्द्र बना हुआ है। 'एंग्लोफोन क्राइसिस' नाम से विख्यात यह संकट बामेन्दा के विद्रोहियों के बीच विगत दस वर्षों से जारी है। गुरुवार को सन्त पापा लियो 14 वें ने कैमरून के इसी शहर का दौरा किया जहाँ सड़कों के ओर-छोर पर जमा होकर, करतल ध्वनि से, गीतों की धुनों और ढोलक की ताल पर खुशी से झूमता जनसमुदाय नाच उठा था। बामेन्दा को लोग सुदूर से उनके शहर पहुँचे खास मेहमान की उपस्थिति से अति प्रसन्न थे क्योंकि उनके मन में आशा जाग उठी थी कि सन्त पापा लियो उस हिंसा पर सम्पूर्ण विश्व को सचेत करेंगे जिसने लगभग एक दशक से इस क्षेत्र को सदमे में डाल रखा है।

इस समय विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा लियो 14 वें अफ्रीका की 11 दिवसीय प्रेरितिक यात्रा पर हैं, अफ्रीका में यह यात्रा उनकी पहली यात्रा है जो 13 अफ्रैल को शुरु हुई थी तथा 23 अफ्रैल तक जारी रहेगी।    

शांति बैठक

बामेन्गा में गुरुवार को ही सन्त पापा लियो ने एक शांति बैठक की अध्यक्षता की जिसमें मैनकॉन जनजाति के एक पारंपरिक प्रमुख, एक प्रेस्बिटेरियन मध्यस्थ, एक इमाम और एक काथलिक धर्मबहन शामिल थे। इस शांति बैठक का लक्ष्य उस अन्तरधार्मिक अभियान को प्रकाश में लाना था जो अलगाववादी  झगड़े को खत्म करने और इसके कई पीड़ितों की देखभाल करने की कोशिश कर रहा है।

बामेन्गा में मैनकॉन द्वारा दान की गई ज़मीन पर निर्मित सन्त जोसफ महागिरजाघर में अपनी बात रखते हुए, सन्त पापा लियो ने शांति आंदोलन की सराहना की तथा धर्म के नाम पर झगड़ों के खिलाफ़ चेतावनी दी। ग़ौरतलब है कि ईरान पर अमरीकी-इस्राएली युद्ध के सन्दर्भ में सन्त पापा इस प्रकार की चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा, “धन्य हैं वे लोग जो शांति का निर्माण करते हैं!” “लेकिन उन लोगों को धिक्कार जो अपने सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक लाभ के लिये धर्म और ईश्वर के नाम का दुरुपयोग करते तथा जो पवित्र है उसे अंधेरे और गंदगी में धकेलते हैं।”

निर्णायक परिवर्तन

सन्त पापा लियो ने इस अवसर पर एक निर्णायक परिवर्तन का आह्वान किया, जो लड़ाई-झगड़े और सैनिक अथवा आर्थिक लाभ के लिए ज़मीन के शोषण से दूर ले जाए। उन्होंने कहा, “विश्व को कुछेक अत्याचारी तबाह कर रहे हैं, इसके बावजूद इसे बहुत सारे समर्थन देनेवाले भाईयों एवं बहनों ने एक साथ रखा है!”

सन्त पापा लियो की टिप्पणी कैमरून के अलगाववादी झगड़े पर केन्द्रित थीं, किन्तु वाटिकन के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि इस प्रेरितिक यात्रा के दौरान सन्त पापा लियो शांति का सुसमाचार प्रसारित कर रहे हैं, जो सीमाओं एवं महाद्वीप से परे है तथा जो उन सभी के लिये है जो धरती पर हो रहे युद्धों और शोषण के लिए ज़िम्मेदार हैं।

'एंग्लोफोन क्राइसिस'

बामेन्दा को शेष विश्व के लिये एक आदर्श निरूपित कर सन्त पापा लियो ने कहा,  “बामेन्दा,  आज तू पहाड़ी पर बसा वह शहर है जो सबकी नज़रों में शान से चमक रहा है!” कैमरून के दो एंग्लोफोन इलाकों में जारी 'एंग्लोफोन क्राइसिस' उपनिवेशवादी इतिहास से जुड़ा संघर्ष है। प्रथम  विश्व युद्ध के बाद देश फ्रांस और ब्रिटेन के बीच बंट गया था। सन् 1961 में अंग्रेजी भाषी इलाके संयुक्त राष्ट्र संघ के समर्थन हुए जनमत संग्रह के बाद फ्रेंच भाषी कैमरून में शामिल हो गए थे, लेकिन अलगाववादियों का कहना है कि तब से उन्हें राजनैतिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया है। 2017 में, अंग्रेज़ी भाषी अलगाववादियों ने बगावत शुरू कर दी थी जिसका मकसद फ्रेंच बोलने वाले अधिकांश लोगों से अलग होकर एक स्वतंत्र देश का निर्माण करना था। अन्तरराष्ट्रीय संकट समूह नामक मानवाधिकार संघ के अनुसार, इस लड़ाई में अब तक 6,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और 600,000 से अधिक बेघर हो गए हैं।

भ्रष्टाचार और शोषण की निन्दा

गुरुवार को सन्त पापा लियो 14 वें ने बामेन्गा के हवाई अड्डे पर आयोजित ख्रीस्तयाग समारोह की अध्यक्षता कर यहाँ प्रवचन किया। ज़ोरदार स्वागत और लाऊडस्पीकर से गूँजती संगीत की धुन और जयनारों से लगभग 20,000 श्रद्धालुओं ने सन्त पापा लियो का भावपूर्ण स्वागत किया। अपने प्रवचन में सन्त पापा लियो ने कैमरून में व्याप्त “नैतिक, सामाजिक और राजनैतिक भ्रष्टाचार” की ओर इशारा किया जो उसके विकास को रोक रहा है। उन्होंने कहा कि झगड़े और भ्रष्टाचार की इन अंदरूनी समस्याओं के साथ “बाहर से होने वाला नुकसान भी है, जो उन लोगों द्वारा किया जाता है, जो मुनाफे के नाम पर अफ्रीकी महाद्वीप का शोषण करते तथा उसे लूटते रहते हैं।”

सन्त पापा लियो ने कहा, “जो लोग आपकी ज़मीन से उसके संसाधनों को लूटते हैं, वे आम तौर पर मुनाफ़े का अधिकांश हिस्सा हथियारों में लगाते हैं, जिससे अस्थिरता और मौत का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला चलता रहता है।” उन्होंने कहा, “यह एक उलटी दुनिया है, ईश्वर द्वारा सृजित चीज़ों का शोषण है जिसकी हर ईमानदार अन्तःकरण द्वारा निन्दा की जानी चाहिये।”

कैमरून में तेल, प्राकृतिक गैस, कोबाल्ट, बॉक्साइट, लोहा, सोना और हीरे की बड़ी खानें हैं, जो  इसकी अर्थ व्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन गया है। हालांकि फ्राँस तथा ग्रेट ब्रिटेन की कंपनियों द्वारा कैमरून में निष्कर्षण उद्योग पर लंबे समय से दबदबा रहा है, हाल के वर्षों में चीनी कंपनियों ने विशेषकर सोने की खानों वाले इलाकों में अपनी अच्छी-खासी मौजूदगी बना ली है।

बामेन्दा की आशा

बामेन्दा के महाधर्माध्यक्ष एंड्रयू नेक्या फुआन्या ने सन्त पापा को बताया कि वहां के लोगों को “ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा जिसे उन्होंने खुद नहीं बनाया,” जिससे उनकी रोजी-रोटी, घर और शिक्षा छिन गई: बच्चों को सालों तक स्कूल जाने की इजाज़त नहीं थी। उन्होंने सन्त पापा से कहा, "सन्त पापा, आज आपके पैर बामेंदा की उस मिट्टी पर हैं जिसने हमारे कई बच्चों का खून पिया है।" उन्होंने कहा, "कैमरून की शांतिपूर्ण भविष्य की आशा, भ्रष्टाचार, गरीबी और आप्रवास जैसी समस्याओं से "लगातार निराश" हुई है, अब आपकी उपस्थिति से हम यही उम्मीद करते हैं कि विश्व का ध्यान जगत के इस कोने पर पड़े।"

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17 अप्रैल 2026, 11:48