संत पापा लियो आमदर्शन समारोह में संत पापा लियो आमदर्शन समारोह में 

संत पापा लियोः अफ्रीकी देशों की प्रेरितिक यात्रा, अनमोल खजाना है

संत पापा लियो 14वें ने हाल ही में अफ्रीकी देशों की अपनी प्रेरितिक यात्रा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि यह उनके हृदय में, उनकी प्रेरिताई हेतु एक अनमोल खजाना है।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में अफ्रीकी देशों की प्रेरितिक यात्रा के एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

संत पापा लियो 14वें अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात और सुस्वागतम्।

आज मैं अफ्रीकी देशों की अपनी प्रेरितिक यात्रा जो 13 अप्रैल से 23 अप्रैल को अल्जीरिया, कैमरून, अंगोला और इक्वेटोरियल गिनी में पूरी हुई, एक विवरण प्रस्तुत करना चाहूँगा।

संत पापा की चाह

संत पापा लियो ने कहा कि अपने परमाध्यक्षीय काल के शुरू से ही मैंने अफ्रीका की यात्रा करने की चाह रखी थी। मैं ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के भाव प्रकट करता हूँ जिन्होंने मुझे एक चरवाहे की भांति वहाँ की ईश प्रजा से मिलने और उन्हें प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान किया, इसके साथ ही, यह इतिहास के ऐसे समय में शांति के संदेश स्वरूप अनुभव करना है, जब युद्ध और अंतराष्ट्रीय कानून का गंभीर और लगातार उल्लंघन हो रहा है। संत पापा ने धर्माध्यक्षों और सभी देश के अधिकारियों के प्रति अपने कृतज्ञता के भाव व्यक्त किये जिन्होंने इस यात्रा में उनका स्वागत किया और इसके आयोजन में अहम  भूमिका अदा की।

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन

अल्जीरिया की भूमि

संत पापा ने कहा कि यह ईश्वर की योजना रही कि मेरी यात्रा का प्रथम पड़ाव संत अगुस्टीन का देश अल्जीरिया रहा। इस भांति, एक ओर मैंनें अपने को अपनी आध्यात्मिकता की जड़ों के निकट पाया, तो वहीं दूसरी ओर विश्व और वर्तमान कलीसिया के महत्वपूर्ण सेतुओं को पार करते हुए उनमें मजबूती का एहसास किया- कलीसियाई आचार्यो का अति फलप्रद सेतु, इस्लामिक दुनिया का सेतु, अफ्रीका महादेश का सेतु।

एक साथ जीवनयापन संभव

अल्जीरिया में मेरा स्वागत अपने में सिर्फ सम्मानजनक नहीं बल्कि गर्मजोशी रहा, जहाँ हमने सर्वप्रथम इस बात का अनुभव किया और दुनिया के समक्ष इस बात को प्रस्तुत किया कि यदि हम एक दूसरे को करूणामय पिता ईश्वर की संतान स्वरुप देखते, तो भाई-बहनों के रूप में एक साथ जीवनयापना करना हमारे लिए संभव है, चाहे हम अलग-अलग धर्मों के अनुयायी ही क्यों न हों। उससे भी बढ़कर यह संत अगुस्टीन की शिक्षा से सीखने का एक अवसर रहाः जीवन के उनके अनुभवों, लेखों, आध्यात्मिकता से जो ईश्वर और सत्य की खोज में एक निपुण व्यक्ति हैं। यह वर्तमान समय में ख्रीस्तीयों और हर व्यक्तिय के लिए एक साक्ष्य है जो पहले से कहीं अधिक जरुरी है।

संत पापा लियो का आशीर्वाद
संत पापा लियो का आशीर्वाद   (ANSA)

अन्य तीन देशों का यात्रा जिसे मैंने पूरी की, जो अपने में ख्रीस्तीय बहुलक देश हैं, और इसलिए मैंने अपने को विश्वास के समारोह और गर्मजोशी स्वागत में सराबोर पाया, जिसमें अफ्रीकी की विशेष छवि देखने को मिली। अपने पूर्ववर्तियों की भांति, मैंने उस बात का अनुभव किया कि गलीसिया की भीड़ में येसु के संग क्या हुआ होगा- उन्होंने उन्हें न्याय हेतु भूखा और प्यासा देखा, और यह घोषित किया, “धन्य हैं वे जो दरिद्र हैं, धन्य हैं वे जो नम्र हैं, धन्य हैं वे जो शाति स्थापित करते हैं...” उनके विश्वास को देखते हुए उन्होंने कहा, “तुम पृथ्वी की नमक और दुनिया की ज्योति हो।” (मत्ती.5.1-16)

कैमरूनः मेल-मिलाप पर बल

संत पापा लियो ने कहा कि कैमरून की यात्रा ने मुझे देश में शांति और मेल-मिलाप हेतु एक साथ कार्य करने पर जोर देने हेतु प्रेरणा दी क्योंकि वह देश दुर्भाग्यवश हिंसा और तनाव से प्रभावित है। मुझे बामेंदा अंग्रेजी भाषी प्रांत की भेंटकर खुशी हुई, जहाँ मैंने शांति हेतु एक साथ मिलकर कार्य करने को प्रोत्साहन दिया। कैमरून अपने में “छोटा अफ्रीका” कहलाती है, जो हमारा ध्यान अपनी विविधता, प्राकृतिक समृद्धि और संपदों की ओर ध्यान आकर्षित करती है, लेकिन हम इस अभिव्यक्ति को इस रूप में भी परिभाषित करते हैं कि पूरे महादेश की बड़ी ज़रूरतें कैमरून में पाई जाती है- धन का बराबर वितरण, युवाओं का सशक्तिकरण, भ्रष्टचार की महामारी को खत्म करना, समग्र और सतत विकास को बढ़ावा, विभिन्न तर के उपनिवेशों का सामना और दूर दर्शी अंतरराष्ट्रीय सहयोग। मैं कैमरून की कलीसिया और कैमरूनवासियों का शुक्रिया अदा करता हूँ, जिन्होंने इतने प्यार से मेरा स्वागत किया, और मैं प्रार्थना करता हूं कि मेरे दौरे के दौरान दिखाई गई एकता की भावना ज़िंदा रहे और भविष्य के फैसलों और कामों के निष्पादन में मदद करे।

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन   (@Vatican Media)

संत पापा ने कैमरून की कलीसिया और कैमरून के लोगों के प्रति अपने हृदय के उदगार व्यक्त करते हुए कैमरूनवासियों के बीच एकता के स्थायित्व हेतु प्रार्थना की जिसे उन्होंने अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान देखा जिससे वे भविष्य में अपने निर्णयों और कार्यों को भली भांति कर सकें।

अंगोला की खुशी

संत पापा ने कहा कि मेरी यात्रा का तीसरा पड़ाव अंगोला था, जो भूमध्यरेखा के दक्षिण में एक बड़ा देश है, जहाँ ख्रीस्तीय परंपरा का लम्बा पुराना इतिहास है, जो पुर्तगाली उपनिवेश से जुड़ा है। कई अफ्रीकी देशों की भांति, अपनी आज़ादी के बाद, अंगोला को भी मुश्किल दौर से गुज़रना पड़ा, जिसके फलस्वरुप हम देश में एक लंबे और खूनी गृह युद्ध की स्थिति को पाते हैं। इतिहास के इन मुश्किल समय में, ईश्वर ने कलीसिया को मार्ग दिखाया और उसे परिशुद्ध करते हुए, सुसमाचार, मानव विकास, मेल-मिलाप और शांति में सेवा हेतु परिवर्तन लाया। एक स्वतंत्र कलीसिया एक स्वतंत्र लोगों के लिए। मरियम तीर्थस्थल, मामा मुक्सीमा जिसका अर्थ “माता का हृदय” है, मैंने अंगोलावासियों के हृदय की धड़कन का अनुभव किया। लोगों के संग विभिन्न मिलनों में मैंने विभिन्न आयु के लोकधर्मी नर और नारियों की खुशी देखी, जो लोगों के मध्य ईश्वरीय राज्य की उपस्थिति, एक भविष्यवाणी को चरितार्थ करती है। मैंने धर्मप्रचारकों को देखा जो अपने को पूर्णरूपेण समुदाय की सेवा हेतु अपने को समर्पित करते हैं। मैंने बहुत से बुजुर्गों को देखा जो मेहनत और दुःखों से थके हुए थे, फिर भी सुसमाचार की खुशी उनमें चमक रही थी; मैंने महिलाओं और पुरुषों को पुनर्जीवित प्रभु की महिमा के गीतों की धुन पर नाचते देखा, जो एक ऐसी उम्मीद की नींव है जो विचारधाराओं और ताकतवर लोगों के खोखले वादों से होने वाली निराशाओं को झेलती है।

संत पापा लियो का संबोधन
संत पापा लियो का संबोधन   (@Vatican Media)

कलीसिया का उत्तरदायित्व

संत पापा लियो ने कहा कि यह आशा हमसे ठोस निष्ठा की मांग करती है और यह कलीसिया का उत्तरदायित्व है, जो ईश वचन के साक्ष्य और उसके साहसपूर्ण उद्घोषणा द्वारा सभों के अधिकारों को पहचान और उन्हें सम्मान प्रदान करे। अंगोला के अलावे अन्य देशों के अधिकारियों को मैंने इस बात की सुनिश्चितता प्रदान की की कलीसिया विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान देने हेतु प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि अफ्रीकी की मेरी प्रेरितिक यात्रा का अंतिम पड़ाव इक्वेटोरियल गिनी था जो सुसमाचार प्रचार के 170 सालों बाद हुआ। परंपरा के विवेक और ख्रीस्त की ज्योति में, गिनी के लोगों ने अपने इतिहास के उतार-चढ़ाव का सामना किया है और हाल के दिनों में, संत पापा की मौजूदगी में, उन्होंने उम्मीद भरे भविष्य की ओर एक साथ चलने के अपने इरादे को बड़े उत्साह में दोहराया है।

संत पापा लियोः अफ्रीकी देशों की यात्रा का संक्षिप्त विवरण

अविश्वमरणीय घटना

संत पापा ने कहा कि बाटा के कैदखाने में जो हुआ उसे मैं नहीं भूल सकता हूँ- वहाँ के कैदियों ने अपनी ऊंची आवाज में ईश्वर और संत पापा के प्रति कृतज्ञता के गीत गये, उन्होंने इस बात का निवेदन किया कि उन्हें पापों से स्वतंत्रता और मुक्ति मिले। “मैंने पहले कभी ऐसे चीज को नहीं देखा। और इसके बाद उन्होंने झमाझम बरिश में मेरे संग हे पिता हमारे की प्रार्थना का पाठ किया।”  ईश्वरीय राज्य की साक्षात निशानी। और इसके साथ ही बरिश में ही बाटा के युवाओं की बृहृद उपस्थिति। यह ख्रीस्तीय खुशी का समारोह था, उन नौजवानों का हृदय स्पर्शी साक्ष्य, जिन्होंने सुसमाचार में अपनी स्वतंत्रता और ज़िम्मेदारी से आगे बढ़ने का रास्ता पाया है। इस समारोह की चरम अगले दिन यूखारीस्तीय बलिदान के साथ खत्म हुआ, जो इक्वेटोरियल गिनी की यात्रा के साथ-साथ पूरी प्रेरितिक यात्रा को भी यादगार बना दिया।

आमदर्शन समारोह में  विश्वासियों  और तीर्थयात्रीगण
आमदर्शन समारोह में विश्वासियों और तीर्थयात्रीगण   (@Vatican Media)

भविष्य हेतु अवसर

प्रिय भाइयो और बहनों, संत पापा लियो ने कहा कि अफ्रीकी लोगों के लिए संत पापा की यात्रा, उन्हें अपनी आवाज दूसरों के सुनाने का अवसर देता है, उन्हें ईश्वीरय संतान होने की खुशी को व्यक्त करने और एक बेहतर भविष्य की आशा प्रदान करता है, जहाँ हर किसी को सम्मान दिया जाता हो। उन्हें यह अवसर प्रदान करने हेतु मैं अपने में खुशी का अनुभव करता हूँ, वहीं मैं उनसे मिली सारी चीजों के लिए ईश्वर का धन्यवाद करता हूँ, जो मेरे हृदय और मेरी प्रेरिताई हेतु एक अनमोल खज़ाना है।

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29 अप्रैल 2026, 15:43